तेलुगु सिनेमा के गलियारों में इस वक्त फिल्म 'रणबाली' को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। आजतक और अन्य मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना की यह फिल्म सिनेमाघरों में पहुंच चुकी है। फिल्म का पहला शो खत्म होने के बाद सोशल मीडिया और सिनेमाघरों के बाहर जनता की मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आ रही है। कई दर्शकों ने खुलकर अपनी नाराजगी जताई है और फिल्म की कहानी को काफी भारी-भरकम बताया है।
दर्शकों के बीच इस फिल्म को लेकर मिली प्रतिक्रिया बहुत उत्साहजनक नहीं कही जा सकती है। इंटरनेट पर आए पब्लिक रिव्यू में कुछ लोगों ने यहाँ तक कह दिया है कि फिल्म देखना किसी मानसिक प्रताड़ना जैसा अनुभव है। हालांकि रश्मिका मंदाना के काम और स्क्रीन प्रेजेंस की तारीफ भी हो रही है, लेकिन कुल मिलाकर फिल्म की लंबाई और सुस्त पटकथा ने दर्शकों का उत्साह कम कर दिया है।
हॉलीवुड कलाकारों की एंट्री पर भी उठे सवाल
इस फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी इसके अंतरराष्ट्रीय कलाकार रहे हैं। द मम्मी फेम हॉलीवुड अभिनेता अर्नोल्ड वोस्लो ने इस फिल्म के जरिए भारतीय सिनेमा में अपना डेब्यू किया है। फिल्म में वह एक खतरनाक विलेन की भूमिका में नजर आ रहे हैं। उनके अलावा क्रूर ब्रिटिश अफसर का किरदार निभाने वाले अभिनेता बेनेडिक्ट गैरेट ने भी अपने अनुभव को साझा करते हुए इसे काफी मुश्किल और ट्रॉमा जैसा बताया है।
कलाकारों की इतनी भारी-भरकम फौज और विदेशी कलाकारों की मौजूदगी के बावजूद स्क्रीन पर वह जादू नहीं चल पाया जिसकी उम्मीद की जा रही थी। तेलुगु360 जैसी मीडिया वेबसाइट्स की समीक्षा में भी यह बात सामने आई है कि फिल्म की कहानी तो मजबूत है, लेकिन निर्देशक ने इसे बहुत ही सुस्त रफ्तार से पर्दे पर उतारा है। आज के दौर के दर्शक तेज रफ्तार और कसा हुआ ड्रामा पसंद करते हैं, जहाँ यह फिल्म थोड़ी पिछड़ती हुई दिखाई दे रही है।
बॉक्स ऑफिस पर लंबी रेस की चुनौती
फिल्म की एडवांस बुकिंग और शुरुआती आंकड़े बताते हैं कि शुरुआती क्रेज के बाद अब माउथ पब्लिसिटी ही इसका भविष्य तय करेगी। यदि दर्शक लगातार सुस्त रफ्तार और भारी कहानी की शिकायत करते रहे, तो आने वाले दिनों में बॉक्स ऑफिस पर टिके रहना निर्माताओं के लिए मुश्किल हो सकता है। विजय देवरकोंडा के फैंस को अपनी पसंदीदा जोड़ी से बहुत उम्मीदें थीं, लेकिन क्रिटिक्स के मिले-जुले रिव्यूज ने रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है।
जमीनी स्तर पर हमारी पड़ताल बताती है कि फिल्म के गाने और कुछ एक्शन दृश्य ठीक-ठाक हैं, लेकिन तीन घंटे के करीब की लंबाई दर्शकों का धैर्य परीक्षण कर रही है। फिल्म से जुड़े कलाकारों और निर्माताओं के लिए यह हफ्ता बहुत अहम रहने वाला है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सप्ताहांत के दौरान आम दर्शक इस फिल्म को देखने सिनेमाघरों का रुख करते हैं या नहीं।
फिल्म की कमियां और मेकर्स के लिए अगला कदम
फिल्म के निर्देशक और संपादन टीम से यह चूक हुई है कि उन्होंने कहानी को बहुत खींच दिया है। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर बनी फिल्मों में कसावट होना बहुत जरूरी होता है, अन्यथा दर्शक ऊबने लगते हैं। बेनेडिक्ट गैरेट जैसे मंजे हुए कलाकार के होने के बावजूद ब्रिटिश अफसर वाले दृश्यों को और ज्यादा धारदार बनाया जा सकता था।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, अभी भी कुछ दर्शक विजय देवरकोंडा के स्टारडम के दम पर थिएटर पहुँच रहे हैं। आने वाले दिनों में अगर फिल्म की रफ्तार को थोड़ा छांटकर छोटा किया जाता है, तो शायद दर्शकों का नजरिया कुछ बदल सके। फिलहाल स्थिति यह है कि 'रणबाली' अपनी भारी-भरकम उम्मीदों के बोझ तले थोड़ी दबा हुआ महसूस हो रही है।



