नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 24वीं किस्त का इंतजार अब देश भर के गांवों में तेज हो गया है। उत्तर प्रदेश से लेकर बिहार और मध्य प्रदेश तक के किसान लगातार यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि उनके बैंक खातों में दो हजार रुपये कब ट्रांसफर किए जाएंगे। गूगल ट्रेंड्स पर भी इस समय यही विषय सबसे ऊपर चल रहा है। आम किसानों के मन में यह सवाल है कि क्या इस बार त्योहारी सीजन के बीच ही उनके खाते में पैसे पहुंच जाएंगे या फिर उन्हें अभी और लंबा इंतजार करना होगा। हमारी टीम ने इस मामले की जमीनी पड़ताल शुरू की है ताकि किसानों तक सही और पुख्ता जानकारी पहुंचाई जा सके।
सरकारी नियमों के मुताबिक इस योजना का लाभ पाने के लिए किसानों को कुछ बेहद जरूरी काम समय पर पूरे करने होते हैं। इनमें सबसे अहम काम ई-केवाईसी यानी इलेक्ट्रॉनिक नो योर कस्टमर है। जिन किसानों ने अभी तक अपना ई-केवाईसी नहीं कराया है या जिनके बैंक खाते से आधार कार्ड लिंक नहीं है, उनकी किस्त बीच में ही अटक सकती है। इसके अलावा भूलेख सत्यापन यानी लैंड सीडिंग का काम भी पूरी तरह दुरुस्त होना चाहिए। कृषि विभाग के दफ्तरों में इन दिनों ऐसे किसानों की खासी भीड़ देखी जा रही है जो अपने दस्तावेजों में आ रही छोटी-मोटी कमियों को सुधारने के लिए चक्कर काट रहे हैं ताकि अगली किस्त आने में कोई रुकावट न आए।
बहराइच से लेकर देश के हर कोने तक किसानों में चर्चा
बहराइच और उसके आसपास के ग्रामीण इलाकों से मिल रही खबरों के मुताबिक अकेले इस जिले में करीब चार लाख सत्तर हजार किसानों को इस योजना का लाभ मिलने की उम्मीद है। स्थानीय किसान चौपालों और चाय की दुकानों पर इन दिनों बस यही चर्चा है कि सरकार किस शुभ दिन पर बटन दबाकर पैसे भेजेगी। कुछ रिपोर्ट्स में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि अक्टूबर महीने के आखिरी हफ्तों में या त्योहारों के आसपास किस्त जारी हो सकती है। हालांकि अभी तक केंद्र सरकार या कृषि मंत्रालय की तरफ से किसी पक्की तारीख का आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है। स्थानीय प्रशासन और जिला कृषि अधिकारियों का कहना है कि पात्र किसानों की सूची लगभग तैयार है और जैसे ही ऊपर से आदेश मिलेगा, खातों में सीधे रकम भेज दी जाएगी।
गांवों में घूमकर जब हमने किसानों से बात की तो उनका दर्द भी साफ झलक रहा था। किसानों का कहना है कि खेती-किसानी के इस मौसम में खाद और बीज खरीदने के लिए पैसों की सख्त जरूरत होती है। ऐसे में यदि दो हजार रुपये समय पर मिल जाएं तो थोड़ी राहत मिल जाती है। कई किसानों ने शिकायत की कि पोर्टल पर स्टेटस चेक करने के दौरान उन्हें तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कभी आधार नंबर गलत बताता है तो कभी बैंक खाते का स्टेटस पेंडिंग दिखाई देता है। इन समस्याओं की वजह से कई बार सही किसानों को भी समय पर पैसे नहीं मिल पाते हैं और उन्हें तहसील या बैंक के चक्कर काटने पड़ते हैं।
अपना स्टेटस खुद कैसे चेक करें और किन बातों का रखें ध्यान
अगर आप भी पीएम किसान योजना के लाभार्थी हैं तो किसी भी अफवाह पर भरोसा करने के बजाय अपना स्टेटस खुद चेक करना सबसे समझदारी भरा कदम होगा। इसके लिए आपको योजना की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा और वहां फार्मर कॉर्नर में जाकर अपना रजिस्ट्रेशन नंबर या आधार नंबर दर्ज करना होगा। ऐसा करने से आपको तुरंत पता चल जाएगा कि आपकी अगली किस्त का स्टेटस क्या है और उसमें कोई गलती तो नहीं बची है। यदि आपके स्टेटस में कोई खामी दिखाई दे तो तुरंत अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर या कृषि मित्र से संपर्क करें ताकि समय रहते उसे ठीक कराया जा सके।
द फ्रीलान्स की इस पड़ताल का निष्कर्ष यही है कि किस्त मिलने की प्रक्रिया चल रही है और सभी औपचारिकताएं पूरी करने वाले किसानों के खातों में पैसे जरूर आएंगे। किसी भी प्रकार की ठगी या फर्जी फोन कॉल से सावधान रहें जो यह दावा करते हैं कि वे पैसे तुरंत ट्रांसफर करवा देंगे। सरकार कभी भी फोन पर ओटीपी या बैंक खाते की गोपनीय जानकारी नहीं मांगती है। किसान भाई पूरी सावधानी बरतें और केवल आधिकारिक माध्यमों से ही अपनी जानकारी पुख्ता करें ताकि उनकी मेहनत की कमाई सुरक्षित रहे और समय पर उन्हें उनका हक मिल सके।







