नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारत में हर साल की तरह इस बार भी मानसून का इंतजार बहुत बेसब्री से किया जा रहा है। मौसम विभाग ने अपनी ताजा रिपोर्ट में बताया है कि मानसून देश के दक्षिणी हिस्सों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। केरल और आसपास के इलाकों में मानसून के समय से पहले पहुंचने के पूरे आसार नजर आ रहे हैं। पिछले कुछ हफ्तों से पड़ रही भीषण गर्मी और लू से बेहाल आम जनता को अब इस बारिश से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद बंध गई है। हमारे फील्ड रिपोर्टर ने देश के कई हिस्सों में जाकर मौसम का जायजा लिया और लोगों से बातचीत की है।
मौसम विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिकों के अनुसार इस साल मानसून की चाल काफी अच्छी और सामान्य बनी हुई है। बंगाल की खाड़ी और अरब सागर दोनों ही तरफ से नमी वाली हवाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं। इसका सीधा असर यह होगा कि देश के पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों में भी झमाझम बारिश का दौर जल्द शुरू हो जाएगा। किसानों के लिए यह खबर किसी बड़े वरदान से कम नहीं है क्योंकि खरीफ की फसल की बुआई पूरी तरह से इसी मानसूनी बारिश पर निर्भर करती है। पिछले साल कुछ राज्यों में सूखे जैसे हालात बने थे, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा था।
केरल तट पर कब टकराएगी पहली मानसूनी फुहार
केरल का तट हमेशा से ही भारत में मानसून के प्रवेश का मुख्य द्वार माना जाता रहा है। मौसम विभाग का ताजा अनुमान है कि इस बार केरल में मानसून तय तारीख के आसपास या उससे एक-दो दिन पहले दस्तक दे सकता है। तटीय इलाकों में रहने वाले मछुआरों और स्थानीय लोगों को प्रशासन की तरफ से लगातार सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। समंदर में उठने वाली ऊंची लहरों और तेज हवाओं को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। स्थानीय प्रशासन ने किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अपनी पूरी तैयारी कर ली है और राहत दलों को तैनात कर दिया है.
केरल के बाद मानसून तेजी से कर्नाटक, महाराष्ट्र और गोवा की तरफ रुख करेगा। मुंबई और पुणे जैसे बड़े शहरों में भी जून के पहले हफ्ते तक बारिश का सिलसिला शुरू होने की पूरी संभावना है। हर साल मानसून के दौरान इन महानगरों में जलभराव और ट्रैफिक जाम की समस्या आम हो जाती है। नगर निगम और स्थानीय निकाय अपनी तरफ से नालों की सफाई का काम तेजी से पूरा करने का दावा कर रहे हैं। हालांकि, हर साल की तरह इस बार भी जमीनी स्तर पर कितनी तैयारियां पूरी हैं, यह तो पहली बारिश के बाद ही साफ हो पाएगा।
किसानों के चेहरे पर लौटी उम्मीद की चमक
उत्तर भारत के राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के किसानों की निगाहें अब आसमान पर टिकी हैं। इन इलाकों में भीषण गर्मी और तापमान लगातार 45 डिग्री के पार पहुंच रहा है। किसान खेतों की जुताई और बीजों के इंतजाम में अभी से जुट गए हैं ताकि समय पर बुआई का काम शुरू किया जा सके। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस साल समय पर और अच्छी बारिश हुई, तो खाद्यान्न के उत्पादन में जबरदस्त इजाफा देखने को मिलेगा। सरकार ने भी उर्वर और बीजों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने का दावा किया है ताकि किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो।
ग्रामीण इलाकों में मानसून से जुड़ी पारंपरिक मान्यताएं और लोकगीत आज भी बहुत लोकप्रिय हैं। बुजुर्ग लोग बादलों की आवाज़ और हवा की दिशा देखकर बारिश का सटीक अंदाजा लगा लेते हैं। गांवों में इस बात की चर्चा आम है कि इस बार अच्छी बारिश होने से कुएं और तालाब फिर से लबालब भर जाएंगे। पेयजल संकट से जूझ रहे कई ग्रामीण इलाकों के लिए मानसून किसी जीवनदान से कम नहीं होता है। मवेशियों के लिए चारे की व्यवस्था भी इसी बारिश के बाद हरी घास उगने से आसान हो जाती है, जिससे पशुपालकों को बड़ी राहत मिलती है।
प्रशासनिक तैयारियां और आपदा से निपटने के उपाय
मानसून के आगमन के साथ ही देश के कई हिस्सों में बाढ़ और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। खासकर पूर्वोत्तर के राज्यों और पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर देती है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल और राज्य आपदा टीमों को संवेदनशील इलाकों में पहले से ही मुस्तैद रहने के निर्देश दिए गए हैं। बाढ़ प्रभावित होने वाले निचले इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए प्रशासन ने शेल्टर होम तैयार कर लिए हैं। आपातकालीन संपर्क नंबर भी जारी किए गए हैं ताकि किसी भी संकट के समय तुरंत मदद पहुंचाई जा सके।
बिजली विभाग और नगर निगमों ने भी मानसून के दौरान होने वाले संभावित नुकसान से निपटने के लिए अपनी कमर कस ली है। आंधी-तूफान के दौरान बिजली के खंभे गिरने और तारों के टूटने की घटनाओं को रोकने के लिए पेड़ों की कटाई-छटाई का काम चल रहा है। द फ्रीलान्स की टीम लगातार इस बात पर नजर बनाए रखेगी कि प्रशासन के दावे जमीनी स्तर पर कितने कारगर साबित होते हैं। हमारा मकसद पाठकों तक हर छोटी-बड़ी जानकारी पूरी निष्पक्षता और सटिकता के साथ पहुंचाना है ताकि वे आने वाले मौसम के लिए खुद को पूरी तरह तैयार रख सकें।





