चेन्नई/ग्राउंड ब्यूरो — तमिल नाडु के प्रस्तावित परंदूर ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे के भविष्य को लेकर पिछले कुछ दिनों से अटकलें तेज हो गई हैं। राज्य सरकार जल्द ही इस बड़े प्रोजेक्ट को लेकर एक आधिकारिक आदेश जारी कर सकती है। शुरुआती संकेतों से पता चलता है कि सरकार इस पूरी योजना को रद्द करने या रोकने पर विचार कर रही है। इस परियोजना के लिए प्रशासन ने अब तक करीब सत्रह सौ एकड़ जमीन का अधिग्रहण भी कर लिया है। लेकिन इसके बाद भी प्रोजेक्ट को लेकर स्थिति साफ नहीं हो पा रही है और स्थानीय किसानों में चिंता बढ़ गई है।
स्थानीय स्तर पर इस परियोजना के रद्द होने की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। विपक्षी दलों और राजनीतिक नेताओं ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। कई नेताओं का कहना है कि अगर यह हवाई अड्डा प्रोजेक्ट बीच में ही रोक दिया जाता है, तो यह जनता की उम्मीदों और विकास के लिहाज से बड़ा झटका होगा। राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी चर्चा है कि सरकार जमीन के वैकल्पिक इस्तेमाल पर विचार कर रही है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर अभी तक कोई अंतिम फैसला सामने नहीं आया है और हर कोई सरकार के अगले कदम का इंतजार कर रहा है।
केंद्र सरकार का रुख और जमीनी हकीकत
इस पूरे मामले में केंद्र सरकार का पक्ष भी सामने आ चुका है। केंद्रीय अधिकारियों के मुताबिक, तमिल नाडु सरकार की तरफ से अभी तक परंदूर हवाई अड्डे को किसी दूसरी जगह पर शिफ्ट करने का कोई औपचारिक अनुरोध नहीं किया गया है। इसका मतलब साफ है कि या तो इस प्रोजेक्ट पर मौजूदा जमीन पर ही फैसला होना है या फिर राज्य सरकार अपने स्तर पर नीतिगत बदलाव पर विचार कर रही है। केंद्र की इस टिप्पणी के बाद राज्य के भीतर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है। विरोधी दल सरकार से यह सवाल पूछ रहे हैं कि यदि प्रोजेक्ट रद्द होता है, तो अधिग्रहित की गई जमीन का अब क्या किया जाएगा।
दूसरी ओर, परंदूर क्षेत्र के किसान और स्थानीय निवासी पिछले कई महीनों से इस हवाई अड्डे के विरोध में आंदोलन चला रहे थे। किसानों का लगातार यही कहना था कि उपजाऊ जमीन और रिहायशी इलाकों के अधिग्रहण से उनकी आजीविका पूरी तरह तबाह हो जाएगी। अब जबकि यह परियोजना ठंडे बस्ते में जाने की खबरें आ रही हैं, तो किसानों की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आ रही है। कुछ लोगों को राहत महसूस हो रही है कि उनकी जमीन बच सकती है, तो वहीं कुछ लोग इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि उनकी जमीन के मुआवजे और कानूनी कागजात का अब आगे क्या होगा।
राजनीतिक सरगर्मी और आगामी प्रशासनिक कदम
तमिल नाडु की राजनीति में इस समय परंदूर हवाई अड्डे का मुद्दा सबसे गरमाया हुआ विषय बन गया है। विपक्षी दलों के नेता लगातार राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं और प्रशासनिक विफलता का आरोप लगा रहे हैं। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा विधानसभा चुनावों या स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को बड़ा असर दे सकता है। मंत्रियों और राजनीतिक चेहरों पर लगातार हमले और बयानबाजी का दौर इसी वजह से और तेज हो गया है।
द फ्रीलान्स की टीम ने जब ज़मीन पर जाकर हालात का जायजा लिया, तो पाया कि प्रशासनिक कार्यालयों में अभी खामोशी छाई हुई है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक कोई लिखित सरकारी आदेश या शासनादेश जारी नहीं होता, तब तक कुछ भी आधिकारिक तौर पर नहीं कहा जा सकता। आने वाले कुछ हफ्तों में इस बात से पर्दा उठ जाएगा कि तमिल नाडु सरकार परंदूर हवाई अड्डे के निर्माण को आगे बढ़ाती है या फिर इस महत्वाकांक्षी योजना को हमेशा के लिए बंद कर दिया जाता है।







