नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी राजनीतिक यात्रा का एक और बड़ा मील का पत्थर पार कर लिया है। सरकार के प्रमुख के तौर पर उनके कामकाज के कुल 25 साल पूरे हो गए हैं। इस खास और अहम मौके पर देश के प्रधानमंत्री ने अपनी राजनीतिक और वैचारिक यात्रा के पुराने साथी और वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी से मुलाकात की। पीएम मोदी सीधे आडवाणी के आवास पहुंचे और उनका आशीर्वाद लिया। यह मुलाकात राजनीतिक हलकों में खासी चर्चा का विषय बन गई है और सोशल मीडिया पर भी इसकी तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस मुलाकात के दौरान लालकृष्ण आडवाणी के साथ काफी समय बिताया। दोनों नेताओं ने हाथ पर हाथ रखकर पुरानी यादों और देश के मौजूदा राजनीतिक हालातों पर चर्चा की। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी भावनाएं साझा करते हुए बताया कि लालकृष्ण आडवाणी का देश के विकास में कितना बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि आडवाणी ने पार्टी और सरकार दोनों मोर्चों पर देश को दिशा देने का काम किया है और उनका मार्गदर्शन हमेशा प्रेरणा देता रहा है।
गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर देश की कमान तक का सफर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2001 में पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। उस समय से लेकर आज देश के प्रधानमंत्री पद तक, उन्होंने लगातार बिना रुके सरकार के प्रमुख के रूप में अपनी सेवाएं दी हैं। इन 25 सालों में उन्होंने कई बड़े प्रशासनिक बदलाव किए और देश की राजनीति की दिशा को पूरी तरह बदल दिया। इस लंबी और कठिन यात्रा में लालकृष्ण आडवाणी जैसे वरिष्ठ नेताओं की भूमिका को हमेशा से पार्टी की रीढ़ माना जाता रहा है। यही वजह है कि अपने जीवन के इस खास मुकाम पर पीएम मोदी ने सबसे पहले वरिष्ठ नेता का आशीर्वाद लेना जरूरी समझा।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पीएम मोदी का इस तरह वरिष्ठ नेताओं के प्रति सम्मान जताना उनकी राजनीतिक संस्कृति का अहम हिस्सा है। जब भी देश में कोई बड़ी उपलब्धि हासिल होती है, तो वे पुरानी पीढ़ी के नेताओं को याद करना नहीं भूलते हैं। लालकृष्ण आडवाणी भारतीय जनता पार्टी के उन संस्थापक सदस्यों में से हैं जिन्होंने देश भर में पार्टी को खड़ा करने के लिए रथ यात्राएं निकाली थीं और संगठन को मजबूत किया था। आज जब देश विकास के नए रास्ते पर आगे बढ़ रहा है, तो पुरानी पीढ़ी के योगदान को याद करना हर कार्यकर्ता के लिए एक बड़ा संदेश है।
मुलाकात के दौरान राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं हुई तेज
लालकृष्ण आडवाणी के आवास पर हुई इस मुलाकात के बाद दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का साफ कहना है कि यह पूरी तरह से एक व्यक्तिगत और आदर भाव से भरी मुलाकात थी। सरकार के मुखिया के रूप में 25 साल पूरा करना एक बहुत बड़ा प्रशासनिक रिकॉर्ड माना जाता है। इस दौरान देश ने कई बड़े आर्थिक और सामाजिक बदलाव देखे हैं जिनमें तकनीक और डिजिटल क्रांति ने आम आदमी की जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया है।
आम जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच भी इस खबर को लेकर काफी उत्साह देखा जा रहा है। लोग सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री मोदी को 25 साल पूरे होने पर बधाई दे रहे हैं और लालकृष्ण आडवाणी के साथ उनकी तस्वीरों को शेयर कर रहे हैं। देश के राजनीतिक इतिहास में इतने लंबे समय तक बिना किसी रुकावट के सरकार चलाना और जनता का समर्थन हासिल करना एक बहुत बड़ा उदाहरण है।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल और निष्कर्ष
द फ्रीलान्स की टीम ने जब इस पूरे घटनाक्रम की पड़ताल की तो यह बात सामने आई कि यह मुलाकात पूरी तरह से शिष्टाचार और सम्मान के दायरे में थी। आडवाणी अब उम्र के उस पड़ाव पर हैं जहां वे सार्वजनिक कार्यक्रमों में कम ही नजर आते हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री खुद चलकर उनके पास पहुंचे और उनका आशीर्वाद लिया। यह भारतीय संस्कृति की उस परंपरा को भी दिखाता है जहां छोटों द्वारा बड़ों का आदर करना सबसे ऊपर माना जाता है। आने वाले दिनों में देश के राजनीतिक मंच पर इस 25 साल के सफर को लेकर कई और बड़े कार्यक्रमों के आयोजन की भी संभावना जताई जा रही है।

