नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की राजधानी दिल्ली के दिल कनॉट प्लेस इलाके में चल रहे सीजेपी प्रदर्शन ने इन दिनों प्रशासनिक और न्यायिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। सड़क पर चल रहे इस प्रदर्शन के बीच अब सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद दिलचस्प और तीखी टिप्पणी की है। अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि इस देश में हर कोई अपने हिसाब से काम करना चाहता है। कोई सड़क पर आंदोलन करना चाहता है तो कोई वहां मूंगफली बेचना चाहता है। इस तंज के बाद राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था और प्रदर्शनकारियों के अधिकारों को लेकर एक बार फिर नई बहस छिड़ गई है। ग्राउंड जीरो पर हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं और पुलिस बल को भारी संख्या में तैनात किया गया है।
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा असर स्थानीय व्यापार और दुकानदारों पर पड़ रहा है। कनॉट प्लेस के व्यापारियों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक बड़ा पत्र लिखा है। व्यापारियों का साफ कहना है कि इस तरह के धरने और प्रदर्शनों की वजह से उनके कारोबार की कमर टूट चुकी है। उनका दावा है कि प्रदर्शन के चलते केवल एक दिन में दो हजार करोड़ रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ा है। देश के सबसे बड़े व्यावसायिक केंद्रों में शुमार इस इलाके के दुकानदारों का कहना है कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो वे पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगे। उन्होंने गृह मंत्री से तुरंत दखल देने और बाजार में कामकाज सामान्य कराने की बड़ी मांग की है।
न्यायिक मामलों पर तीखी बहस और अदालती स्पष्टीकरण
इस बीच देश की अदालतों में अन्य महत्वपूर्ण मामलों पर भी सुनवाई जोरों पर है। हाल ही में शिव सेना नेता संजय राउत द्वारा मुख्य न्यायाधीश के साथ राहुल गांधी की मुलाकात न होने पर दिए गए बयान ने सियासी पारा चढ़ा दिया था। राउत के उस तीखे बयान पर अब सुप्रीम कोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई है। अदालत ने उनके आचरण और बयानों पर साफ तौर पर स्पष्टीकरण मांगा है। न्यायपालिका और राजनीतिक बयानों के बीच चल रही इस खींचतान ने कानूनी जानकारों को भी चिंता में डाल दिया है। अदालत का मानना है कि न्यायिक प्रक्रिया पर इस तरह के राजनीतिक दबाव या बयानबाजी से बचना बेहद जरूरी है।
दूसरी तरफ, देश की विभिन्न अदालतों से आ रहे फैसलों पर भी आम जनता की पैनी नजर बनी हुई है। पटना हाई कोर्ट के एक पुराने फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कड़ी असहमति जताई है। पटना हाई कोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा था कि महिला का सलवार खोलना और उसके साथ गलत हरकत करना दुष्कर्म का प्रयास नहीं बल्कि सिर्फ लज्जा भंग का अपराध है। सुप्रीम कोर्ट ने इस अजीबोगरीब तर्क पर गहरी नाराजगी जताई है और कानूनी परिभाषाओं की नए सिरे से समीक्षा की बात कही है। महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े ऐसे संवेदनशील मामलों में अदालतों के अलग-अलग रुख समाज में बड़ी चर्चा का विषय बन गए हैं।
व्यापारियों की पीड़ा और पुलिस प्रशासन की रणनीति
कनॉट प्लेस के व्यापारियों की यह पीड़ा केवल एक दिन के नुकसान तक सीमित नहीं है। दुकानदारों का कहना है कि वीकेंड पर होने वाली भारी बिक्री इस प्रदर्शन की भेंट चढ़ गई। बाहर से आने वाले ग्राहक सुरक्षा बैरिकेडिंग और जाम की वजह से बाजार का रुख नहीं कर पा रहे हैं। पर्यटकों ने भी इस इलाके से दूरी बनानी शुरू कर दी है, जिससे होटल और रेस्टोरेंट उद्योग को भी तगड़ा झटका लगा है। व्यापारियों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो वे सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
स्थानीय पुलिस और खुफिया एजेंसियां इस पूरे मामले पर बेहद बारीकी से नजर रख रही हैं। प्रशासन के सामने एक तरफ जहां नागरिकों के लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन करने के अधिकार की रक्षा करने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर अर्थव्यवस्था और कारोबार को बचाने की बड़ी जिम्मेदारी भी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लगातार प्रदर्शनकारियों के संपर्क में हैं। यातायात को सुचारू रखने के लिए वैकल्पिक रूट भी तैयार किए गए हैं ताकि आम नागरिकों को कम से कम परेशानी का सामना करना पड़े।
द फ्रीलान्स की अंतिम ग्राउंड पड़ताल
द फ्रीलान्स की टीम ने जब कनॉट प्लेस के चप्पे-चप्पे का दौरा किया तो वहां मायूसी और गुस्से का मिला-जुला माहौल देखने को मिला। एक तरफ जहां प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर अडिग हैं, वहीं व्यापारी वर्ग अपने नुकसान का रोना रो रहा है। सुप्रीम कोर्ट की ताजा टिप्पणी ने इस पूरे मामले में एक नया कानूनी आयाम जोड़ दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि सरकार और प्रशासन इस दोतरफा दबाव से कैसे निपटते हैं। क्या व्यापारियों को राहत मिलेगी या आंदोलन का यह दौर अभी और लंबा चलेगा, इस पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं।









