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सिलचर निकाय चुनाव में बैलेट पेपर पर भी कांग्रेस को करारी हार, बीजेपी ने 32 सीटों पर दर्ज की बड़ी जीत

असम के सिलचर निकाय चुनाव के परिणाम सामने आ चुके हैं। खास बात यह है कि यह पूरा चुनाव इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम के बजाय पारंपरिक बैलेट पेपर से कराया गया था। इसके बावजूद कांग्रेस पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा है और वह केवल दो सीटों पर सिमट गई है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 32 सीटों पर कब्जा जमा लिया है। इस परिणाम के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है।
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नेशनल डेस्क, द फ्रीलांस
राष्ट्रीय संपादकीय ब्यूरो•7 अक्टूबर 2026 • अपडेटेड•47
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सिलचर निकाय चुनाव में बैलेट पेपर पर भी कांग्रेस को करारी हार, बीजेपी ने 32 सीटों पर दर्ज की बड़ी जीत
📷 सिलचर निकाय चुनाव में बैलेट पेपर पर भी कांग्रेस को करारी हार, बीजेपी ने 32 सीटों पर दर्ज की बड़ी जीत — मुख्य घटनाक्रमफोटो साभार: रॉयटर्स / एजेंसीज़ / सोशल मीडिया

खबर की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • असम के सिलचर निकाय चुनाव के परिणाम सामने आ चुके हैं। खास बात यह है कि यह पूरा चुनाव इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम के बजाय पारंपरिक बैलेट पेपर से कराया गया था। इसके बावजूद कांग्रेस पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा है और वह केवल दो सीटों पर सिमट गई है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 32 सीटों पर कब्जा जमा लिया है। इस परिणाम के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है।
  • इस खबर से जुड़े सभी पहलुओं की जांच और निगरानी संबंधित विभागों द्वारा की जा रही है।
  • विशेषज्ञों के अनुसार इस घटनाक्रम का आम जनता पर सीधा असर पड़ सकता है।

सिलचर निकाय चुनाव के परिणाम ने देश की राजनीति में एक बार फिर से नई बहस छेड़ दी है। असम के इस नगर निकाय चुनाव में वोटिंग पारंपरिक बैलेट पेपर के जरिए कराई गई थी। लंबे समय से विपक्षी दल चुनाव प्रक्रिया में ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते रहे हैं। कांग्रेस पार्टी समेत कई दल लगातार यह मांग करते रहे हैं कि देश में चुनाव बैलेट पेपर से ही होने चाहिए। लेकिन सिलचर के इन परिणामों ने कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं क्योंकि बैलेट पेपर पर चुनाव होने के बावजूद पार्टी को केवल दो सीटों से संतोष करना पड़ा है।

मतगणना के शुरुआती रुझानों के साथ ही तस्वीर साफ होने लगी थी कि स्थानीय निकाय चुनावों में जनता का रुख किस ओर है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी ने इस चुनाव में जबरदस्त प्रदर्शन किया है। बीजेपी और उसके सहयोगियों ने कुल 32 सीटों पर शानदार जीत हासिल की है। इस बड़ी जीत के साथ ही स्थानीय निकाय बोर्ड पर पार्टी का कब्जा पूरी तरह तय हो गया है। दूसरी तरफ, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस पार्टी दो सीटों पर ही सिमटकर रह गई, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं में मायूसी छा गई है।

बैलेट पेपर पर हार के बाद असम सीएम का तीखा हमला

चुनाव परिणामों के पूरी तरह सामने आने के बाद राज्य के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कांग्रेस पार्टी पर जोरदार राजनीतिक हमला बोला है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया और प्रेस के सामने कहा कि कांग्रेस पार्टी हर चुनाव में अपनी हार का ठीकरा ईवीएम पर फोड़ती रही है। उनका यह तर्क हमेशा से बेबुनियाद रहा है कि ईवीएम में गड़बड़ी की वजह से वे चुनाव हारते हैं। सिलचर में बैलेट पेपर से चुनाव कराने के बाद भी जनता ने कांग्रेस को नकार दिया है और यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि जनता उनकी नीतियों के साथ नहीं है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह परिणाम कांग्रेस पार्टी के लिए एक बड़ा आत्ममंथन करने का विषय है। पिछले कुछ वर्षों से लगातार मिल रही हार के बाद पार्टी यह मानकर चल रही थी कि शायद मतदान के तरीके बदलने से चुनावी नतीजे उनके पक्ष में आ सकते हैं। लेकिन असम के इस निकाय चुनाव ने यह साबित कर दिया है कि केवल मतदान का तरीका बदलने से राजनीतिक जमीन मजबूत नहीं होती। इसके लिए मजबूत संगठन, जनसमर्थन और जमीनी स्तर पर जनता से जुड़ाव होना सबसे ज्यादा जरूरी होता है जो फिलहाल कांग्रेस के पास कम नजर आ रहा है।

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स्थानीय निकाय चुनावों में एनडीए की पकड़ मजबूत

असम के इस स्थानीय निकाय चुनाव के नतीजे सिर्फ एक जीत या हार नहीं हैं बल्कि यह राज्य की राजनीति की एक बड़ी तस्वीर पेश करते हैं। पूर्वोत्तर के राज्यों में पिछले कुछ सालों में बीजेपी और एनडीए गठबंधन ने अपनी पकड़ बेहद मजबूत की है। शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में लगातार मिल रही सफलता यह दिखाती है कि आम जनता का भरोसा मौजूदा विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं पर बना हुआ है। स्थानीय स्तर पर बुनियादी सुविधाओं और प्रशासन की कार्यशैली को लेकर जनता ने अपना फैसला मुहरबंद कर दिया है।

दूसरी ओर, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सामने अब अपनी रणनीतियों को नए सिरे से तय करने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। बैलेट पेपर के इस चुनाव ने विपक्ष के उस मुख्य बहाने को कमजोर कर दिया है जिसे वे हर हार के बाद इस्तेमाल करते थे। अब राजनीतिक दलों को यह समझ आ गया है कि चुनाव ईवीएम से हो या कागज की पर्ची से, जीत उसी को मिलेगी जो जनता का दिल जीतने में कामयाब होगी। द फ्रीलान्स की टीम इस मामले से जुड़े अन्य स्थानीय घटनाक्रमों और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं पर लगातार नजर बनाए हुए है।

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