भारतीय राजनीतिक गलियारों और चुनावी व्यवस्था को लेकर इन दिनों माहौल बेहद गर्म नजर आ रहा है। देश के विभिन्न हिस्सों में चुनाव आयोग और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मुखर विरोध प्रदर्शनों का दौर शुरू हो चुका है। विपक्षी दलों और विभिन्न सामाजिक संगठनों का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, जिसके चलते जनता का एक बड़ा वर्ग सड़कों पर उतरने को मजबूर हुआ है। इस बीच, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी राजनीतिक गतिविधियों ने अचानक तेजी पकड़ ली है, जहां विपक्षी खेमा सरकार को घेरने की नई योजनाएं बना रहा है।
विपक्षी खेमे में बड़ी बैठक: खड़गे के आवास पर मंथन
देशभर में सुलगते सियासी मुद्दों और चुनाव आयोग के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों के साए में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने विपक्षी दलों के प्रमुख नेताओं और सांसदों को दोपहर के भोजन पर आमंत्रित किया है। इस अनौपचारिक लेकिन बेहद रणनीतिक बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी संसद सत्र और देश के मौजूदा राजनीतिक हालात पर सामूहिक रणनीति बनाना है। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में इस बात पर गंभीर मंथन किया जा रहा है कि कैसे चुनाव आयोग की कार्यशैली और अन्य ज्वलंत विषयों को संसद के पटल पर पुरजोर तरीके से उठाया जाए।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विपक्ष अब सरकार के खिलाफ अपनी आक्रामक तेवर को और धार देने की तैयारी में है। मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर होने वाली इस बैठक में कई वरिष्ठ विपक्षी नेता शिरकत कर रहे हैं। बैठक का एजेंडा साफ है—सरकार की नीतियों के खिलाफ विपक्ष को एकजुट करना और जनता के बीच उठ रहे सवालों को संसद से लेकर सड़क तक गूंजने देना।
चुनावी निष्पक्षता पर बढ़ते सवाल और देशव्यापी रोष
देश के कई राज्यों से लगातार मिल रही खबरों के अनुसार, विभिन्न राजनीतिक दलों और नागरिक समूहों ने चुनाव आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा और उनकी स्वायत्तता बनाए रखना बेहद जरूरी है, जिसमें किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व वाले चुनाव आयोग के खिलाफ हो रहे इन प्रदर्शनों ने प्रशासन की भी चिंता बढ़ा दी है।
विपक्षी दलों का यह भी आरोप है कि चुनावी मशीनरी का उपयोग सत्ता पक्ष के पक्ष में माहौल बनाने के लिए किया जा रहा है, जिसे लेकर जनता के बीच गहरा असंतोष है। हालांकि, चुनाव आयोग और सरकार की ओर से समय-समय पर इन सभी आरोपों को निराधार बताया गया है, लेकिन इसके बावजूद ज़मीनी स्तर पर विरोध प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।
"लोकतंत्र की रक्षा के लिए हमारी लड़ाई हर स्तर पर जारी रहेगी। जनता के अधिकारों पर किसी भी प्रकार का डाका डालने नहीं दिया जाएगा। चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होना चाहिए।" — मल्लिकार्जुन खड़गे, कांग्रेस अध्यक्ष
संसदीय रणनीति और आगामी राजनीतिक उठापटक
दिल्ली में चल रही इन बैठकों और देश भर के विरोध प्रदर्शनों का सीधा असर आने वाले संसद सत्र पर पड़ना तय माना जा रहा है। विपक्ष के तमाम दल इस बात पर एकजुट होते दिख रहे हैं कि सरकार को इन मुद्दों पर सदन के भीतर घेरा जाए। महंगाई, बेरोजगारी और संवैधानिक संस्थाओं के कथित दुरुपयोग जैसे मुद्दों के साथ-साथ अब चुनाव आयोग की भूमिका भी मुख्य विपक्षी एजेंडे में सबसे ऊपर आ गई है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सरकार विपक्ष के इन तीखे तेवरों का सामना किस प्रकार करती है और क्या चुनाव आयोग इन तमाम विवादों के बीच अपनी कार्यशैली को लेकर कोई स्पष्टीकरण जारी करता है। फिलहाल, देश की राजधानी से लेकर दूर-दराज के राज्यों तक राजनीतिक तापमान लगातार उफान पर बना हुआ है।






