नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की राजधानी में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और अदालती कार्यवाही को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन यानी DMRC ने सुप्रीम कोर्ट में अपना आधिकारिक हलफनामा दाखिल किया है। इस हलफनामे में साफ किया गया है कि बीते 10 अक्टूबर को दिल्ली मेट्रो की कोई भी ट्रेन रद्द नहीं की गई थी। मेट्रो प्रशासन ने अदालत को बताया कि उस दिन उनका पूरा नेटवर्क सामान्य रूप से चालू था और किसी भी रूट पर सेवाएं पूरी तरह बंद नहीं की गई थीं।
इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई जब मेट्रो सेवाओं के संचालन और कुछ कथित रुकावटों को लेकर अदालत में सवाल उठाए गए थे। इसके बाद DMRC के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले में DMRC ने अदालत के सामने अपनी बात रखते हुए बिना शर्त माफी भी मांग ली है। मेट्रो अधिकारियों का कहना है कि उनका मकसद कभी भी अदालत के आदेशों की अवहेलना करना नहीं था और यात्रियों की सुविधा का पूरा ध्यान रखा गया था।
सुप्रीम कोर्ट में DMRC का बड़ा हलफनामा
दैनिक भास्कर और अन्य मीडिया स्रोतों से मिली जानकारी के अनुसार, DMRC ने अपने जवाब में बताया है कि उनके पास कुल 303 ट्रेनें हैं और उस खास दिन पर पूरा नेटवर्क तय योजना के मुताबिक चल रहा था। मेट्रो नेटवर्क के किसी भी हिस्से में अचानक या पूरी तरह से पहिए नहीं थमे थे। द फ्रीलान्स की ग्राउंड टीम ने जब इस बारे में पड़ताल की, तो पता चला कि यात्रियों की आवाजाही पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा था और सेवाएं तय टाइम टेबल के हिसाब से ही बहाल थीं।
याचिकाकर्ताओं और अदालत के सवालों के जवाब में मेट्रो कॉर्पोरेशन ने यह स्पष्ट करने की कोशिश की है कि मीडिया या अन्य माध्यमों में जो खबरें चली थीं, वे पूरी तरह से सही नहीं थीं। DMRC के वकीलों ने अदालत को आश्वस्त किया कि भविष्य में ऐसी किसी भी स्थिति से बचने के लिए वे पूरी तरह सतर्क रहेंगे। अदालत में पेश किए गए दस्तावेजों में नेटवर्क के सुचारू संचालन के आंकड़े भी साझा किए गए हैं, ताकि यह साबित किया जा सके कि सेवाएं बंद नहीं हुई थीं।
बिना शर्त माफी और अवमानना नोटिस पर सुनवाई
नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, DMRC ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि उनके खिलाफ जारी किया गया अवमानना नोटिस अब वापस ले लिया जाए। कॉर्पोरेशन ने बिना शर्त माफी मांगते हुए कहा है कि यदि अनजाने में कोई भ्रम की स्थिति पैदा हुई है, तो उसके लिए वे खेद प्रकट करते हैं। अदालत अब इस मामले में दोनों पक्षों के दस्तावेजों की जांच कर रही है और आगे की कानूनी प्रक्रिया तय की जा रही है।
आम जनता और रोजाना सफर करने वाले यात्रियों के लिए यह राहत की खबर है कि उस दिन मेट्रो सेवा में कोई बड़ा व्यवधान नहीं आया था। द फ्रीलान्स की इस रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली मेट्रो प्रशासन और अदालत के बीच चल रहे इस संवाद से अब स्थिति काफी हद तक साफ हो गई है। आगे देखना यह होगा कि सुप्रीम कोर्ट DMRC के इस स्पष्टीकरण और माफीनामा के बाद क्या अंतिम आदेश जारी करता है।
यात्रियों और नेटवर्क संचालन पर क्या पड़ा असर
द प्रिंट हिंदी की रिपोर्ट के अनुसार, DMRC ने जोर देकर कहा है कि सभी ट्रेनें अपने तय समय पर पटरियों पर दौड़ी थीं। आम आदमी को ऑफिस या अपने काम पर जाने के लिए किसी बड़ी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा था। मेट्रो अधिकारियों का यह भी कहना है कि वे शहर की लाइफलाइन कहे जाने वाले इस परिवहन तंत्र को और अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
हमारी ग्राउंड पड़ताल यह भी दिखाती है कि रोजाना लाखों लोगों की यात्रा कराने वाली दिल्ली मेट्रो के लिए समय की पाबंदी बहुत जरूरी है। इस कानूनी मामले के बाद प्रशासन अब भविष्य में किसी भी तरह की गलतफहमी को दूर रखने के लिए और अधिक चौकस हो गया है। द फ्रीलान्स इस मामले की हर नई कानूनी और प्रशासनिक अपडेट पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा।






