नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस समय एक बड़े विवाद के केंद्र में आ गए हैं। उर्दू प्रेस की रिपोर्ट्स में उनके इस्तीफे की मांग की गई है और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्षी दलों और मीडिया के एक वर्ग का कहना है कि चुनाव आयोग की साख इस समय खतरे में है। इस बीच, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि उसका हर एक फैसला पूरी तरह से संविधान और चुनावी कानूनों के मुताबिक लिया जा रहा है।
इस पूरे विवाद के बीच प्रशासनिक मोर्चे पर चुनाव आयोग अपनी सक्रियता बनाए हुए है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने हाल ही में इंदौर में बूथ लेवल अधिकारियों के एक बड़े सम्मेलन में हिस्सा लिया। इस सम्मेलन का मुख्य मकसद जमीनी स्तर के अधिकारियों को मजबूत करना और चुनाव से जुड़ी तैयारियों की समीक्षा करना था। आयोग का पूरा जोर इस बात पर है कि जमीनी कार्यकर्ताओं और अधिकारियों के साथ सीधा संवाद स्थापित किया जाए ताकि चुनाव प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा बना रहे।
चुनावी प्रक्रिया में फर्जी खबरों और अफवाहों पर लगाम लगाने की तैयारी
चुनाव आयोग के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती सोशल मीडिया पर फैल रही गलत जानकारी और अफवाहों से निपटना है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने देश भर के चुनाव अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे चुनाव के समय फैलने वाली फर्जी खबरों का तुरंत जवाब दें। आयोग का मानना है कि गलत सूचनाएं मतदाताओं को भ्रमित करती हैं और लोकतांत्रिक व्यवस्था की निष्पक्षता को नुकसान पहुंचाती हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि वे समय पर सही और आधिकारिक आंकड़े जनता के सामने रखें।
देश के अलग-अलग हिस्सों में हाल ही में चुनावी सुधारों और आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर तीखी बहस देखने को मिली है। क्षेत्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में भी इन मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जा रहा है। जानकारों का कहना है कि जब तक चुनाव आयोग पूरी पारदर्शिता के साथ काम नहीं करेगा, तब तक राजनीतिक दलों और जनता के बीच उठ रहे इन सवालों को शांत करना आसान नहीं होगा। आयोग की तरफ से बार-बार यह भरोसा दिलाया जा रहा है कि संस्था पूरी तरह से स्वतंत्र है।
संविधान और कानूनों के दायरे में काम करने का आयोग का दावा
विपक्ष के हमलों का जवाब देते हुए चुनाव आयोग के उच्च पदस्थ सूत्रों ने दोहराया है कि संस्था ने कभी भी अपने संवैधानिक दायरे का उल्लंघन नहीं किया है। हर चुनाव को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराना आयोग की पहली प्राथमिकता रही है। ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में आयोग ने कई ऐसे कदम उठाए हैं जिनका मकसद चुनावी प्रक्रिया को तेज और सुरक्षित बनाना है। हालांकि, आलोचकों का मानना है कि प्रशासनिक दावों से इतर जनता के बीच विश्वास बहाल करने के लिए और अधिक ठोस कदमों की जरूरत है।
आगामी चुनावी गतिविधियों को देखते हुए चुनाव आयोग अपनी तैयारियों को और पुख्ता करने में लगा हुआ है। चाहे वह बूथ लेवल की ट्रेनिंग हो या फिर मीडिया सेल के जरिए फर्जी खबरों की निगरानी करना, हर मोर्चे पर काम तेजी से चल रहा है। 'द फ्रीलान्स' की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि आने वाले दिनों में राजनीतिक दलों और चुनाव आयोग के बीच यह तनातनी और बढ़ सकती है। जनता की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि आयोग इन तमाम विवादों के बीच कैसे स्वतंत्र चुनाव सुनिश्चित करता है।



