नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा फेरबदल देखने को मिल रहा है। राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए खुलाسه सामने आ रहे हैं। इस बार चुनाव आयोग की स्क्रूटनी के दौरान दो उम्मीदवारों के नामांकन खारिज कर दिए गए हैं। इस अचानक हुए घटनाक्रम से राजनीतिक दलों में हड़कंप मच गया है। दोनों उम्मीदवारों के पर्चे रद्द होने से मुकाबला अब पूरी तरह से नए मोड़ पर आ गया है। ग्राउंड जीरो पर मौजूद हमारे संवाददाताओं के मुताबिक इस फैसले से कई बड़े नेताओं के समीकरण बिगड़ गए हैं।
नामांकन खारिज होने की इस खबर के सामने आते ही संबंधित दलों के दफ्तरों में बैठकों का दौर शुरू हो गया है। जानकारों का कहना है कि यह कानूनी और तकनीकी कमियों के कारण हुआ है। चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक हर दस्तावेज का सही होना बेहद जरूरी होता है। जरा सी चूक बड़े नुकसान का कारण बन जाती है। इस बार भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला है जहां मामूली गलतियों की वजह से दो नेताओं का सपना फिलहाल टूट गया है। समर्थकों में निराशा का माहौल है और विरोधी दल इस पर अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने में जुट गए हैं.
उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में टिकट वितरण पर घमासान
दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश से अपने आठ उम्मीदवारों की नई सूची जारी कर सबको चौंका दिया है। इस नई सूची के सामने आने के बाद दिल्ली से लेकर लखनऊ तक चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। पार्टी ने कई बड़े और पुराने चेहरों को इस बार चुनावी मैदान से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। केंद्रीय मंत्रियों और कई वरिष्ठ नेताओं के नाम इस बार सूची से गायब हैं। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि पार्टी अब नए और युवा चेहरों को मौका देना चाहती है। इस बदलाव से पार्टी के भीतर भी अंदरखाने सुगबुगाहट शुरू हो गई है।
सामने आ रही रिपोर्टों के मुताबिक इस बार कई दिग्गज नेताओं को राज्यसभा का टिकट नहीं मिला है। इसमें कुछ ऐसे नाम भी शामिल हैं जो पिछले कई सालों से सरकार और संगठन में अहम भूमिका निभा रहे थे। अचानक हुए इस फैसले से साफ जाहिर होता है कि पार्टी हाईकमान ने आगामी चुनावों और रणनीतिक संतुलन को ध्यान में रखकर यह कदम उठाया है। क्षेत्रीय संतुलन और जातिगत समीकरणों को साधने के लिए नए नामों पर मुहर लगाई गई है। जिन नेताओं के नाम कटे हैं, वे अब अपनी अगली रणनीति पर विचार कर रहे हैं।
गणित और आंकड़ों का खेल, किसे मिलेगा फायदा
राज्यसभा चुनाव के मौजूदा गणित को समझें तो हर एक वोट की कीमत बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। दो नामांकन खारिज होने के बाद अब कुल वैध उम्मीदवारों की संख्या कम हो गई है। इसका सीधा असर जीत के आंकड़े पर पड़ेगा। विश्लेषकों का मानना है कि इससे कई उम्मीदवारों के लिए जीत की राह आसान हो सकती है। राजनीतिक दल अब अपनी पूरी ताकत जोड़तोड़ और समीकरण बिठाने में लगा रहे हैं। हर पार्टी यह सुनिश्चित करना चाहती है कि उसके अधिक से अधिक उम्मीदवार संसद के उच्च सदन तक पहुंच सकें।
जमीनी स्तर पर स्थिति यह है कि विधायकों और नेताओं की बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्षी दल सत्ता पक्ष पर निशाना साध रहे हैं तो वहीं शासक दल अपने फैसलों को पूरी तरह सही ठहरा रहा है। आने वाले दिनों में यह चुनावी सरगर्मी और ज्यादा बढ़ने वाली है। हमारे फील्ड रिपोर्टर लगातार इस पर नजर बनाए हुए हैं कि आगे कौन सा नया मोड़ आता है। क्या कुछ और राजनीतिक उलटफेर देखने को मिलेंगे, इसका जवाब आने वाले कुछ घंटों में मिल जाएगा।
प्रशासनिक तैयारियां और आगे की टाइमलाइन
चुनाव आयोग ने साफ कर दिया है कि पूरी प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ाई जाएगी। किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। नामांकन पत्रों की जांच का काम पूरा होने के बाद अब नाम वापसी और अंतिम सूची का इंतजार किया जा रहा है। प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। सभी की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि बाकी बचे उम्मीदवार किस प्रकार अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए रणनीति बनाते हैं। द फ्रीलान्स की टीम इस पूरी प्रक्रिया पर अपनी पैनी नजर रखे हुए है और हर अपडेट आप तक सबसे पहले पहुंचाती रहेगी।




