नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की राजनीति और चुनावी व्यवस्था पर इन दिनों एक नया विवाद खड़ा हो गया है। एक बड़े सार्वजनिक मंच पर प्रख्यात यूट्यूबर अभिजीत दिपके, सोशल मीडिया विश्लेषक ध्रुव राठी और मशहूर अभिनेता प्रकाश राज एक साथ नजर आए। इस दौरान इन सभी ने देश के मुख्य चुनाव आयुक्त यानी सीईसी के इस्तीफे की जोरदार मांग उठाई है। मंच से साफ शब्दों में कहा गया कि मौजूदा चुनाव प्रक्रिया में कई तरह की खामियां आ रही हैं जिन्हें तुरंत सुधारा जाना चाहिए।
इस कार्यक्रम में मौजूद वक्ताओं ने चुनाव आयोग के काम करने के तौर-तरीकों पर कड़े सवाल खड़े किए। उनका मुख्य फोकस एसआईआर व्यवस्था को लेकर था जिसे पूरी तरह से बंद करने की मांग की गई। वक्ताओं का कहना था कि लोकतंत्र को बचाने के लिए चुनाव प्रक्रिया का पारदर्शी होना बहुत जरूरी है। इस आयोजन के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है और हर कोई इस नए गठबंधन व तेवर पर अपनी नजर बनाए हुए है।
चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठे बड़े सवाल
मंच से बोलते हुए ध्रुव राठी ने चुनावी पारदर्शिता का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। उन्होंने कहा कि देश के नागरिकों को यह जानने का पूरा हक है कि उनका वोट सुरक्षित तरीके से सही जगह पहुंच रहा है या नहीं। उनके साथ मौजूद अभिजीत दिपके ने भी युवाओं की आवाज को बुलंद करते हुए मौजूदा व्यवस्था पर तीखे प्रहार किए। दोनों डिजिटल रचनाकारों ने आंकड़ों के जरिए अपनी बात रखी और जनता से अपील की कि वे अपने अधिकारों के प्रति पूरी तरह से जागरूक रहें।
वहीं दक्षिण भारतीय सिनेमा के दिग्गज और मुखर वक्ता माने जाने वाले प्रकाश राज ने भी सरकार और चुनाव आयोग को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष संस्थाओं का दबाव में काम करना लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक संकेत है। प्रकाश राज ने दो टूक कहा कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त जिम्मेदारी नहीं लेते और अपने पद से इस्तीफा नहीं देते, तब तक देश में स्वतंत्र चुनाव का भरोसा वापस नहीं आ सकता। उन्होंने जनता से इस मुहिम से जुड़ने का आह्वान किया।
एसआईआर व्यवस्था को तुरंत बंद करने की मांग
इस पूरे सम्मेलन का केंद्र बिंदु एसआईआर व्यवस्था को समाप्त करना रहा। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि इस विशेष व्यवस्था की वजह से आम मतदाताओं को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने मंच से ऐलान किया कि इस व्यवस्था को तुरंत प्रभाव से बंद किया जाना चाहिए ताकि चुनाव प्रक्रिया को सरल और सहज बनाया जा सके। वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगे नहीं मानी गईं तो इस आंदोलन को और अधिक व्यापक स्तर पर ले जाया जाएगा।
जमीनी स्तर पर इस नए मंच के गठन और बयानों का असर अब साफ दिखने लगा है। सोशल मीडिया पर भी इन तीनों हस्तियों के बयानों को लेकर भारी संख्या में प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। एक तरफ जहां उनके समर्थक इस कदम को लोकतंत्र को मजबूत करने वाला बता रहे हैं, वहीं विरोधी खेमे की तरफ से भी तीखी प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है और आगे के अपडेट्स आप तक पहुंचाती रहेगी।
आगामी राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव
इस तरह के आयोजनों से यह साफ हो गया है कि डिजिटल मंचों के चर्चित चेहरे अब मुख्यधारा की राजनीति और व्यवस्थागत सुधारों में सीधी दखलअंदाजी करने लगे हैं। अभिजीत दिपके और ध्रुव राठी जैसे लोकप्रिय क्रिएटर्स की पहुंच देश के करोड़ों युवाओं तक है। जब ऐसे लोग किसी बड़े अभिनेता के साथ मिलकर सड़क से लेकर मंच तक आवाज उठाते हैं, तो उसका असर दूरगामी होता है। चुनाव आयोग की तरफ से अभी तक इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी सरगर्मी और ज्यादा बढ़ने के पूरे आसार हैं। विपक्षी दलों के साथ-साथ कई सामाजिक संगठन भी इस मांग के समर्थन में उतर सकते हैं। जनता के बीच भी इस बात को लेकर बहस छिड़ गई है कि क्या चुनाव आयोग जैसी स्वायत्त संस्थाओं में सचमुच सुधार की जरूरत है। द फ्रीलान्स इस मामले की निष्पक्ष पड़ताल जारी रखेगा ताकि पाठकों तक हर एक सच पूरी स्पष्टता के साथ पहुंच सके।








