नई दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर इन दिनों राजनीतिक हलचल अपने चरम पर है। देश के विभिन्न हिस्सों से आए राजनीतिक दलों, संगठनों और प्रदर्शनकारियों ने एक बड़े विरोध प्रदर्शन का मोर्चा खोल दिया है। मुख्य मांग मुख्य चुनाव आयुक्त या संबंधित उच्च पदस्थ अधिकारी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मौजूदा सिस्टम में निष्पक्षता की कमी है और जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को अपनी जवाबदेही तय करनी चाहिए। स्थिति को भांपते हुए राजधानी के इस प्रमुख धरने स्थल पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी सीधे मैदान में उतर आए हैं। आज दोपहर के भोजन के बाद राहुल गांधी ने सीधे जंतर-मंतर का रुख किया और वहां बैठे विपक्षी सांसदों व आम प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की। राहुल गांधी ने साफ शब्दों में कहा कि वे इन धरने पर बैठे लोगों के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं। इस राजनीतिक घटनाक्रम ने राष्ट्रीय राजधानी की सियासत में एक नई गर्माहट ला दी है और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच जुबानी जंग भी तेज हो गई है। राहुल गांधी के इस दौरे के बाद सुरक्षा एजेंसियों को और अधिक सतर्क कर दिया गया है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर अड़े प्रदर्शनकारी
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे संगठनों और नेताओं की भाषा काफी आक्रामक नजर आ रही है। कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दीपके ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो पूरा देश जंतर-मंतर बन जाएगा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सिर्फ नाममात्र के बदलाव से काम नहीं चलेगा, बल्कि सिस्टम के शीर्ष पर बैठे लोगों को अपनी जिम्मेदारी लेनी होगी। इस तरह के बयानों और चेतावनियों के बाद खुफिया एजेंसियों और दिल्ली पुलिस ने अपनी चौकसी और बढ़ा दी है। मंच से लगातार सरकार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ तीखे हमले किए जा रहे हैं, जिसमें देश के अलग-अलग कोनों से आए कार्यकर्ता हिस्सा ले रहे हैं।
दूसरी ओर, सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय और पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद दिख रहे हैं। हाल ही में न्यायालय के आदेशों और पिछले अनुभवों को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ड्यूटी पर तैनात हर पुलिसवाले को बॉडी कैमरा पहनने के निर्देश दिए गए हैं ताकि हर गतिविधि पर पारदर्शी तरीके से नजर रखी जा सके। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि प्रदर्शन के दौरान किसी भी प्रकार की हिंसा या पुलिस ज्यादती के आरोपों की निष्पक्ष जांच हो सके और सच्चाई सामने आ सके।
महिला पत्रकारों पर हमले के आरोपों पर क्राइम ब्रांच की एंट्री
इस आंदोलन और प्रदर्शन के दौरान एक बेहद गंभीर मामला भी सामने आया है। जंतर-मंतर पर कवरेज करने गई कुछ महिला पत्रकारों के साथ कथित यौन हमले और अभद्रता के आरोप लगे हैं। इस संवेदनशील मामले का संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस ने शुरुआती जांच के बाद पूरे मुकदमे को क्राइम ब्रांच को सौंप दिया है। महिला पत्रकारों की सुरक्षा और मीडिया की स्वतंत्रता पर हमला होने का यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है। प्रेस संगठनों ने भी इस घटना की कड़ी निंदा की है और दोषियों के खिलाफ तुरंत सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। क्राइम ब्रांच की टीमें अब घटनास्थल के वीडियो फुटेज खंगाल रही हैं और आरोपियों की पहचान करने में जुटी हैं।
जमीन पर हालात को काबू करने के लिए स्थानीय पुलिस लगातार गश्त कर रही है और भीड़ को नियंत्रित करने के वैकल्पिक रास्तों का उपयोग कर रही है। हालांकि, जिस प्रकार की बयानबाजी और उत्तेजक अपीलें सामने आ रही हैं, उससे प्रशासन की चिंताएं बढ़ गई हैं। कुछ मंचों से जिम जाने वाले युवाओं और पहलवानों से भी लाठी-डंडों के साथ जंतर-मंतर पहुंचने की अपीलें की गईं, जिसके बाद पुलिस प्रशासन ने किसी भी संभावित उपद्रव को रोकने के लिए एहतियाती कदम तेज कर दिए हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शांति व्यवस्था बनाए रखना उनकी पहली प्राथमिकता है और कानून हाथ में लेने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा।
आगे की राजनीतिक रणनीति और प्रशासनिक तैयारियां
आगामी दिनों में इस आंदोलन के और अधिक व्यापक होने की आशंका जताई जा रही है। विपक्षी दल इसे एक बड़े राजनीतिक मुद्दे के रूप में भुनाने की तैयारी में हैं, वहीं सत्ताधारी दल इसे विपक्ष का राजनीतिक स्टंट बता रहा है। जंतर-मंतर की इस जमीन से उठने वाली आवाजें अब संसद से लेकर सड़क तक गूंजने लगी हैं। प्रशासन के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन गया है कि कैसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार और कानून व्यवस्था के बीच संतुलन बनाया जाए। आने वाले हफ्तों में इस मोर्चे पर क्या नया मोड़ आता है, इस पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं।



