नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश के मौसम को लेकर एक बहुत बड़ी और डराने वाली खबर सामने आ रही है। इस बार भारत को मौसम की दोहरी मार झेलनी पड़ सकती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि सुपर अल नीनो इस साल अपने सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ने वाला है। इसका सीधा असर हमारे देश की सर्दियों पर पड़ेगा और ठंड का पूरा मजा किरकिरा हो सकता है। लोग इस बार सामान्य से कम ठंड और अजीब मौसम का सामना करने के लिए तैयार रहें।
हमारे फील्ड रिपोर्टर ने जब मौसम विभाग के जानकारों से बात की तो उन्होंने साफ बताया कि प्रशांत महासागर में पानी का तापमान लगातार बढ़ रहा है। यही वजह है कि सुपर अल नीनो तेजी से अपनी जड़ें जमा रहा है। जब ऐसा होता है तो भारत में मानसून के बाद आने वाली सर्द हवाओं का रास्ता बदल जाता है। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों से लेकर दक्षिण तक इस बदलाव का असर साफ दिखाई देगा। दिसंबर और जनवरी के महीनों में इस बार तापमान सामान्य से ऊपर रहने का अनुमान लगाया गया है।
सर्दियों की रुत पर पड़ेगा सुपर अल नीनो का सीधा असर
आम तौर पर लोग नवंबर के आखिरी हफ्ते से कड़ाके की ठंड का इंतजार करते हैं। रजाई, कंबल और गरम कपड़ों की दुकानें सज जाती हैं और सुबह के वक्त घना कोहरा देखने को मिलता है। लेकिन इस बार ऐसा नजारा शायद ही देखने को मिले। मौसम के जानकारों का मानना है कि सुपर अल नीनो की वजह से इस बार सर्दियों के दिन बहुत छोटे और कम ठंडे होंगे। बीच-बीच में अचानक गर्मी या उमस जैसी स्थिति भी बन सकती है जो सेहत के लिए भी ठीक नहीं मानी जाती है।
खेती किसानी पर इसका बहुत बुरा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। हमारे देश में रबी की फसलें जैसे गेंहू और सरसों के लिए ठंडी हवाएं और हल्का पाला बहुत जरूरी होता है। अगर तापमान ज्यादा रहा तो फसलों की पैदावार पर सीधा असर पड़ेगा। किसान भाई पहले से ही बदलते मौसम से परेशान हैं और अब इस नई चेतावनी ने उनकी नींद उड़ा दी है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों को इस बार पानी और खाद का प्रबंधन बहुत सोच-समझकर करना होगा ताकि नुकसान से बचा जा सके।
प्रदूषण और कोहरे का खतरनाक मेल बढ़ाएगा मुश्किलें
सिर्फ ठंड कम होना ही एकमात्र समस्या नहीं है बल्कि इसके साथ प्रदूषण की दोहरी मार भी झेलनी होगी। हवा की गति कम होने और तापमान में बदलाव के कारण शहरों में धुआं और धूल जमीन के करीब जमा होने लगते हैं। दिल्ली, एनसीआर और उत्तर भारत के बड़े शहरों में हर साल सर्दियों में सांस लेना मुश्किल हो जाता है। इस बार सुपर अल नीनो के कारण हवा की गुणवत्ता और ज्यादा खराब हो सकती है जिससे बुजुर्गों और बच्चों को सांस लेने में भारी दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।
प्रशासन और स्थानीय निकाय भी इस स्थिति से निपटने के लिए अपनी तैयारियों में जुट गए हैं। अस्पतालों में सांस के मरीजों के लिए अलग से बिस्तर आरक्षित किए जा रहे हैं। पर्यावरणविदों का मानना है कि हमें अब से ही पर्यावरण को बचाने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे क्योंकि मौसम का यह बदलाव किसी बड़ी आपदा का संकेत हो सकता है। आम जनता को भी सलाह दी जाती है कि वे बदलते मौसम में अपनी सेहत का खास ख्याल रखें और प्रदूषण से बचने के लिए मास्क का इस्तेमाल करें।
आने वाले दिनों में मौसम का मिजाज और क्या रंग दिखाएगा
मौसम विभाग लगातार इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए है। सुपर अल नीनो की ताज़ा स्थिति को लेकर हर हफ्ते सैटेलाइट से आंकड़े जुटाए जा रहे हैं। आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि किस राज्य पर इसका सबसे ज्यादा असर होगा। फिलहाल लोगों को यही सलाह दी जा रही है कि वे मौसम के इस उतार-चढ़ाव के लिए खुद को तैयार रखें। द फ्रीलान्स की टीम ग्राउंड जीरो से आपको पल-पल की सटीक जानकारी देती रहेगी ताकि आप हर स्थिति के लिए पूरी तरह सतर्क रहें।










