नई दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर इन दिनों राजनीतिक हलचल और तनाव अपने चरम पर है। पिछले कुछ दिनों से यहां लगातार हो रहे प्रदर्शनों और सभाओं के बीच प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। ताज़ा घटनाक्रम के तहत, CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) को आगामी 10 अक्टूबर को होने वाले प्रस्तावित प्रोटेस्ट की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया गया है। दिल्ली पुलिस और स्थानीय प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी पहली प्राथमिकता है और किसी भी ऐसी गतिविधि की इजाजत नहीं दी जा सकती जिससे शहर की शांति व्यवस्था खतरे में पड़े।
इस बीच जंतर-मंतर पर सुरक्षा व्यवस्था और प्रदर्शन के तौर-तरीकों को लेकर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में सोशल मीडिया और विभिन्न माध्यमों से कुछ ऐसे भड़काऊ आह्वान सामने आए थे जिनमें जिम वाले लड़कों और पहलवानों को लठ लेकर जंतर-मंतर पहुंचने की अपील की गई थी। इस तरह की बयानों और अपीलों के बाद पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। पुलिस अधिकारियों का साफ कहना है कि किसी भी प्रकार की हिंसा या बल प्रयोग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
महिला पत्रकारों पर हमले के आरोप और क्राइम ब्रांच की एंट्री
जंतर-मंतर के हालिया प्रदर्शनों के दौरान एक बड़ा विवाद तब सामने आया जब कुछ महिला पत्रकारों पर कवरेज के दौरान यौन हमले और बदसलूकी के गंभीर आरोप लगे। इस घटना को मीडिया जगत और आम जनता में भारी आक्रोश देखने को मिला। मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने त्वरित कदम उठाते हुए इस पूरे प्रकरण की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी है। क्राइम ब्रांच अब उन तमाम वीडियो फुटेज और तस्वीरों को खंगाल रही है जिनकी मदद से आरोपियों की पहचान की जा सके और दोषियों के खिलाफ ठोस कानूनी शिकंजा कसा जा सके।
दूसरी ओर, इस मामले में कानूनी मोर्चे पर कुछ राहत भरी खबरें भी सामने आई हैं। जंतर-मंतर मारपीट के एक चर्चित मामले में आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को पटियाला हाउस कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उन्हें अंतरिम जमानत दे दी है। कोर्ट का यह मानना रहा है कि आरोपी ने जमानत की शर्तों का कोई उल्लंघन नहीं किया है। हालांकि, पुलिस इस पूरे मामले में अपनी जांच लगातार जारी रखे हुए है और किसी भी दोषी को बख्शने के मूड में नहीं दिख रही है।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग और सियासी चेतावनी
जंतर-मंतर के मंच से केवल स्थानीय मुद्दों पर ही नहीं, बल्कि संवैधानिक पदों पर बैठे अधिकारियों के खिलाफ भी आवाजें उठाई जा रही हैं। हाल ही में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मोर्चा खोला है। कार्यकर्ता अभिजीत दीपके ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आने वाले दिनों में पूरे देश के हालात जंतर-मंतर जैसे हो सकते हैं। इस चेतावनी के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं कि जंतर-मंतर एक बार फिर देशव्यापी आंदोलनों का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है।
इन तमाम गर्माती राजनीतिक गतिविधियों के बीच दिल्ली पुलिस और खुफिया एजेंसियां पूरी स्थिति पर कड़ी नजर रखे हुए हैं। जंतर-मंतर के आसपास भारी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी गई है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को समय रहते रोका जा सके। प्रशासन का यह भी कहना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान किया जाता है, लेकिन सार्वजनिक सुरक्षा और कानून के दायरे से बाहर जाकर किसी को भी प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। 'द फ्रीलान्स' इस पूरे मामले पर लगातार अपनी पैनी नजर बनाए हुए है।
प्रशासन की सख्त पाबंदियां और आगे की रणनीति
आगामी दिनों में होने वाले आयोजनों को लेकर दिल्ली पुलिस ने साफ कर दिया है कि बिना वैध अनुमति के किसी भी सभा या मार्च की अनुमति नहीं होगी। आयोजकों और नेताओं के साथ लगातार बैठकों का दौर जारी है ताकि शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखा जा सके। आम जनता और स्थानीय दुकानदारों में भी इस लगातार बने तनाव के कारण चिंता का माहौल है, क्योंकि विरोध प्रदर्शनों के चलते अक्सर यातायात बाधित होता है और आम जनजीवन प्रभावित होता है।
पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की यह कोशिश है कि किसी भी कीमत पर शहर की फिजा न बिगड़े। जंतर-मंतर पर सुरक्षा के कड़े पहरे के बीच यह देखना अहम होगा कि आगामी 10 अक्टूबर को प्रस्तावित कार्यक्रमों पर आयोजक क्या रुख अपनाते हैं और प्रशासन अपनी पाबंदियों पर कितना कायम रहता है। 'द फ्रीलान्स' की टीम इस पूरे मामले के हर पहलू की जमीनी पड़ताल आगे भी जारी रखेगी।





