नई दिल्ली में कल रात का राजनीतिक पारा उस समय और चढ़ गया जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को पुलिस ने हिरासत से रिहा कर दिया। चुनाव आयोग के खिलाफ इंडिया गठबंधन लगातार दूसरे दिन विरोध प्रदर्शन कर रहा था। इस दौरान पुलिस ने भारी सख्ती दिखाते हुए कई बड़े नेताओं को हिरासत में ले लिया था। रिहाई के तुरंत बाद राहुल गांधी ने तेवर साफ कर दिए और मीडिया के सामने सरकार व चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि वे लोग चाहे जितनी कोशिश कर लें, लेकिन हमारी आवाज को दबा नहीं सकते।
हिरासत से बाहर आते ही राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का नाम लेते हुए बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि इन सभी को आने वाले समय में देश के कटघरे में खड़ा किया जाएगा। राहुल गांधी ने अपनी बात रखते हुए कहा कि पुलिस प्रशासन ने हमारा शांतिपूर्ण मार्च रोकने की कोशिश की, लेकिन वे हमारे हौसले को नहीं तोड़ सके। कांग्रेस पार्टी का आरोप है कि चुनाव आयोग निष्पक्षता से काम नहीं कर रहा है और सरकार के इशारों पर विपक्ष की आवाज को कुचलने का प्रयास किया जा रहा है।
नौ घंटे की लंबी रणनीति और पुलिस की भारी सख्ती
इस पूरे घटनाक्रम के पीछे राहुल गांधी की नौ घंटे की एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति साफ नजर आ रही थी। कल सुबह से ही दिल्ली की सड़कों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ता और इंडिया गठबंधन के अन्य दलों के नेता चुनाव आयोग के दफ्तर की तरफ मार्च निकाल रहे थे। पुलिस ने सुरक्षा का हवाला देते हुए रास्ते में ही बैरिकेडिंग कर दी और नेताओं को आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद विरोध प्रदर्शन कर रहे नेताओं को हिरासत में लेकर नजदीकी थाने ले जाया गया, जहां करीब नौ घंटे तक गहमागहमी का माहौल बना रहा।
पुलिस की इस सख्त कार्रवाई के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई। विपक्षी दलों ने इसे लोकतंत्र का गला घोटना करार दिया। राहुल गांधी ने हिरासत के दौरान भी साफ कर दिया था कि वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा नहीं देते, तब तक उनका विरोध प्रदर्शन किसी भी कीमत पर जारी रहेगा। राहुल गांधी का यह कड़ा रुख बताता है कि आने वाले दिनों में संसद से लेकर सड़क तक सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और ज्यादा बढ़ने वाला है।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर अड़ा इंडिया गठबंधन
इंडिया गठबंधन के तमाम बड़े नेताओं ने एक सुर में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। गठबंधन का साफ कहना है कि चुनाव आयोग स्वतंत्र संस्था की तरह काम करने में पूरी तरह नाकाम रहा है। यही वजह है कि अब राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेता सीधे तौर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। नेताओं का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदार्शिता खत्म हो चुकी है और संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग किया जा रहा है। इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस के अलावा समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी और अन्य क्षेत्रीय दलों के कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में शामिल हुए।
स्थानीय स्तर पर इस प्रदर्शन के कारण दिल्ली के कई प्रमुख मार्गों पर लंबा जाम लग गया और आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। ट्रैफिक पुलिस ने लोगों को वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करने की सलाह दी थी। इसके बावजूद राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं का जोश कम नहीं हुआ। पुलिस और सुरक्षा बलों के भारी पहरे के बीच भी नेताओं ने जमकर नारेबाजी की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विरोध प्रदर्शन आने वाले चुनावी राज्यों में एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनने जा रहा है, जिससे दोनों तरफ से जुबानी जंग और तेज होगी।
भविष्य की राजनीतिक रणनीति और द फ्रीलान्स की पड़ताल
द फ्रीलान्स की जमीनी पड़ताल बताती है कि कांग्रेस पार्टी अब इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर आक्रामक तरीके से उठाने की तैयारी कर रही है। राहुल गांधी के बयानों से यह साफ हो गया है कि वे इस मामले को यहीं छोड़ने वाले नहीं हैं। आने वाले दिनों में विपक्ष देश के अलग-अलग हिस्सों में रैलियां निकालकर चुनाव आयोग और सरकार के खिलाफ माहौल तैयार करेगा। वहीं दूसरी ओर, सत्ताधारी दल ने भी विपक्ष के इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए इन्हें केवल राजनीतिक नौटंकी करार दिया है।
कुल मिलाकर, राहुल गांधी की रिहाई के बाद का यह घटनाक्रम भारतीय राजनीति में एक नए और तीखे संघर्ष का संकेत दे रहा है। एक तरफ जहां सरकार और चुनाव आयोग अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों का हवाला दे रहे हैं, वहीं विपक्ष सड़क पर उतरकर आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर चुका है। आने वाला समय बताएगा कि यह राजनीतिक टकराव कौन सा नया मोड़ लेता है और जनता इस पूरे मामले पर क्या रुख अपनाती है।


