असम के सिलचर में हाल ही में हुए निकाय चुनाव के नतीजे सामने आ चुके हैं। चुनाव परिणामों ने देश की राजनीति में एक बार फिर से नई बहस को जन्म दे दिया है। विपक्षी दल अक्सर चुनावों में हार के बाद इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम की पारदर्शिता पर सवाल उठाते रहे हैं। लेकिन इस बार सिलचर निकाय चुनाव में मतदान ईवीएम की बजाय पारंपरिक बैलेट पेपर यानी मतपत्रों के जरिए कराया गया था। इसके बावजूद कांग्रेस पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा है और उसके हिस्से में मात्र दो सीटें ही आईं।
मतपत्रों से हुए इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया है। भाजपा ने कुल 32 सीटों पर जीत हासिल करते हुए स्थानीय निकाय पर अपना कब्जा मजबूत कर लिया है। चुनाव के नतीजे आने के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है। कांग्रेस पार्टी और उसके समर्थक लंबे समय से यह दलील देते आए हैं कि अगर चुनाव बैलेट पेपर से हों तो नतीजे बिल्कुल अलग होंगे। लेकिन सिलचर के इन परिणामों ने विपक्षी दलों के इस दावे को बड़ा झटका दिया है।
असम के मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर साधा निशाना
चुनाव परिणामों के पूरी तरह साफ होने के बाद राज्य के मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला बोला है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब तो साफ हो गया है कि कांग्रेस पार्टी बैलेट पेपर से होने वाले चुनाव में भी हार जाती है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब देश के अलग-अलग हिस्सों में विपक्षी दल लगातार चुनाव प्रक्रिया और वोटिंग मशीनों पर सवाल खड़े करते रहे हैं। मुख्यमंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि हार की आदत पड़ चुकी पार्टी अब अपनी कमजोरियों को छिपाने के लिए मशीन या प्रक्रिया पर ठीकरा फोड़ती है।
स्थानीय निकाय चुनाव के इन आंकड़ों ने साफ कर दिया है कि मैदानी स्तर पर जनता का रुझ किस तरफ है। कांग्रेस पार्टी के लिए यह परिणाम आत्ममंथन का विषय बन गया है क्योंकि पारंपरिक तरीके से हुए मतदान में भी जनता का समर्थन उन्हें नहीं मिल पाया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केवल वोटिंग के तरीकों को बदलने से राजनीतिक दलों की जमीन मजबूत नहीं होती। इसके लिए संगठन की मजबूती और जनता के बीच जमीनी पकड़ होना सबसे ज्यादा जरूरी है जो फिलहाल इस चुनाव में कांग्रेस के पास नजर नहीं आई।
स्थानीय निकाय चुनाव में जनता का बड़ा जनादेश
सिलचर के इन चुनावों में कुल 34 सीटों पर मुकाबला था। इनमें से भाजपा ने भारी बहुमत के साथ 32 सीटों पर जीत दर्ज की है। वहीं दूसरी तरफ मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस सिर्फ दो सीटों पर सिमट कर रह गई। चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुई थी और जिला प्रशासन ने मतदान से लेकर मतगणना तक सभी इंतजाम कड़ाई से किए थे। किसी भी पक्ष की तरफ से धांधली या गड़बड़ी की कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई जिससे इन नतीजों की वैधता पर कोई सवाल नहीं उठता।
नतीजे आने के बाद विजेता उम्मीदवारों और उनके समर्थकों में भारी जश्न का माहौल देखा गया। भाजपा कार्यकर्ताओं ने सिलचर की सड़कों पर उतरकर जीत का जश्न मनाया और एक-दूसरे को मिठाइयां बांटी। पार्टी नेताओं ने इसे प्रधानमंत्री की नीतियों और राज्य सरकार के विकास कार्यों की जीत बताया है। उनका कहना है कि जनता ने जाति और मजदूरी की राजनीति से ऊपर उठकर विकास के रास्ते को चुना है और इसी का नतीजा है कि पार्टी को इतनी बड़ी सफलता मिली है।
विपक्ष की रणनीति और आगे की चुनौतियां
इस बड़ी हार के बाद कांग्रेस पार्टी के भीतर भी मंथन शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है। पार्टी के स्थानीय नेताओं के सामने यह साबित करने की चुनौती है कि उनका संगठन जमीन पर कितना सक्रिय है। बार-बार चुनावी हार का सामना कर रही पार्टी के लिए यह एक और बड़ा सबक है। विश्लेषकों का मानना है कि ईवीएम विवाद से ध्यान हटाकर पार्टी को अब अपने आंतरिक मुद्दों और जनहित के वास्तविक मामलों पर ध्यान देना होगा, तभी जाकर चुनावी मैदान में स्थिति सुधर सकती है।




