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देशपढ़ने में समय: 6 मिनट

मल्लिकार्जुन खरगे के लंच से समाजवादी पार्टी ने बनाई दूरी, अखिलेश यादव बोले- कोई एक नहीं जा पाया

दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा आयोजित इंडिया गठबंधन के लंच और उसके बाद के प्रदर्शन में समाजवादी पार्टी के नेताओं की गैरमौजूदगी से राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी खेमे में दरार की चर्चाओं के बीच सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सफाई दी है कि किसी कारणवश पार्टी का कोई भी नेता इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सका।
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नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस
राष्ट्रीय संपादकीय ब्यूरो•7 अक्टूबर 2026 • अपडेटेड•36
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मल्लिकार्जुन खरगे के लंच से समाजवादी पार्टी ने बनाई दूरी, अखिलेश यादव बोले- कोई एक नहीं जा पाया
📷 मल्लिकार्जुन खरगे के लंच से समाजवादी पार्टी ने बनाई दूरी, अखिलेश यादव बोले- कोई एक नहीं जा पाया — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा आयोजित इंडिया गठबंधन के लंच और उसके बाद के प्रदर्शन में समाजवादी पार्टी के नेताओं की गैरमौजूदगी से राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी खेमे में दरार की चर्चाओं के बीच सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सफाई दी है कि किसी कारणवश पार्टी का कोई भी नेता इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सका।
  • इस खबर से जुड़े सभी पहलुओं की जांच और निगरानी संबंधित विभागों द्वारा की जा रही है।
  • विशेषज्ञों के अनुसार इस घटनाक्रम का आम जनता पर सीधा असर पड़ सकता है।

नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — राजधानी दिल्ली में विपक्षी गठबंधन इंडिया के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है, इस बात की चर्चाएं फिर से तेज हो गई हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की ओर से विपक्षी दलों के नेताओं के लिए एक विशेष लंच मीट का आयोजन किया गया था। इस महत्वपूर्ण बैठक और लंच कार्यक्रम से समाजवादी पार्टी के सांसदों और नेताओं ने पूरी तरह दूरी बना ली। इतना ही नहीं, उसके अगले दिन संसद के बाहर हुए विपक्षी प्रदर्शन में भी सपा का कोई बड़ा चेहरा नजर नहीं आया। इस अचानक बनी दूरी ने राजनीतिक पंडितों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या गठबंधन के भीतर सीटों के तालमेल या किसी अन्य बात को लेकर कोई नया विवाद खड़ा हो गया है।

घटना के तूल पकड़ने और मीडिया में तरह-तरह की अटकलें लगने के बाद समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ी। अखिलेश यादव ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए साफ किया कि गठबंधन में किसी भी तरह की नाराजगी जैसी कोई बात नहीं है। उन्होंने कहा कि कोई एक कारण या व्यस्तता ऐसी रही होगी जिसके चलते पार्टी का कोई भी सांसद उस समय लंच में नहीं पहुंच पाया। सपा प्रमुख ने यह भी दोहराया कि उनकी पार्टी इंडिया गठबंधन का एक अहम हिस्सा है और आगे की रणनीतियों पर सभी दल मिलकर काम कर रहे हैं। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में अभी भी यह चर्चा आम है कि क्या उत्तर प्रदेश में आगामी राजनीतिक समीकरणों को लेकर सपा अंदरखाने असहज महसूस कर रही है।

खरगे के लंच से गायब रहे सपा सांसद

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर आयोजित इस लंच कार्यक्रम में देश भर के कई बड़े विपक्षी नेता शामिल हुए थे। टीएमसी, द्रमुक, वामदल और अन्य दलों के प्रमुख नेता इस बैठक की शोभा बढ़ाते दिखे। लेकिन उत्तर प्रदेश में मुख्य विपक्षी भूमिका निभाने वाली समाजवादी पार्टी का एक भी सांसद इस लंच का हिस्सा नहीं बना। इसके तुरंत बाद जब संसद परिसर के बाहर विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन किया, तो वहां भी सपा सांसदों की खाली कुर्सियां और उनकी अनुपस्थिति साफ नजर आई। इन दोनों लगातार घटनाओं ने यह संकेत दिया कि विपक्षी खेमे में सब कुछ सामान्य गति से नहीं चल रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स में जब यह सवाल उठाया गया कि क्या समाजवादी पार्टी को इस बैठक का निमंत्रण समय पर नहीं मिला था या वे किसी नीतिगत फैसले से खफा थे, तो विभिन्न नेताओं के अलग-अलग बयान सामने आए। कुछ सूत्रों का कहना था कि क्षेत्रीय दलों के अपने स्थानीय कार्यक्रम और प्राथमिकताएं होती हैं, जिसके कारण वे दिल्ली के इन बैठकों में हर बार शामिल नहीं हो पाते। वहीं दूसरी ओर, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में हालिया राजनीतिक घटनाक्रम और छोटे दलों के साथ तालमेल को लेकर सपा और कांग्रेस के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद उभर सकते हैं।

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अखिलेश यादव की सफाई और गठबंधन की मजबूरी

अखिलेश यादव के इस बयान के बाद कि कोई भी नेता नहीं जा पाया, विपक्षी खेमे के अन्य नेताओं ने भी डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की है। कांग्रेस और सपा दोनों ही दल यह अच्छी तरह जानते हैं कि राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय जनता पार्टी का मुकाबला करने के लिए उनका एक साथ रहना बेहद जरूरी है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में यदि दोनों दल मिलकर चुनाव नहीं लड़ते हैं, तो इसका सीधा फायदा सत्ता पक्ष को मिल सकता है। यही वजह है कि दोनों तरफ से बयानों को बहुत ही नपले-तुले तरीके से रखा जा रहा है ताकि किसी भी तरह की तल्खी को सार्वजनिक मंच पर बढ़ावा न मिले।

जमीनी स्तर पर काम कर रहे हमारे संवाददाताओं ने जब लखनऊ और दिल्ली के पार्टी दफ्तरों का जायजा लिया, तो यह बात सामने आई कि सपा का पूरा ध्यान फिलहाल अपने स्थानीय कार्यकर्ताओं को एकजुट करने और राज्य के मुद्दों पर फोकस करने का है। दिल्ली में होने वाली हर बड़ी बैठक में राज्य स्तर के नेताओं का पहुंचना कई बार प्रशासनिक और सांगठनिक व्यस्तताओं के कारण संभव नहीं हो पाता है। पार्टी के अंदरखाने से जुड़े सूत्रों का यह भी कहना है कि लंच में शामिल न होने को बेवजह तूल दिया जा रहा है और गठबंधन के भीतर कोई बड़ा मतभेद मौजूद नहीं है।

संसद के बाहर प्रदर्शन से दूरी पर उठे सवाल

लंच के ठीक अगले दिन संसद भवन के मकर द्वार के सामने विपक्षी दलों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर एक बड़ा प्रदर्शन आयोजित किया था। इस प्रदर्शन में कांग्रेस समेत कई अन्य दलों के सांसद हाथों में तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते दिखे। लेकिन इस बार भी समाजवादी पार्टी के सांसद इस प्रदर्शन से नदारद रहे। लगातार दो दिन तक महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में सपा की यह गैरमौजूदगी अब एक बड़ा सवाल बन चुकी है। आम जनता और राजनीतिक नजर रखने वाले लोग यह जानना चाहते हैं कि क्या क्षेत्रीय दल अपनी राष्ट्रीय भूमिका को लेकर अब कुछ अलग रणनीति अपना रहे हैं।

द फ्रीलान्स की इस ग्राउंड पड़ताल से यह स्पष्ट होता है कि हालांकि अखिलेश यादव ने किसी भी तरह की नाराजगी से साफ इनकार कर दिया है, लेकिन विपक्षी गठबंधन के भीतर समन्वय की कमी समय-समय पर साफ झलक जाती है। आने वाले दिनों में जब चुनावी सरगर्मी और तेज होगी, तब यह देखना दिलचस्प होगा कि ये दल आपसी तालमेल को किस प्रकार मजबूत बनाए रखते हैं। फिलहाल, सपा का लंच और प्रदर्शन से दूर रहना राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में बना हुआ है और हर कोई इस पर अपनी अलग नजर टिकाए हुए है।

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