नई दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में उस वक्त हलचल तेज हो गई जब एनएसयूआई का विरोध प्रदर्शन अचानक हिंसक झड़प में बदल गया। राजस्थान से ताल्लुक रखने वाली एनएसयूआई की राष्ट्रीय सचिव रितु बराला इस प्रदर्शन के दौरान पुलिस के साथ हुई तीखी नोंकझोंक और हाथापाई के कारण चर्चा के केंद्र में आ गई हैं। प्रदर्शनकारियों का साफ आरोप है कि दिल्ली पुलिस ने शांतिपूर्ण मार्च निकाल रहे छात्रों पर अत्यधिक बल प्रयोग किया और उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर राजधानी में छात्र राजनीति और कानून-व्यवस्था के बीच के टकराव को सतह पर ला दिया है।
घटना के तुरंत बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने आगे आकर घायल रितु बराला से मुलाकात की और उनका ढांढस बंधाया। राहुल गांधी ने रितु के कंधे पर हाथ रखकर उनका हौसला बढ़ाया और मीडिया के सामने उन्हें 'शेरनी' की संज्ञा दी। कांग्रेस पार्टी का दावा है कि इस पुलिस कार्रवाई में रितु बराला के सिर पर गंभीर चोटें आई हैं और उनके कान पर डंडा लगने से सुनने की क्षमता तक प्रभावित हुई है। इस मुलाकात के बाद से ही सोशल मीडिया पर रितु बराला और राहुल गांधी की तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं, जिससे राजनीतिक पारा काफी हाई हो गया है।
प्रदर्शन के दौरान क्या हुआ था महिला पुलिसकर्मियों और रितु बराला के बीच?
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान जब छात्र नेताओं ने बैरिकेड्स पार करने की कोशिश की तो माहौल तनावपूर्ण हो गया। मौके पर मौजूद महिला पुलिसकर्मियों और रितु बराला के बीच जमकर धक्का-मुक्की और हाथापाई हुई, जिसकी तस्वीरें और वीडियो अब सामने आ रहे हैं। रितु का आरोप है कि उन्हें और अन्य महिला कार्यकर्ताओं को पुलिस ने निशाना बनाया और उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। दूसरी तरफ, पुलिस प्रशासन का अपना पक्ष है कि प्रदर्शनकारी लगातार निषेधाज्ञा का उल्लंघन कर रहे थे और सुरक्षा घेरा तोड़ने का प्रयास कर रहे थे, जिसके कारण बल प्रयोग करना पड़ा।
इस पूरे मामले ने अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है जहां विपक्ष सरकार और पुलिस तंत्र पर दमनकारी नीतियां अपनाने का आरोप लगा रहा है। राजस्थान की राजनीति से लेकर दिल्ली के यूनिवर्सिटी कैंपस तक इस घटना की गूंज सुनाई दे रही है और छात्र संगठन सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। रितु बराला के समर्थकों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि एक महिला नेत्री के साथ पुलिस ने इस तरह का शारीरिक उत्पीड़न किया। कांग्रेस पार्टी अब इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाकर युवाओं और छात्रों के अधिकारों की लड़ाई का मुख्य एजेंडा बनाने की तैयारी में है।
घायल नेत्री के स्वास्थ्य को लेकर कांग्रेस नेताओं के तीखे आरोप
अस्पताल में भर्ती रितु बराला से मिलने के लिए कांग्रेस के कई अन्य बड़े नेता भी पहुंचे और उनकी मेडिकल रिपोर्ट की मांग की है। पार्टी का कहना है कि पुलिस ने लाठीचार्ज के दौरान नियमों की अनदेखी की और सीधे तौर पर छात्रों के शरीर के ऊपरी हिस्सों को निशाना बनाया। रितु के चेहरे पर खरोंच और शरीर पर पड़े डंडों के निशान इस बात की गवाही दे रहे हैं कि झड़प कितनी भयानक थी। डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज जारी है, लेकिन राजनीतिक दलों का आना-जाना लगातार बना हुआ है जिससे अस्पताल परिसर छावनी में तब्दील हो गया है।
आम जनता और छात्र समुदाय के बीच भी इस बात पर बहस छिड़ गई है कि क्या लोकतांत्रिक देश में अपनी बात रखने के लिए छात्रों को इस तरह के टॉर्चर से गुजरना पड़ेगा। प्रशासन इस बात से इनकार कर रहा है कि पुलिस ने कोई अतिरिक्त बल प्रयोग किया, उनका तर्क है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना उनकी पहली प्राथमिकता थी। लेकिन राहुल गांधी के सीधे इस मामले में कूद पड़ने और रितु बराला को समर्थन देने के बाद यह लड़ाई सिर्फ एक थाने या यूनिवर्सिटी की नहीं रह गई है, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुकी है।
छात्र राजनीति पर इस घटना का दूरगामी असर
द फ्रीलान्स की जमीनी पड़ताल बताती है कि आने वाले दिनों में राजस्थान और दिल्ली में छात्र संगठनों के बीच तनाव और बढ़ सकता है। एनएसयूआई इस मुद्दे को लेकर बड़े पैमाने पर युवाओं को गोलबंद करने की रणनीति बना रही है ताकि सरकार पर दबाव बनाया जा सके। रितु बराला का यह संघर्ष अब छात्र संघ चुनाव और युवा राजनीति के गलियारों में एक नया प्रतीक बनता जा रहा है। पुलिस प्रशासन और सरकार के लिए भी यह एक संवेदनशील मामला बन गया है, जिसकी हर गतिविधि पर वरिष्ठ अधिकारियों की पैनी नजर बनी हुई है।








