नई दिल्ली से ग्राउंड रिपोर्ट — देश की अहम संपत्तियों और संस्थानों की सुरक्षा संभालने वाले केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल यानी सीआईएसएफ के कामकाज में बड़ा बदलाव हुआ है। पिछले कुछ दिनों में बल के भीतर कई बड़े प्रशासनिक और रणनीतिक फैसले लिए गए हैं। औद्योगिक सुरक्षा को और ज्यादा मजबूत करने के लिए एक नया कमांड ढांचा लागू कर दिया गया है। इसके तहत देश के अलग-अलग सेक्टरों को क्षेत्रीय कमांड के अधीन बांट दिया गया है ताकि फैसले जल्दी लिए जा सकें और निगरानी में कोई ढिलाई न बचे।
ताजा बदलाव के तहत देश के कोयला सेक्टर की सुरक्षा अब रांची के डीआईजी के नियंत्रण में होगी। वहीं, भिलाई जैसे बड़े पावर और स्टील यूनिट्स को कोलकाता कमांड के दायरे में लाया गया है। सुरक्षा जानकारों का मानना है कि इस नए ढांचे से देश के इन संवेदनशील औद्योगिक इलाकों में सुरक्षा इंतजाम और ज्यादा पुख्ता होंगे। क्षेत्रीय अधिकारियों को सीधी कमान मिलने से किसी भी आपात स्थिति में तुरंत एक्शन लेना आसान हो जाएगा। बल के उच्च अधिकारियों ने मैराथन बैठकों के बाद इस नए खाके को जमीन पर उतारने का काम शुरू कर दिया है।
एनटीए की सुरक्षा और पेपर लीक के बाद कड़ा पहरा
औद्योगिक इकाइयों के अलावा सीआईएसएफ के कंधों पर अब देश की बड़ी परीक्षा एजेंसी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी आ गई है। बीते दिनों पेपर लीक मामलों के सामने आने के बाद सरकार ने सुरक्षा चक्र को बेहद कड़ा कर दिया है। अब एनटीए के दफ्तर और गोपनीय क्षेत्रों की सुरक्षा सीआईएसएफ के जवानों के हाथ में होगी। कुल 39 प्रशिक्षित जवान इस गोपनीय क्षेत्र की सुरक्षा संभालेंगे ताकि किसी भी तरह की सेंधमारी या गड़बड़ी को पूरी तरह रोका जा सके।
इस नई तैनाती के बाद परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े गोपनीय दस्तावेजों और सर्वर रूम्स की सुरक्षा सीधे केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की निगरानी में आ गई है। शिक्षा संस्थानों और परीक्षा बोर्डों की सुरक्षा में यह अब तक का सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है। सरकार का यह साफ संदेश है कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाली किसी भी चूक के लिए सुरक्षा तंत्र अब कोई गुंजाइश नहीं छोड़ेगा। जवानों को इस संवेदनशील टास्क के लिए खास तौर पर ब्रीफ किया गया है और वे हर आने-जाने वाले पर पैनी नजर रख रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर के कठुआ में बड़ा हादसा और शहादत
एक तरफ जहां सीआईएसएफ को नई और बड़ी जिम्मेदारियां मिल रही हैं, वहीं बल के भीतर हाल ही में एक बेहद दुखद घटना भी घटी है। जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में सीआईएसएफ के एक कैंप के भीतर हुई गोलीबारी ने पूरे बल को झकझोर कर रख दिया है। इस दुखद घटना में कंपनी कमांडर समेत चार जवानों की जान चली गई। आपसी गोलीबारी की इस घटना में असिस्टेंट कमांडेंट अंकित भी शहीद हो गए। इस आकस्मिक और दर्दनाक हादसे के बाद से पूरे महकमे में शोक की लहर दौड़ गई है।
शहीद अधिकारी के परिवार और उनके गृह क्षेत्र में इस मनहूस खबर के बाद मातम पसरा हुआ है। स्थानीय प्रशासन और बल के वरिष्ठ अधिकारी इस पूरे मामले की अंदरूनी जांच में जुटे हैं कि आखिर किन परिस्थितियों में यह खूनी संघर्ष हुआ। जवानों के मानसिक तनाव और कैंपों में आपसी तालमेल को बेहतर बनाने के लिए अब विशेष काउंसलिंग और संवेदनशीलता कार्यक्रमों पर जोर दिया जा रहा है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को टाला जा सके।
एयरपोर्ट सुरक्षा और स्पेशल ट्रेनिंग का नया दौर
इन तमाम बड़े घटनाक्रमों के बीच सीआईएसएफ ने अपने जवानों के लिए विशेष ट्रेनिंग का एक कठिन दौर भी पूरा किया है। हवाई अड्डों पर यात्रियों की बढ़ती संख्या और सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए करीब 40 जवानों को बेहद कठिन 84 दिनों की विशेष ट्रेनिंग दी गई है। इन जवानों को आधुनिक सुरक्षा उपकरणों, खुफिया नजर और त्वरित कार्रवाई की विशेष पावर मिल गई है। अब ये जवान देश के प्रमुख एयरपोर्ट्स पर तैनात होकर अपनी खास ट्रेनिंग का जलवा दिखाएंगे।
यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ एयरपोर्ट पर किसी भी संदिग्ध गतिविधि को तुरंत भांपने के लिए इन जवानों को अत्याधुनिक हथियारों और तकनीकों से लैस किया गया है। सीआईएसएफ के इन तमाम बदलावों और नए मोर्चों पर तैनाती से यह साफ है कि देश का यह सुरक्षा बल अब पूरी तरह नए कलेवर में ढल चुका है। चाहे कोयला खदानें हों, स्टील प्लांट हों, परीक्षा एजेंसियां हों या फिर आसमान छूते विमान, हर जगह सुरक्षा का यह चक्र पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और चुस्त नजर आ रहा है।









