राजधानी दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान सुरक्षाकर्मियों पर हमले की बड़ी घटना
देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर इन दिनों सियासी और सामाजिक संगठनों का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। सोमवार को जब माहौल पहले से ही तनावपूर्ण था, तब एक ऐसी घटना सामने आई जिसने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त और एसआइआर के विरोध में उतरी कांग्रेस के छात्र इकाई एनएसयूआई के प्रदर्शन के दौरान अप्रत्याशित रूप से सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात एक केंद्रीय सुरक्षा बल के जवान को निशाना बनाया गया। भीड़ के बीच से अचानक हुए इस हमले ने वहां मौजूद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के होश उड़ा दिए।
प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, विरोध प्रदर्शन के दौरान हालात को नियंत्रित करने के लिए भारी संख्या में पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स के जवानों को तैनात किया गया था। प्रदर्शनकारी लगातार सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे और सुरक्षा घेरे को तोड़ने का प्रयास कर रहे थे। इसी गहमागहमी के बीच सुरक्षाकर्मियों और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति पैदा हो गई, जिसका फायदा उठाकर एक हमलावर ने सुरक्षा बल के जवान पर धारदार हथियार से वार कर दिया।
इस अचानक हुए हमले से मौके पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि, मुस्तैद सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए स्थिति को संभाला और हमलावर को मौके पर ही दबोच लिया। पुलिस प्रशासन ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए तुरंत एफआईआर दर्ज कर ली है और आगे की कानूनी प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है।
संबंधित खबरें
घायल सीआईएसएफ जवान विक्रम कुमार अस्पताल में भर्ती, मामूली चोट आई
इस हिंसक झड़प के दौरान घायल हुए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के जवान की पहचान विक्रम कुमार के रूप में हुई है। अधिकारियों के मुताबिक, विरोध प्रदर्शन के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी संभाल रहे विक्रम कुमार पर जब धारदार हथियार से हमला किया गया, तो उनकी दाहिनी कोहनी पर गंभीर चोटें आईं। अचानक हुए इस वार से जवान को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
घटना के तुरंत बाद घायल जवान को नजदीकी राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उनका मेडिकल परीक्षण (एमएलसी) किया गया और प्राथमिक उपचार दिया गया। गनीमत यह रही कि चोट बहुत ज्यादा गहरी नहीं थी, जिसके चलते डॉक्टरों ने जरूरी इलाज के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी। इसके बावजूद इस प्रकार की घटनाओं से ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मियों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर बहस छिड़ गई है।
दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने अस्पताल पहुंचकर घायल जवान का हालचाल जाना और पूरी घटना की जानकारी ली। पुलिस का कहना है कि आरोपी प्रदर्शनकारी को हिरासत में ले लिया गया है और उससे पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने अचानक इस तरह का हिंसक कदम क्यों उठाया और क्या इस हमले के पीछे कोई सुनियोजित साजिश थी या फिर यह भीड़ के आवेश में उठाया गया कदम था।
एसआइआर और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ लगातार जारी है विपक्ष का आक्रोश
यह पूरा विवाद अचानक पैदा नहीं हुआ है, बल्कि पिछले कई दिनों से राजधानी दिल्ली से लेकर देश के अन्य हिस्सों तक राजनीतिक उबाल देखने को मिल रहा है। बीते 2 अक्टूबर से ही वामपंथी दलों से लेकर कांग्रेस और अन्य विपक्षी संगठन लगातार सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं। इन प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा देना है। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पक्षपातपूर्ण रही है और एसआइआर के मुद्दों पर लगातार जनता की आवाज को दबाया जा रहा है।
इसी विरोध प्रदर्शन की कड़ी में सोमवार को एनएसयूआई के बैनर तले सैकड़ों छात्र कार्यकर्ता जंतर-मंतर पर एकत्र हुए थे। हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर छात्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे और बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका जा रहा था। लगातार हो रहे इन प्रदर्शनों के कारण राजधानी के कई इलाकों में यातायात भी प्रभावित हुआ है और सुरक्षा एजेंसियों के लिए कानून-व्यवस्था बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
सुरक्षा बलों के अधिकारियों का कहना है कि लोकतांत्रिक देश में हर किसी को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है, लेकिन यदि कोई कानून हाथ में लेगा और पुलिस या सुरक्षा कर्मियों पर हमला करेगा, तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पिछले कुछ दिनों में जंतर-मंतर पर लगातार हिंसक घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे प्रशासन की चिंताएं और अधिक बढ़ गई हैं।
रविवार को भी हुआ था भारी बवाल, दर्जनों पुलिसकर्मी हुए थे घायल
सोमवार को हुई इस चाकूबाजी की घटना से महज एक दिन पहले यानी रविवार को भी जंतर-मंतर पर ऐसा ही भारी हंगामा देखने को मिला था। वामपंथी छात्र संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं ने पुलिस बैरिकेड्स तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की थी, जिसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प हुई थी। उस दौरान स्थिति को नियंत्रित करने में जुटी दिल्ली पुलिस के कम से कम 15 जवान गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जिनमें कई महिला पुलिसकर्मी भी शामिल थीं जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था।
पुलिस ने रविवार के उस भारी बवाल के बाद कार्रवाई करते हुए करीब 110 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था। लगातार दो दिनों तक इस प्रकार की हिंसक घटनाएं सामने आने के बाद दिल्ली पुलिस और खुफिया एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हो गई हैं। जंतर-मंतर और उसके आसपास के इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी गई है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को समय रहते रोका जा सके।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला, चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को नोटिस जारी
एक तरफ जहां सड़कों पर राजनीतिक दल और छात्र संगठन प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ यह पूरा मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और एसआइआर से जुड़े विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई है। देश के सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
इस पूरे मामले की सुनवाई सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाला बागची और जस्टिस वी मोहना की विशेष बेंच द्वारा की जा रही है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि केवल मीडिया रिपोर्टों और बयानों के आधार पर कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया जाएगा, बल्कि सभी पक्षों को सुनने के बाद ही निष्पक्ष निर्णय लिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट में यह मामला पहुंचने के बाद राजनीतिक सरगर्मी और अधिक तेज हो गई है, और विपक्षी दलों के सुर और ज्यादा तीखे होते जा रहे हैं।
विपक्ष के तीखे हमले और नेताओं के बयान
इस पूरे घटनाक्रम के बीच राजनीतिक बयानों का दौर भी चरम पर है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई विपक्षी दिग्गजों ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर तीखे हमले किए हैं। ममता बनर्जी ने एक जनसभा के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त पर सीधा निशाना साधते हुए उन्हें भाजपा का कठपुतली तक करार दे दिया और कहा कि उन्हें अपने पद से हट जाना चाहिए। दूसरी तरफ कांग्रेस नेताओं ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह विवाद और अधिक तूल पकड़ सकता है, क्योंकि चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच की तनातनी कम होने का नाम नहीं ले रही है। जंतर-मंतर पर सुरक्षाबलों पर हुए हमलों ने इस पूरे आंदोलन की दिशा और सुरक्षा प्रबंधों पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज और वीडियो रिकॉर्डिंग के आधार पर अन्य उपद्रवियों की पहचान करने में जुटी है ताकि कानून का उल्लंघन करने वाले हर एक व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।







