नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — तकनीक की दुनिया में इस वक्त गूगल का नया एआई मॉडल जेमिनी 4 आर्गन चर्चा का बड़ा केंद्र बन चुका है। गूगल ने इस मॉडल को अपना सबसे ताकतवर सिस्टम बताया है जो कोडिंग और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकता है। डीडी न्यूज और प्रभात खबर की रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मॉडल तकनीकी रूप से बेहद उन्नत है। हालांकि, लॉन्च के साथ ही यह मॉडल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा जांच के दायरे में भी आ गया है।
शुरुआती खबरों में यह बात सामने आई थी कि जेमिनी 4 को आर्गन अल्ट्रा संस्करण के लिए तैयार किया गया है। लोगन नाम के एक शख्स के ट्वीट के बाद इस पर बहस तेज हुई, हालांकि गूगल ने अभी तक इसकी पूरी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, यह सुपर-पावरफुल एआई सिस्टम कंप्यूटर कोडिंग और डेटा सुरक्षा के मामलों में इंसानी काम को बेहद आसान बना देगा, लेकिन इसके व्यापक प्रभाव को लेकर कई तरह की चिंताएं भी जताई जा रही हैं.
ब्रिटेन सरकार की सख्त चेतावनी और सुरक्षा जांच
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटेन के एक जिम्मेदार मंत्री ने गूगल के इस नए मॉडल को लेकर कड़ी चेतावनी दी है। ब्रिटेन की सरकार साफ कह चुकी है कि यदि इस तकनीक से जुड़े जोखिमों को पूरी तरह काबू में नहीं किया गया, तो इसे बाजार में पूरी तरह लॉन्च नहीं किया जाना चाहिए। ब्रिटेन इस समय गूगल के इस नए एआई मॉडल की गहराई से जांच कर रहा है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह तकनीक आम जनता और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए कोई बड़ा खतरा तो नहीं पैदा करेगी।
एआई तकनीक के जानकारों का मानना है कि जैसे-जैसे मॉडल अधिक शक्तिशाली होते जाते हैं, वैसे-वैसे उनका गलत इस्तेमाल होने का खतरा भी बढ़ जाता है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि जेमिनी 4 आर्गन जैसे मॉडल जितने अच्छे साइबर सुरक्षा के लिए हैं, उतने ही खतरनाक गलत हाथों में पड़ने पर साबित हो सकते हैं। यही वजह है कि यूरोपीय देश और ब्रिटेन एआई कंपनियों पर नकेल कसने के मूड में दिखाई दे रहे हैं।
आम यूजर्स को अभी क्यों करना होगा इंतजार?
प्रभात खबर की रिपोर्ट के मुताबिक, भले ही गूगल ने जेमिनी 4 आर्गन को पेश कर दिया है, लेकिन आम यूजर्स इसे अभी तुरंत इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। कंपनी ने इसे बड़े स्तर पर जारी करने से पहले इसके सभी पहलुओं की जांच करने का फैसला किया है। तकनीकी सुरक्षा मानकों को पूरा करने के बाद ही इसे आम लोगों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। कीमत और खासियतों को लेकर भी गूगल की तरफ से आने वाले दिनों में और अधिक खुलासे किए जाने की उम्मीद है।
फिलहाल तकनीक बाजार में इस बात को लेकर सुगबुगाहट तेज है कि क्या गूगल बिना पूरी पुष्टि के अपने उत्पादों को आगे बढ़ा रहा है। लोगन के ट्वीट और मीडिया रिपोर्ट्स के बीच गूगल का आधिकारिक पक्ष आना अभी बाकी है। 'द फ्रीलान्स' की इस जमीनी पड़ताल से साफ है कि एआई की दौड़ अब सिर्फ रफ्तार की नहीं, बल्कि सुरक्षा और सरकारी नियमों के दायरे की भी बन चुकी है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि गूगल ब्रिटेन की चिंताओं का क्या जवाब देता है।








