कोलकाता/ग्राउंड ब्यूरो — पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा का त्योहार हमेशा से सामाजिक सौहार्द का केंद्र रहा है, लेकिन इस बार इसके संचालन और प्रबंधन को लेकर राजनीति गरमा गई है। राज्य के विभिन्न हिस्सों से टीएमसी और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच झड़प की खबरें सामने आ रही हैं। पूजा समितियों के नियंत्रण और स्थानीय आयोजनों में वर्चस्व को लेकर दोनों दलों के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए हैं। इस हिंसक टकराव में कई लोगों के घायल होने की सूचना है, जिसके बाद प्रशासन ने कानून व्यवस्था संभालने के लिए कड़े कदम उठाए हैं।
तनाव को बढ़ता देख स्थानीय पुलिस के साथ-साथ रैपिड एक्शन फोर्स यानी आरएएफ को भारी संख्या में तैनात कर दिया गया है। संवेदनशील इलाकों में लगातार गश्त की जा रही है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को समय रहते रोका जा सके। प्रशासन दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील कर रहा है, लेकिन राजनीतिक दलों के तेवर तीखे बने हुए हैं। आम लोग इस बात से चिंतित हैं कि उत्सव के माहौल में इस तरह की हिंसा से त्योहार का आनंद फीका पड़ रहा है।
सनातनी परंपराओं और देवी के स्वरूप पर सियासी बयानबाजी
केवल आयोजनों का विवाद ही नहीं, बल्कि देवी दुर्गा के स्वरूप और सनातनी परंपराओं को लेकर भी बयानबाजी तेज हो गई है। हाल ही में देवी दुर्गा के एकादश भुजा स्वरूप को लेकर उठे विवाद पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। नेताओं का कहना है कि धार्मिक परंपराओं के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ या बदलाव उचित नहीं है। इन बयानों ने बंगाल के राजनीतिक गलियारों में बहस को और अधिक हवा दे दी है, जिससे त्योहार के दौरान राजनीतिक पारा चढ़ गया है।
दूसरी तरफ, बंगाल के अलग-अलग कोनों में प्राचीन और अनोखी दुर्गा पूजा परंपराएं भी पूरे उत्साह के साथ मनाई जा रही हैं। कहीं सात सौ साल पुरानी परंपरा के तहत पंद्रह दिन पहले से उत्सव शुरू हो जाता है और हर दिन भात का भोग चढ़ाया जाता है, तो कहीं नरसिंहगढ़ में बासंती दुर्गा पूजा की धूम है। इसके अलावा, नवरात्रि के दौरान घरों और पंडालों में जयंती बोने की परंपरा का भी विशेष महत्व है, जिसके पीछे वैज्ञानिक और धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम और प्रशासन की पैनी नजर
जमीनी हालात को काबू में रखने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। पूजा पंडालों के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं ताकि किसी भी राजनीतिक दल को कानून अपने हाथ में लेने का मौका न मिले। खुफिया एजेंसियों को भी सतर्क कर दिया गया है ताकि असामाजिक तत्वों की हरकतों पर समय रहते लगाम लगाई जा सके। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आम नागरिक बिना किसी डर के शांतिपूर्वक त्योहार मना सकें।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि आम जनता राजनीति से दूर रहकर अपनी आस्था और परंपराओं के साथ जुड़ना चाहती है। लोग चाहते हैं कि त्योहार के दिनों में शांति और भाईचारा बना रहे। राजनीतिक दलों के आपसी टकराव के बीच आम नागरिकों की यह उम्मीद ही बंगाल की असली पहचान है, जो हर साल दुर्गा पूजा के रंग में साफ झलकती है। आने वाले दिनों में प्रशासन की सख्ती और राजनीतिक दलों के रुख पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।







