नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की राजनीति में इन दिनों मतदाता सूचियों और विशेष सूचना संशोधन यानी एसआईआर को लेकर भारी गरमागरम बहस छिड़ी हुई है। इसी बीच देश के मुख्य चुनाव आयोग ने एक बहुत बड़ा और अहम फैसला ले लिया है। आयोग ने उत्तर प्रदेश और मणिपुर समेत कुल 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण यानी एसएसआर की प्रक्रिया शुरू करने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। इस बड़े कदम से साफ हो गया है कि चुनाव आयोग चुनावी डेटा को पूरी तरह साफ-सुथरा और पारदर्शी बनाने के लिए मैदान में उतर चुका है।
पिछले कुछ हफ्तों से विपक्षी दलों और अलग-अलग मंचों पर एसआईआर प्रक्रिया को लेकर कई तरह के गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे थे। राजनीतिक दलों का आरोप था कि मतदाता सूचियों से मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए जा रहे हैं या फिर सूची में हेरफेर हो रही है। इन तमाम विवादों और सियासी हंगामे के बीच चुनाव आयोग ने अब एसएसआर यानी विशेष पुनरीक्षण का रास्ता चुनकर स्थिति को संभालने की कोशिश की है। आयोग का यह नया निर्देश देश के उन 17 राज्यों में लागू होगा जहां मतदाता सूचियों में सुधार की सख्त जरूरत महसूस की जा रही थी।
उत्तर प्रदेश और मणिपुर समेत 17 राज्यों में चलेगा अभियान
चुनाव आयोग के इस ताजा निर्देश के दायरे में देश के कुल 17 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश आ रहे हैं। इसमें सबसे बड़ा नाम उत्तर प्रदेश का है, जहां राजनीतिक सरगर्मी हमेशा ही अपने चरम पर रहती है। इसके अलावा पूर्वोत्तर के राज्य मणिपुर समेत अन्य कई महत्वपूर्ण राज्यों में भी यह विशेष अभियान चलाया जाएगा। जिला स्तर के प्रशासनिक अधिकारियों और बूथ लेवल अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे घर-घर जाकर इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी करें। अधिकारियों का कहना है कि इस पुनरीक्षण का मुख्य उद्देश्य हर एक योग्य नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल करना है।
इस पूरी प्रक्रिया के तहत नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, मृत या पक्का पता बदलकर जा चुके लोगों के नाम हटाने और गलतियों को ठीक करने का काम किया जाएगा। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि पूरी पारदर्शिता के साथ यह काम पूरा किया जाएगा ताकि किसी भी नागरिक को परेशानी का सामना न करना पड़े। राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को भी इस पूरी प्रक्रिया में शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की गुंजाइश पूरी तरह से खत्म की जा सके।
सियासी घमासान के बीच आयोग की दो टूक
विपक्ष लगातार यह आरोप लगा रहा था कि एसआईआर से जुड़ी नीतियां आम जनता के मताधिकार पर असर डाल रही हैं। विपक्षी नेताओं का कहना था कि इस तरह की प्रक्रिया से चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवालिया निशान लगते हैं। इन तमाम तीखे बयानों और राजनीतिक दबाव के बीच चुनाव आयोग का यह कदम काफी अहम माना जा रहा है। आयोग ने यह साफ कर दिया है कि उसका एकमात्र उद्देश्य मतदाता सूची को त्रुटिहीन बनाना है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जमीनी स्तर पर हमारे संवाददाताओं ने पाया कि कई जिलों में जिला निर्वाचन अधिकारियों ने राजनीतिक दलों के जिला अध्यक्षों के साथ बैठकें भी शुरू कर दी हैं। इन बैठकों में एसएसआर प्रक्रिया की पूरी रूपरेखा समझाई जा रही है और लोगों से अपील की जा रही है कि वे अपनी जानकारी की जांच खुद कर लें। आम जनता के लिए भी यह जरूरी हो गया है कि वे अपने नजदीकी मतदान केंद्र या ऑनलाइन पोर्टल के जरिए अपनी वोटर आईडी की स्थिति की जांच अवश्य कर लें।
फ्रीलान्स की नजर में मतदाता सूची का यह संशोधन क्यों है जरूरी
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि देश के कई हिस्सों में वोटर लिस्ट में पुरानी और गलत प्रविष्टियां होने की शिकायतें लंबे समय से आ रही थीं। लोग एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट हो जाते हैं लेकिन उनका नाम पुरानी सूची में ही बना रहता है। ऐसे में फर्जी मतदान या आंकड़ों की गड़बड़ी की आशंका हमेशा बनी रहती है। चुनाव आयोग द्वारा उठाया गया यह कदम इसी पुरानी बीमारी का स्थायी इलाज साबित हो सकता है, बशर्ते इसे पूरी ईमानदारी और बिना किसी राजनीतिक पक्षपात के लागू किया जाए।
आगामी चुनावी सरगर्मी को देखते हुए यह संशोधन प्रक्रिया देश के राजनीतिक भविष्य के लिए बहुत मायने रखती है। अब देखना यह होगा कि राज्य स्तर के प्रशासनिक अधिकारी इस बड़े अभियान को कितनी पारदर्शिता और मुस्तैदी के साथ जमीन पर उतार पाते हैं। आम जनता को भी चाहिए कि वे इस प्रक्रिया में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और लोकतंत्र के इस महापर्व में अपनी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा के साथ निभाएं।








