बेंगलुरु की सड़कों पर आज राजनीति का एक नया रंग देखने को मिला है। कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दीपके के नेतृत्व में सैकड़ों लोग सड़क पर उतरे। यह पूरा प्रदर्शन केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस बड़े आयोजन ने शहर के कई इलाकों में राजनीतिक सरगर्मी को अचानक बहुत ज्यादा बढ़ा दिया है।
इस विरोध प्रदर्शन की सबसे बड़ी बात यह रही कि इसमें कई जाने-माने चेहरे शामिल हुए। लोकप्रिय यूट्यूबर ध्रुव राठी और प्रसिद्ध अभिनेता प्रकाश राज ने भी इस मंच से अपनी बात रखी। ध्रुव राठी ने भीड़ को संबोधित करते हुए कहा कि वे यहां सिर्फ व्यवस्था में बदलाव लाने के लिए आए हैं। वहीं प्रकाश राज ने भी सरकार की नीतियों पर तीखे सवाल उठाए। नेताओं ने देश के चुनावी सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े किए।
लोकतंत्र की हत्या और वोट चोर के नारे
प्रदर्शन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी के अभिजीत दीपके ने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने देश में लोकतंत्र की हत्या किए जाने का गंभीर आरोप लगाया। भीड़ के बीच से वोट चोर के नारे भी लगातार गूंजते रहे। आयोजकों ने एक देश एक चुनाव जैसी नीतियों का भी कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि आम जनता के अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
प्रदर्शनकारियों का मुख्य गुस्सा चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर था। मंच से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की जोरदार मांग उठाई गई। वक्ताओं ने कहा कि निष्पक्ष चुनाव कराना आयोग की जिम्मेदारी है जो पूरी नहीं हो रही है। एसआईआर और अन्य चुनावी मुद्दों को लेकर भी सरकार को घेरा गया। इस दौरान पुलिस ने सुरक्षा के बहुत कड़े इंतजाम किए थे ताकि किसी तरह की अप्रिय घटना न घटे।
सोशल मीडिया पर ट्रेंड और जनता की प्रतिक्रिया
बेंगलुरु का यह प्रोटेस्ट सोशल मीडिया पर भी नंबर एक पर ट्रेंड करने लगा है। इंटरनेट पर इस आंदोलन के समर्थन और विरोध में कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। ध्रुव राठी के इस प्रदर्शन में शामिल होने के बाद से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बहस और तेज हो गई है। लोग लगातार इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि आने वाले दिनों में इसका राजनीतिक असर क्या होगा।
द फ्रीलान्स की टीम ने जब ग्राउंड जीरो पर जाकर हालात का जायजा लिया तो लोगों की मिलीजुली राय सामने आई। कुछ लोग इस आवाज उठाने के तरीके को सही मान रहे हैं तो कुछ इसे राजनीतिक स्टंट बता रहे हैं। पुलिस प्रशासन ने स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में रखा हुआ है। आयोजकों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगे नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और बड़े स्तर पर ले जाया जाएगा।
विपक्ष की बढ़ती सक्रियता और आगे की राह
इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि कर्नाटक की राजनीति में नए मोर्चे और दल अपनी जमीन तलाश रहे हैं। गैर-पारंपरिक राजनीतिक दलों और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स का एक साथ आना एक नया ट्रेंड बन रहा है। आने वाले हफ्तों में इस तरह के प्रदर्शन देश के दूसरे हिस्सों में भी देखने को मिल सकते हैं। द फ्रीलान्स इस पूरे मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा और हर अपडेट आप तक सबसे पहले पहुंचाएगा।









