नई दिल्ली से ग्राउंड रिपोर्ट — राजधानी दिल्ली में राजनीतिक पारा इन दिनों सातवें आसमान पर है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी नेत्री प्रियंका गांधी वाड्रा के नेतृत्व में चल रहा विरोध प्रदर्शन आज तीसरे दिन भी पूरी ताकत के साथ जारी रहा। दिल्ली के कनॉट प्लेस इलाके में लंच के बाद शुरू हुआ यह प्रदर्शन अब सीधे तौर पर राजघाट स्थित गांधी स्मारक तक पहुंच चुका है, जहां कांग्रेसी नेता धरने पर बैठ गए हैं। इस पूरे आंदोलन की धुरी चुनाव आयोग और सरकार की कार्यप्रणाली के खिलाफ बनाई गई है, जिससे सियासी गलियारों में भूचाल आ गया है।
सड़क पर उतरे हजारों कांग्रेस कार्यकर्ताओं और विपक्षी नेताओं को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने बेहद तीखे तेवर दिखाए। उन्होंने सीधे तौर पर देश के शीर्ष नेतृत्व और प्रशासनिक प्रमुखों को कटघरे में खड़ा कर दिया। राहुल गांधी ने मंच से खुलेआम कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत और चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने एक सोची-समझी साजिश के तहत इस देश के लोकतांत्रिक ढांचे को हाईजैक कर लिया है। उनकी इस सीधी चेतावनी के बाद देश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है और विपक्षी दल पूरी ताकत से सड़कों पर उतर आए हैं।
सड़कों पर उतरा विपक्ष और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा
इस पूरे विरोध प्रदर्शन का मुख्य केंद्र चुनाव आयोग के कामकाज और ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाना रहा है। कांग्रेस पार्टी का आरोप है कि संवैधानिक संस्थाओं का इस्तेमाल करके देश के लोकतंत्र और चुनावी प्रक्रिया को कमजोर किया जा रहा है। पिछले तीन दिनों से चल रहे इस धरने में उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली समेत कई राज्यों के वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सुनवाई नहीं होती और निष्पक्षता बहाल नहीं की जाती, तब तक उनका यह आंदोलन इसी तरह लगातार आगे बढ़ता रहेगा।
राहुल गांधी ने अपने तीखे भाषण में आगे कहा कि अब देश का कोई भी नागरिक चुप नहीं बैठेगा और इस तानाशाही रवैये के खिलाफ हर गली-मोहल्ले में आवाज उठाई जाएगी। उन्होंने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि मोदी, शाह, भागवत और ज्ञानेश कुमार की इस तिकड़ी और चौगुनी सांठगांठ को देश की जनता अब और बर्दाश्त नहीं करेगी। कांग्रेस नेताओं का यह जत्था जैसे ही कनॉट प्लेस से आगे बढ़ा, पुलिस और सुरक्षा बलों को भी भारी संख्या में तैनात करना पड़ा ताकि कानून व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में बनी रहे।
भारतीय जनता पार्टी का तीखा पलटवार और अराजकता का आरोप
दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पार्टी के इन बयानों और3 दिनों से चल रहे इस प्रदर्शन पर तीखा पलटवार किया है। सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि वे विरोध प्रदर्शन की आड़ में देश में गुंडागर्दी और अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा का कहना है कि जब से चुनाव परिणाम और चुनावी सुधारों पर देश आगे बढ़ा है, तब से कांग्रेस पार्टी अपनी हार से बौखला गई है और संवैधानिक संस्थाओं पर दबाव बनाने के लिए ऐसे हथकंडे अपना रही है।
स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग ने भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके। गांधी स्मारक के आसपास धारा और अन्य सुरक्षा नियमों के तहत भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच कई बार हल्की झड़पें भी देखने को मिलीं, जब कार्यकर्ताओं ने बेरिकेड्स तोड़ने की कोशिश की। हालांकि, नेताओं की सूझबूझ से स्थिति को किसी तरह संभाला गया, लेकिन तनाव का यह माहौल अभी भी ज्यों का त्यों बना हुआ है।
भविष्य की राजनीतिक रणनीति और देशव्यापी आंदोलन के संकेत
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को यहीं थामने के मूड में बिल्कुल नहीं है। आने वाले दिनों में इस आंदोलन को देश के अन्य बड़े शहरों तक ले जाने की पूरी तैयारी चल रही है। विपक्षी एकता को मजबूत करने के लिए राहुल गांधी लगातार दूसरे दलों के संपर्क में भी हैं। ज्ञानेश कुमार के खिलाफ खोला गया यह मोर्चा अब केवल एक प्रशासनिक नाराजगी नहीं, बल्कि सीधे तौर पर आगामी चुनावों से पहले की एक बड़ी राजनीतिक जंग का रूप ले चुका है, जिस पर देश भर के राजनीतिक विश्लेषकों की पैनी नजर टिकी हुई है।






