नई दिल्ली और देश के कई राज्यों से खाकी का एक नया और मजबूत चेहरा सामने आ रहा है। एक तरफ जहां खेल के मैदानों में पुलिस के जवानों ने देश भर में अपना परचम लहराया है, वहीं दूसरी तरफ मैदान से बाहर अपराधियों पर लगाम कसने के लिए ताबड़तोड़ छापे मारे जा रहे हैं। दिल्ली पुलिस के जांबाजों ने ऑल इंडिया पुलिस गेम्स में पहली बार भाग लेते हुए ही ओवरऑल विनिंग ट्रॉफी अपने नाम कर ली है। यह जीत इस बात का सबूत है कि हमारी पुलिस के जवान सिर्फ कानून व्यवस्था संभालने में ही नहीं, बल्कि खेलकूद की दुनिया में भी सबसे आगे हैं। इस प्रतियोगिता में विभिन्न राज्यों के पुलिस बलों ने हिस्सा लिया था, जहां कड़े मुकाबले के बाद दिल्ली पुलिस के खिलाड़ियों ने बाजी मारी।
खेल के मैदान में इस ऐतिहासिक जीत के साथ व्यक्तिगत स्पर्धाओं में भी पुलिस कर्मियों ने शानदार प्रदर्शन किया है। गुरुग्राम से मिली जानकारी के अनुसार, एथलीट प्रीति ने ऑल इंडिया पुलिस गेम्स में एक बार फिर से अपना जलवा बिखेरा है और तीसरा स्वर्ण पदक अपने नाम किया है। प्रीति की इस सफलता ने पूरे पुलिस विभाग का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। लगातार तीन बार स्वर्ण पदक जीतना कोई आसान काम नहीं है। इसके लिए कड़ी मेहनत और पसीना बहाना पड़ता है। प्रीति की यह जीत उन सभी युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है जो खेल और देश सेवा दोनों में अपना करियर बनाना चाहते हैं। मैदान पर पसीना बहाने वाले ये सिपाही जब अपराधियों से मुकाबला करते हैं, तो वहां भी उनका तेवर देखने लायक होता है।
ऑपरेशन ऑल आउट से अपराधियों में मचा हड़कंप
खेल के मैदान की इन खुशियों के बीच देश के कई हिस्सों में कानून का डंडा पूरी सख्ती के साथ चल रहा है। झारखंड के पाकुड़ जिले में पुलिस ने 'ऑपरेशन ऑल आउट' के तहत एक बहुत बड़ा एक्शन लिया है। यहाँ पुलिस ने सिर्फ एक ही दिन के भीतर 152 वारंटों का निष्पादन किया है। इतने बड़े पैमाने पर वारंटों का पूरा होना यह बताता है कि पुलिस अब अपराधियों को जरा भी ढील देने के मूड में नहीं है। अदालत से भगोड़े घोषित किए गए और लंबे समय से छुपकर बैठे वारंटियों के घरों पर पुलिस ने एक साथ दबिश दी। इस अचानक हुई कार्रवाई से अपराधियों और गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल लोगों के बीच भारी हड़कंप मच गया है।
पाकुड़ की तरह ही उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में भी 'आपरेशन आल आउट' को बहुत आक्रामक तरीके से लागू किया गया है। सोनभद्र पुलिस का साफ कहना है कि इस विशेष अभियान का मकसद जिले में सक्रिय अपराधियों की कमर तोड़ना है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ऐसे अभियानों से बदमाशों के मन में कानून का डर पैदा होता है। थाने की पुलिस टीमों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने इलाकों में सक्रिय अपराधियों की सूची तैयार करें और उन पर लगातार नजर रखें। पुलिस की इस सक्रियता से आम जनता के मन में सुरक्षा की भावना मजबूत हो रही है और उन्हें लग रहा है कि कानून तोड़ने वालों को अब आसानी से बख्शा नहीं जाएगा।
ऑनलाइन गेमिंग और सट्टे के खिलाफ डिजिटल स्ट्राइक
अपराध का दायरा अब सिर्फ गलियों और मोहल्लों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इंटरनेट की दुनिया तक फैल चुका है। इसका एक बड़ा उदाहरण हाल ही में हाथरस और उज्जैन के बीच देखने को मिला है। ऑनलाइन गेम और सट्टेबाजी के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। इस मामले में उज्जैन पुलिस ने उत्तर प्रदेश के हाथरस से एक युवती को हिरासत में लिया है। आरोपी युवती ऑनलाइन ठगी के इस बड़े नेटवर्क से जुड़ी हुई थी और लगातार अपनी लोकेशन बदल रही थी। पुलिस की साइबर सेल ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर इस जालसाजी की परतें खोलीं और आखिरकार आरोपी तक पहुँचने में कामयाब रही।
आज के समय में ऑनलाइन धोखाधड़ी देश भर के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बन गई है। भोले-भाले लोगों को ऊंचे मुनाफे का लालच देकर उनके बैंक खाते खाली किए जा रहे हैं। उज्जैन और हाथरस पुलिस की यह संयुक्त कार्रवाई इस बात का संकेत है कि साइबर अपराधियों का जाल कितना भी फैला हो, कानून के हाथ उन तक पहुँच ही जाएंगे। पुलिस विभाग अब तकनीकी रूप से ज्यादा मजबूत हो रहा है और साइबर सेल की टीमें दिन-रात ऐसे जालसाजों की तलाश में जुटी रहती हैं। आम जनता को भी यह समझना होगा कि बिना सोचे-समझे किसी भी ऑनलाइन गेम या लुभावने ऑफर के चक्कर में न आएं, वरना उनकी गाढ़ी कमाई पल भर में डूब सकती है।
द फ्रीलान्स की अंतिम ग्राउंड पड़ताल
इन तमाम खबरों को एक साथ रखकर देखने पर यह साफ हो जाता है कि पुलिस विभाग इस समय दो मोर्चों पर एक साथ काम कर रहा है। एक तरफ खेलों के जरिए अपनी फिटनेस और अनुशासन का प्रदर्शन किया जा रहा है, तो दूसरी तरफ अपराधियों के खिलाफ ज़मीनी और डिजिटल दोनों स्तरों पर कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। चाहे वह दिल्ली पुलिस और प्रीति की खेल के मैदान पर मिली ऐतिहासिक सफलता हो, या फिर पाकुड़ और सोनभद्र में चलाया गया 'ऑपरेशन ऑल आउट', हर जगह खाकी का एक नया और जिम्मेदार रूप देखने को मिल रहा है। 'द फ्रीलान्स' की इस ग्राउंड रिपोर्ट से यह निष्कर्ष निकलता है कि जब तक पुलिस विभाग इसी मुस्तैदी और जोश के साथ काम करता रहेगा, तब तक अपराधियों के लिए बचना बहुत मुश्किल होगा।









