उत्तर प्रदेश में चुनाव से पहले प्रशासनिक हलचल तेज
उत्तर प्रदेश के आगामी राजनीतिक रण को ध्यान में रखते हुए निर्वाचन आयोग ने अपनी प्रशासनिक तैयारियां तेज कर दी हैं। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर) का आधिकारिक कार्यक्रम घोषित कर दिया है। इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य का कोई भी पात्र नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न रहे और मतदाता सूची पूरी तरह त्रुटिहीन तथा अद्यतन हो।
लोकतंत्र के इस सबसे बड़े पर्व से पहले होने वाले इस पुनरीक्षण कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक दलों के साथ भी बैठकें शुरू हो चुकी हैं। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस बार पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और सुगम बनाया जाएगा, ताकि आम मतदाताओं के साथ-साथ पहली बार मतदान करने वाले युवाओं को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
एक जनवरी 2027 तक के युवाओं को मिलेगा बड़ा मौका
इस विशेष पुनरीक्षण अभियान के तहत सबसे बड़ा लाभ उन युवा मतदाताओं को मिलने वाला है जो आने वाले समय में अपने मताधिकार का उपयोग करने के योग्य हो जाएंगे। निर्वाचन आयोग के नियमों के मुताबिक, वे सभी युवा जिनकी आयु एक जनवरी 2027 तक 18 वर्ष पूरी हो जाएगी, वे मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन कर सकेंगे। इसके अलावा जिन युवाओं की उम्र 1 अप्रैल, 1 जुलाई या 1 अक्टूबर 2027 को 18 वर्ष होगी, वे भी पहले से ही अपना पंजीकरण करा सकेंगे।
युवाओं और नए मतदाताओं को जोड़ने के लिए फॉर्म-6 का उपयोग करना होगा। इसके अलावा प्रवासी भारतीयों के लिए फॉर्म-6ए, नाम हटाने या आपत्ति दर्ज कराने के लिए फॉर्म-7 और पता तथा विवरण में संशोधन के लिए फॉर्म-8 की व्यवस्था की गई है। ये सभी फॉर्म बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) के पास उपलब्ध रहेंगे तथा ऑनलाइन माध्यम से भी जमा किए जा सकेंगे।
मतदान केंद्रों के पुनर्गठन और ड्राफ्ट प्रकाशन की तिथियां
निर्वाचन आयोग के तय शेड्यूल के अनुसार, मतदाता सूची पुनरीक्षण से पहले सभी मतदान केंद्रों के संभाजन और पुनर्गठन का कार्य दो नवंबर तक पूरा किया जाएगा। इसके बाद 12 नवंबर 2026 को एकीकृत मतदाता सूचियों के आलेख्य यानी ड्राफ्ट का प्रकाशन किया जाएगा। इस ड्राफ्ट के सार्वजनिक होने के बाद आम नागरिक और राजनीतिक दल इसमें सुधार के लिए अपनी आपत्तियां और दावे दर्ज करा सकेंगे।
दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समयसीमा 12 नवंबर से 11 दिसंबर 2026 तक तय की गई है। इस दौरान प्राप्त होने वाले सभी आवेदनों और आपत्तियों का निस्तारण 28 दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। प्रशासनिक और मैदानी स्तर पर सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद चार जनवरी 2027 को उत्तर प्रदेश की अंतिम और अधिकृत मतदाता सूची का प्रकाशन कर दिया जाएगा।
राजनीतिक दलों के साथ बैठक और मतदान केंद्रों की सीमा
हाल ही में मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने राज्य के सभी मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों के प्रतिनिधियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की थी। इस बैठक में मतदाता सूची की पारदर्शिता और नियमों को लेकर चर्चा की गई। आयोग ने निर्देश दिए हैं कि हर मतदान केंद्र पर मतदाताओं की संख्या आमतौर पर 1,200 से अधिक नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही नए बूथ बनाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा जाएगा कि एक ही परिवार के सदस्यों के नाम एक ही मतदान केंद्र पर रहें।
"मतदाता सूची को पूरी तरह स्वच्छ और पारदर्शी बनाना हमारा मुख्य उद्देश्य है। सभी पात्र युवाओं और नागरिकों से अपील है कि वे समय रहते अपना नाम सूची में दर्ज कराएं ताकि वे लोकतंत्र के इस महापर्व में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित कर सकें।"— मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय, उत्तर प्रदेश
विपक्ष की आपत्तियां और चुनाव आयोग का रुख
दूसरी ओर, इस पूरी चुनावी प्रक्रिया और पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक गलियारों में बयानबाजी भी तेज हो गई है। विपक्षी दलों, विशेषकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के नेताओं ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। हाल ही में विपक्षी नेताओं ने मतदाता सूची प्रबंधन और पारदर्शी प्रक्रियाओं को लेकर कई तीखे सवाल खड़े किए हैं, जिसके बाद आयोग ने भी अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि सभी दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन किया जा रहा है।
बहरहाल, इन राजनीतिक बहसों से इतर प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह से अपने निर्धारित कार्यक्रम पर काम कर रही है। आने वाले महीनों में जिला निर्वाचन अधिकारियों की देखरेख में बूथ लेवल पर युद्ध स्तर पर काम होगा, ताकि अंतिम सूची आने से पहले सभी खामियों को दूर किया जा सके।







