नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक सफर और प्रशासनिक नेतृत्व को आज 25 साल पूरे हो गए हैं। इस खास मौके पर दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपने भाषण में देश के विकास और भविष्य के लक्ष्यों पर खुलकर बात की। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उनका सफर रुकने वाला नहीं है और वह देश की सेवा के लिए लगातार काम करते रहेंगे। उनके इस भाषण के बाद से राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
दूसरी ओर, संसद से लेकर सड़क तक सियासी पारा चढ़ा हुआ है। चुनाव आयोग के अधिकारियों की नियुक्ति को लेकर चल रहे टकराव के बीच सरकार की तरफ से विपक्ष को कड़े संदेश दिए जा रहे हैं। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा है कि संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने से पहले उन्हें जनता के बीच जाकर उनका भरोसा जीतना चाहिए। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह टकराव संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह और बढ़ सकता है।
शिक्षा संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा और आत्महत्या के आंकड़े
एक तरफ जहां राजनीतिक दलों के बीच जुबानी जंग जारी है, वहीं दूसरी तरफ देश के शीर्ष शिक्षण संस्थानों से जुड़ी एक गंभीर रिपोर्ट सामने आई है। सरकार की तरफ से संसद में दी गई जानकारी के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में आईआईटी, आईआईएम और एनआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कई छात्रों ने अपनी जान गंवाई है। इस चिंताजनक आंकड़े ने देश भर के शिक्षाविदों और अभिभावकों को झकझोर कर रख दिया है। इन संस्थानों में बढ़ रहा मानसिक तनाव और शैक्षणिक दबाव अब एक राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बन गया है, जिस पर प्रशासन और सरकार को ठोस कदम उठाने की जरूरत महसूस हो रही है।
इसी बीच, देश के अलग-अलग कोनों से प्रेरणादायक और नई सोच वाली खबरें भी आ रही हैं। कश्मीर घाटी की कुछ युवा लड़कियों ने अपने रोल मॉडल के रूप में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को चुना है। यह बदलाव घाटी की युवा पीढ़ी की सोच में आ रहे सकारात्मक बदलाव को दिखाता है, जो राजनीति से ऊपर उठकर देश के नीति निर्माताओं और विद्वानों को अपना आदर्श मान रही हैं। यह घटनाक्रम सुरक्षा बलों और स्थानीय प्रशासन के लिए भी एक राहत भरी तस्वीर पेश करता है।
कच्चे तेल की कीमतों और महंगाई पर विपक्ष का हमला
आर्थिक मोर्चे पर भी सियासत गरमाई हुई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें गिरने के बावजूद आम जनता को इसका फायदा नहीं मिल रहा है। उनका कहना है कि सरकार इस गिरावट का पूरा मुनाफा खुद हड़प रही है और पेट्रोल-डीजल के दाम कम न करके आम आदमी की जेब पर लगातार बोझ डाल रही है। सरकार की आर्थिक नीतियों को लेकर विपक्ष लगातार महंगाई के मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाए हुए है।
जमीनी हकीकत यह है कि एक तरफ राजनीतिक दल अपनी-अपनी रोटियां सेकने में जुटे हैं, तो दूसरी तरफ आम नागरिक महंगाई, शिक्षा व्यवस्था की कमियों और रोजगार जैसे बुनियादी सवालों से जूझ रहा है। प्रधानमंत्री के 25 साल के नेतृत्व का जश्न जहां एक राजनीतिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है, वहीं देश के सामने खड़ी चुनौतियां भी कम नहीं हैं। आने वाले समय में देखना होगा कि सरकार इन गंभीर मुद्दों पर क्या रुख अपनाती है और विपक्ष किस तरह दबाव बनाता है।
भविष्य की राजनीतिक दिशा और जनता का रुख
देश की राजधानी से लेकर दूर-दराज के इलाकों तक हर जगह राजनीतिक हलचल तेज है। चुनाव आयोग के मामलों से लेकर आर्थिक नीतियों और युवाओं की मानसिक स्थिति तक, सभी मुद्दे आपस में जुड़े हुए हैं। द फ्रीलान्स की इस ग्राउंड रिपोर्ट में हमने पाया कि जनता अब केवल भाषणों और वादों से आगे बढ़कर ठोस परिणामों की उम्मीद कर रही है। जब तक बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं होता, तब तक राजनीतिक बयानबाजी के मायने आम आदमी के लिए सीमित ही रहेंगे।

