नई दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों हलचल बहुत तेज हो गई है। देश का विपक्षी गठबंधन यानी इंडिया ब्लॉक अब सीधे तौर पर चुनाव आयोग के कामकाज के खिलाफ सड़क से लेकर अदालत तक उतर आया है। विपक्षी दलों का यह पूरा विरोध मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ है। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग निष्पक्ष रूप से काम नहीं कर रहा है और सरकार के इशारों पर फैसले ले रहा है। इसी नाराजगी को जताने के लिए विपक्षी नेता लगातार बैठकें कर रहे हैं और रणनीति बना रहे हैं।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने इस पूरे घटनाक्रम पर मीडिया के सामने अपनी बात रखी है। उन्होंने बहुत साफ शब्दों में कहा है कि देश में विपक्ष की तरफ से कोई अलग-अलग या बंटे हुए विरोध प्रदर्शन नहीं हो रहे हैं। राहुल गांधी के अनुसार पूरे गठबंधन का केवल एक ही साझा और मजबूत विरोध प्रदर्शन चल रहा है। राहुल गांधी ने भाजपा और आरएसएस पर भी तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया है कि सत्ताधारी दल के लोग प्रदर्शनकारियों पर हमले करवा रहे हैं और वे प्रधानमंत्री की तरह ही धौंस जमाने की राजनीति कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में याचिका में मिली कमियां
एक तरफ विपक्ष सड़क पर उतरने की तैयारी कर रहा है, तो दूसरी तरफ कानूनी मोर्चे पर भी उसे कुछ शुरुआती अड़चनों का सामना करना पड़ रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर की गई इस याचिका में चौदह कमियां निकाली हैं। कोर्ट के नियमों के मुताबिक इन तकनीकी कमियों को दूर करना जरूरी होता है। इसके बाद ही याचिका पर सुनवाई के लिए आगे की तारीख तय हो पाएगी। हालांकि विपक्षी वकीलों और नेताओं का कहना है कि इन तकनीकी खामियों को जल्द ही ठीक कर लिया जाएगा और लड़ाई मजबूती से लड़ी जाएगी।
विपक्षी नेताओं ने साफ कर दिया है कि वे कानूनी लड़ाई के साथ-साथ जनता के बीच जाकर भी अपनी बात रखेंगे। उनका मानना है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता होना लोकतंत्र के लिए बहुत जरूरी है। जब तक उनकी आपत्तियों पर गौर नहीं किया जाता, तब तक वे चुप बैठने वाले नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट में याचिका जाने के बाद से राजनीतिक तापमान और ज्यादा बढ़ गया है। दोनों तरफ से बयानबाजी का दौर तेज हो गया है, जिससे आने वाले दिनों में टकराव और गहरा होने की पूरी संभावना नजर आ रही है।
12 अक्टूबर को दिल्ली में बड़े प्रदर्शन की तैयारी
इस पूरे विवाद के बीच विपक्ष ने अपनी ताकत दिखाने का बड़ा प्लान तैयार कर लिया है। विपक्षी दलों ने घोषणा की है कि आगामी 12 अक्टूबर को दिल्ली में एक बहुत बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा। नेताओं का कहना है कि ज्ञानेश कुमार को अपनी जिम्मेदारी छोड़नी ही होगी और वे इस मांग से पीछे बिल्कुल नहीं हटेंगे। इस प्रदर्शन में देश भर के कई बड़े विपक्षी नेता और कार्यकर्ता शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंचेंगे। सुरक्षा एजेंसियों ने भी इस संभावित बड़े प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने शुरू कर दिए हैं।
जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं में भी इस प्रदर्शन को लेकर काफी जोश देखा जा रहा है। विपक्षी दलों के दफ्तरों में बैठकों का दौर लगातार जारी है, जिसमें प्रदर्शन की रूपरेखा तैयार की जा रही है। राहुल गांधी और अन्य घटक दलों के नेता इस आंदोलन को जन आंदोलन का रूप देना चाहते हैं। उनका मकसद जनता के बीच जाकर यह संदेश देना है कि चुनावी संस्थाओं की निष्पक्षता खतरे में है। अब सबकी निगाहें 12 अक्टूबर पर टिकी हैं कि दिल्ली की सड़कों पर विपक्षी दल किस तरह शक्ति प्रदर्शन करते हैं और सरकार व चुनाव आयोग इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।







