नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की निगाहें इस समय सरकार के अगले बड़े फैसले पर टिकी हुई हैं। हर साल की तरह इस बार भी साल के दूसरे छमाही के लिए महंगाई भत्ते यानी डीए में बढ़ोतरी का इंतजार लंबा होता जा रहा है। हाल ही में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस मुद्दे पर कोई अधिकारिक चर्चा या फैसला सामने नहीं आया। इसके बाद से ही सरकारी दफ्तरों से लेकर कर्मचारी संगठनों के बीच सुगबुगाहट तेज हो गई है। लोग यह जानने के लिए बेचैन हैं कि आखिर उनकी जेब में बढ़ा हुआ पैसा कब तक आएगा।
कर्मचारी यूनियनों और संगठनों ने सरकार से इस मामले में अब और देरी न करने की अपील की है। ऑल इंडिया डिफेंस एंप्लाइज फेडरेशन यानी एआईडीएफ ने सरकार को पत्र लिखकर जल्द से जल्द डीए बढ़ाने का औपचारिक ऐलान करने की मांग की है। फेडरेशन का यह भी कहना है कि केवल डीए ही नहीं बल्कि बोनस की सीमा को भी बढ़ाया जाना चाहिए ताकि महंगाई के इस दौर में निचले स्तर के कर्मचारियों को कुछ वास्तविक राहत मिल सके। कर्मचारियों का तर्क है कि त्योहारी सीजन सिर पर है और ऐसे में खर्च बढ़ जाते हैं।
दिवाली से पहले खुशखबरी मिलने की उम्मीद
अक्टूबर का महीना त्योहारों का महीना होता है और इस दौरान हर परिवार को अतिरिक्त पैसों की जरूरत पड़ती है। जानकारों का मानना है कि भले ही इस बार कैबिनेट की सामान्य बैठक में डीए वृद्धि पर मुहर नहीं लगी हो, लेकिन सरकार आगामी त्योहारों को देखते हुए जल्दबाजी में कोई बड़ा कदम उठा सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स और सूत्रों के हवाले से यह कयास लगाए जा रहे हैं कि दशहरा या दिवाली से ठीक पहले केंद्र सरकार कर्मचारियों को यह बड़ा तोहफा दे सकती है। अगर ऐसा होता है तो त्योहारी सीजन में बाजार में भी अच्छी खासी रौनक देखने को मिलेगी।
नियमों के मुताबिक केंद्रीय कर्मचारियों को मिलने वाले महंगाई भत्ते में साल में दो बार संशोधन किया जाता है। पहला संशोधन जनवरी महीने से प्रभावी होता है और दूसरा जुलाई महीने से लागू होता है। चूंकि जुलाई 2024 के डीए का ऐलान अभी तक नहीं हुआ है, इसलिए कर्मचारियों को पिछले कुछ महीनों का एरियर भी जुड़कर मिलने की उम्मीद है। सरकार अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आंकड़ों के आधार पर डीए तय करती है। इन आंकड़ों के गणित को देखें तो इस बार भी डीए में तीन से चार प्रतिशत की बढ़ोतरी तय मानी जा रही है।
कर्मचारी संगठनों की दोहरी मांग और आगे की राह
महंगाई भत्ते के अलावा कर्मचारी संगठनों ने सरकार के सामने कुछ अन्य वित्तीय मांगें भी रखी हैं। इनमें बोनस की पात्रता सीमा को संशोधित करना मुख्य रूप से शामिल है। कई सालों से यह मांग उठाई जा रही है कि बोनस कैलकुलेशन के लिए तय की गई सैलरी लिमिट को बढ़ाया जाए। यदि सरकार इस मांग पर भी सकारात्मक रुख दिखाती है तो यह चतुर्थ श्रेणी और मध्यम वर्ग के कर्मचारियों के लिए बहुत बड़ी राहत साबित होगी। फिलहाल सभी की निगाहें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में होने वाली अगली कैबिनेट बैठकों पर टिकी हैं।
दूसरी तरफ सरकार की तरफ से अभी तक कोई भी पक्की तारीख साझा नहीं की गई है। प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा जरूर है कि फाइल तैयार है और केवल औपचारिक मंजूरी का इंतजार बाकी है। जैसे ही इसे हरी झंडी मिलेगी, वित्त मंत्रालय की तरफ से आदेश जारी कर दिए जाएंगे। तब तक देश का कर्मचारी वर्ग और उनके परिवार उम्मीद और इंतजार के दोहरे दौर से गुजर रहे हैं। द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगी और जैसे ही कोई नया अपडेट आएगा, हम सबसे पहले आप तक पहुंचाएंगे।



