नई दिल्ली से ग्राउंड रिपोर्ट — देश भर के करोड़ों सरकारी कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते यानी डीए को लेकर एक बार फिर निराशा हाथ लगी है। तय माना जा रहा था कि सरकार इस बार जुलाई 2026 के डीए बढ़ोतरी पर मुहर लगा देगी, लेकिन अचानक फैसला टलने से कर्मचारियों में भारी मायूसी है। हर साल लाखों कर्मचारी इस बढ़ोतरी का बेसब्री से इंतजार करते हैं ताकि महंगाई के दौर में उनके घर का बजट संभल सके। लेकिन प्रशासनिक कारणों और बैठकों के टलने के कारण इस बार फाइल आगे नहीं बढ़ पाई है। द फ्रीलान्स की टीम ने जब इस मामले पर दिल्ली के केंद्रीय दफ्तरों के बाहर कर्मचारियों से बात की, तो उनका गुस्सा साफ झलकता दिखाई दिया।
कर्मचारियों का कहना है कि रोजमर्रा की चीजों के दाम आसमान छू रहे हैं। ऐसे समय में डीए का भुगतान समय पर न होना उनके साथ बहुत बड़ा अन्याय है। दूसरी तरफ, देश के कुछ राज्यों से 12 लाख सरकारी कर्मचारियों के लिए थोड़ी राहत भरी खबर भी सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन कर्मचारियों की नवंबर की सैलरी में कुछ पैसों की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। हालांकि यह राहत उन बड़े दावों के सामने बहुत छोटी है, जो जुलाई के डीए को लेकर लगाए जा रहे थे। कर्मचारी संगठन अब सरकार से मांग कर रहे हैं कि बिना किसी और देरी के रुका हुआ पैसा जल्द से जल्द उनके खातों में भेजा जाए।
जुलाई 2026 के डीए पर क्यों टला बड़ा फैसला?
महंगाई भत्ते यानी डीए में बढ़ोतरी का यह मामला पिछले कई हफ्तों से वित्त मंत्रालय और संबंधित विभागों के बीच अटका हुआ है। जानकारों का मानना है कि सरकारी खजाने पर बढ़ते दबाव और वित्तीय गणित के चलते इस फैसले को फिलहाल रोक लिया गया है। केंद्र सरकार के कर्मचारी लंबे समय से यह उम्मीद लगाए बैठे थे कि त्योहारी सीजन से पहले उन्हें डीए का तोहफा मिल जाएगा। लेकिन फाइल पर अंतिम हस्ताक्षर न होने के कारण अब यह मामला आने वाले महीनों पर टल गया है। राज्य स्तर के कर्मचारियों की स्थिति भी इससे कुछ अलग नहीं है, क्योंकि कई राज्यों में डीए की दरें केंद्र के मुकाबले पीछे चल रही हैं।
कर्मचारी यूनियनों के नेताओं का कहना है कि सरकार को हर बार महंगाई के आंकड़े आने के बाद भी फैसले लेने में महीनों का समय नहीं लगाना चाहिए। जब बाजार में हर चीज की कीमत हर दिन बढ़ रही है, तो कर्मचारियों का भत्ता बढ़ाने में इतनी हीला-हवाली क्यों की जाती है? जमीन पर स्थिति यह है कि छोटे और मध्यम वर्ग के कर्मचारी अपने बच्चों की पढ़ाई और घर के खर्च चलाने के लिए कर्ज लेने को मजबूर हो रहे हैं। अगर आने वाले दिनों में सरकार ने इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो कर्मचारी सड़कों पर उतरकर बड़ा प्रदर्शन करने की तैयारी भी कर रहे हैं।
नवंबर की सैलरी में कितनी बढ़ेगी रकम?
एक तरफ जहां जुलाई के डीए पर सस्पेंस बना हुआ है, वहीं कुछ चुनिंदा राज्यों में 12 लाख कर्मचारियों के लिए नवंबर के महीने में वेतन बढ़ने की चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय प्रशासन ने एरियर और बकाए भुगतान को लेकर कुछ सकारात्मक संकेत दिए हैं। हालांकि यह बढ़ोतरी उतनी नहीं है जितनी कर्मचारी उम्मीद कर रहे थे, फिर भी बढ़ती महंगाई के बीच यह राहत की एक छोटी सी बूंद जैसी है। जानकारों का मानना है कि सरकारें अक्सर ऐसे समय पर छोटे ऐलान करके कर्मचारियों के गुस्से को शांत करने की कोशिश करती हैं, लेकिन मूल समस्या जस की तस बनी रहती है।
द फ्रीलान्स की पड़ताल में यह भी सामने आया है कि अलग-अलग विभागों के कर्मचारियों को अलग-अलग हिसाब से फायदा मिल रहा है। कुछ विशेष सेवाओं से जुड़े लोगों को इसका लाभ तुरंत मिल जाता है, जबकि आम बाबू और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को महीनों चक्कर काटने पड़ते हैं। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार नवंबर के खत्म होने से पहले डीए के बकाए को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा करती है या नहीं। कर्मचारियों ने साफ कह दिया है कि अगर इस बार भी उन्हें सिर्फ आश्वासन मिला, तो वे चुप बैठने वाले नहीं हैं।
आगे क्या कदम उठाएंगे कर्मचारी संगठन?
देश के अलग-अलग राज्यों से आ रही इन खबरों के बीच कर्मचारी संगठनों ने अपनी अगली रणनीति पर विचार करना शुरू कर दिया है। दिल्ली और अन्य बड़े शहरों में गुप्त बैठकों का दौर जारी है जिसमें यह तय किया जा रहा है कि सरकार पर दबाव कैसे बनाया जाए। डीए का यह मामला सिर्फ पैसों का नहीं, बल्कि कर्मचारियों के सम्मान और अधिकार से जुड़ा हुआ है। जब तक सरकार साफ तारीख तय करके पैसा खातों में नहीं भेजती, तब तक रोष कम होने की कोई उम्मीद नहीं है। द फ्रीलान्स इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए रखेगा और पल-पल की जमीनी हकीकत आप तक पहुंचाता रहेगा।





