नई दिल्ली से ग्राउंड रिपोर्ट — देश के मुख्य चुनाव आयुक्त यानी सीईसी ज्ञानेश कुमार इन दिनों सोशल मीडिया और सर्च इंजन पर सबसे ज्यादा खोजे जा रहे शख्सियतों में शामिल हैं। आम नागरिकों से लेकर राजनीति में रुचि रखने वाले हर शख्स के मन में यही सवाल है कि उनका कार्यकाल आखिर कब तक है। क्या वह साल 2029 में होने वाले अगले लोकसभा चुनाव तक अपने पद पर बने रहेंगे या फिर उससे पहले ही रिटायर हो जाएंगे। हमारी टीम ने इस पूरे मामले की गहराई से पड़ताल की है ताकि आपको इसके सभी कानूनी और प्रशासनिक पहलू बिल्कुल साफ शब्दों में समझ आ सकें।
नियमों के मुताबिक, देश के मुख्य चुनाव आयुक्त का कार्यकाल छह साल या पैंसठ साल की उम्र तक होता है, जो भी पहले पूरा हो जाए। ज्ञानेश कुमार के प्रशासनिक करियर की बात करें तो उन्होंने एक उप-जिलाधिकारी से लेकर देश के सबसे बड़े चुनावी पद तक का लंबा सफर तय किया है। उनकी नियुक्ति और काम करने के तरीके को लेकर देश भर में चर्चा होती रहती है। लोग यह भी जानना चाहते हैं कि उनके बाद देश के चुनाव आयोग की कमान किसके हाथ में जाएगी और साल 2029 के आम चुनाव किसके नेतृत्व में संपन्न कराए जाएंगे।
ज्ञानेश कुमार का अब तक का प्रशासनिक सफर
ज्ञानेश कुमार केरल कैडर के एक बेहद अनुभवी और तेज-तर्रार पूर्व आईएएस अधिकारी रहे हैं। उन्होंने अपने लंबे प्रशासनिक करियर में केंद्र सरकार और राज्य में कई अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं। जब अनुच्छेद 370 हटाया गया था, तब गृह मंत्रालय में उनकी भूमिका बेहद अहम मानी जाती थी। इसके बाद उन्हें देश का मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया। ज़मीनी स्तर पर काम करने का उनका लंबा अनुभव चुनाव आयोग के फैसलों में साफ झलकता है। उन्होंने अपने अब तक के कार्यकाल में कई कड़े प्रशासनिक और चुनाव सुधार से जुड़े फैसले लिए हैं।
आम जनता के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि ऐसे अनुभवी अधिकारी का कार्यकाल कब पूरा होगा। चुनाव आयोग के शीर्ष पदों पर बैठे अधिकारियों की उम्र और कार्यकाल की सीमा संविधान के नियमों के अनुसार तय होती है। मुख्य चुनाव आयुक्त का पद देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को चलाने में सबसे रीढ़ की हड्डी माना जाता है। यही वजह है कि उनके हर फैसले और उनकी नियुक्ति की तारीख पर पूरे देश की निगाहें टिकी रहती हैं।
साल 2029 के आम चुनाव किसके जिम्मे होंगे
सबसे बड़ा सवाल जो इस समय राजनीतिक गलियारों में तैर रहा है, वह यह है कि क्या साल 2029 के लोकसभा चुनाव ज्ञानेश कुमार की देखरेख में ही होंगे। मीडिया रिपोर्ट्स और चुनावी आंकड़ों के विश्लेषण से यह साफ होता है कि उनके रिटायरमेंट की तारीख और कार्यकाल के नियम क्या कहते हैं। चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त बनने के बाद अधिकारी को छह साल का कार्यकाल मिलता है बशर्ते वह पैंसठ वर्ष की आयु पूरी न कर ले। यदि वह इस उम्र सीमा से पहले अपना कार्यकाल पूरा कर लेते हैं, तो वह पद से सेवानिवृत्त हो जाते हैं।
आने वाले समय में जब भी उनका कार्यकाल पूरा होगा, देश में नए मुख्य चुनाव आयुक्त के चयन की प्रक्रिया शुरू होगी। इस प्रक्रिया में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और एक कैबिनेट मंत्री की कमेटी मिलकर नए नाम पर मुहर लगाती है। यह पूरी प्रक्रिया देश के नए कानून के तहत पारदर्शी तरीके से पूरी की जाती है। द फ्रीलान्स की इस ग्राउंड पड़ताल में हमने पाया कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर आम लोगों में जागरूकता तेजी से बढ़ रही है और लोग यह जानना चाहते हैं कि देश की सबसे बड़ी चुनावी संस्था कैसे काम करती है।
भविष्य की चुनाव प्रक्रिया और प्रशासनिक तैयारियां
देश में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराना चुनाव आयोग की सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है। ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में आयोग लगातार तकनीक के इस्तेमाल और चुनावी सुधारों पर जोर दे रहा है। डिजिटल वोटर लिस्ट से लेकर मतदान केंद्रों पर मिलने वाली सुविधाओं तक, हर मोर्चे पर सुधार किए जा रहे हैं। जब तक उनका कार्यकाल रहेगा, देश के कई राज्यों में विधानसभा चुनाव भी होने हैं। इन सभी चुनावों की जिम्मेदारी मौजूदा चुनाव आयुक्तों के कंधों पर ही रहने वाली है।
हमारी टीम ने अपनी पड़ताल के अंत में यह पाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यकाल को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की अधूरी जानकारियां भी फैलाई जाती हैं। इसलिए जरूरी है कि आप केवल आधिकारिक और पुष्ट खबरों पर ही भरोसा करें। जैसे-जैसे साल आगे बढ़ेंगे, चुनाव आयोग के अगले कदमों और फैसलों पर हमारी पैनी नजर बनी रहेगी। द फ्रीलान्स निष्पक्ष और सच के साथ आपके सामने ऐसे सभी मुद्दों की जमीनी हकीकत लाता रहेगा।



