कीव/मॉस्को — यूक्रेन और रूस के बीच चल रही जंग अब और भी ज्यादा खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है। ब्लैक सी यानी काला सागर के पास एक बड़ा हादसा हो गया है जहां यूक्रेनी ड्रोन हमले की वजह से तेल ले जा रहे एक टैंकर में अचानक जोरदार धमाका हुआ और भयंकर आग लग गई। इस हमले के बाद आसमान में मीलों दूर तक काले धुएं का गुबार साफ देखा जा सकता है। पिछले कुछ दिनों में भारतीय नाविकों वाले जहाजों और समुद्री रास्तों पर हमलों की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं, जिससे समंदर में सफर करना भी बहुत खतरनाक हो गया है।
जमीनी मोर्चे पर भी हालात लगातार बदतर होते जा रहे हैं। रूस ने अपनी ताकत दिखाते हुए यूक्रेन के कई अहम सैन्य ठिकानों और ऊर्जा केंद्रों पर एक साथ सत्तर से ज्यादा मिसाइलें दाग दी हैं। इन ताबड़तोड़ हमलों की वजह से यूक्रेन के कई शहरों में बिजली और पानी का संकट गहरा गया है। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक इन हमलों में ग्यारह से ज्यादा लोगों की जान चली गई है और दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। अस्पतालों में घायलों का इलाज चल रहा है और राहत तथा बचाव का काम बहुत तेजी से किया जा रहा है।
काले सागर में मंडराता खतरा और तेल टैंकर पर हमला
ब्लैक सी का यह इलाका इस समय युद्ध का सबसे बड़ा अखाड़ा बन चुका है। यूक्रेन के ड्रोन लगातार रूसी ठिकानों और वहां से गुजरने वाले जहाजों को अपना निशाना बना रहे हैं। ताजा घटना में जब यूक्रेनी ड्रोन तेल टैंकर से टकराया, तो उसमें लदा ज्वलनशील पदार्थ तुरंत सुलग उठा। आग इतनी भयानक थी कि उस पर काबू पाना नौसेना के लिए भी बड़ी चुनौती बन गया। इस हमले के बाद से अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार से जुड़े लोगों की चिंताएं बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं क्योंकि जहाजों पर कभी भी हमला होने का डर बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोपीय संघ की तरफ से यूक्रेन की कुछ खास और प्रमुख वस्तुओं पर स्थायी प्रतिबंध लगाने की तलवार लटक रही है। इस आर्थिक दबाव के बाद यूक्रेन की प्रतिक्रिया और भी ज्यादा आक्रामक हो गई है। यूक्रेन अब हर उस रास्ते को रोकने की कोशिश कर रहा है जिससे रूस को आर्थिक फायदा पहुंच सकता है। इसी रणनीति के तहत समुद्र में चलने वाले तेल टैंकरों और मालवाहक जहाजों को ड्रोन हमलों का सामना करना पड़ रहा है।
लाखों गाड़ियों के लिए अहम दो पुलों पर भी रूसी ड्रोन स्ट्राइक
केवल समुद्र ही नहीं बल्कि जमीन पर भी बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने का खेल जारी है। हाल ही में रूस ने यूक्रेन के उन दो सबसे अहम पुलों को अपने ड्रोन हमलों से दहला दिया है जिन पर से रोजाना लाखों गाड़ियां गुजरती हैं। इन पुलों के क्षतिग्रस्त होने से आम लोगों का आना-जाना बुरी तरह प्रभावित हुआ है। युद्ध के इस दौर में पुलों और सड़कों का टूटना सेना की आवाजाही के साथ-साथ आम नागरिकों के लिए भी बहुत बड़ी मुसीबत बन गया है।
यूक्रेन का एक शहर इस समय पूरी तरह से 'मौत के क्षेत्र' में फंस चुका है। वहां के स्थानीय लोग रोजाना बमबारी और सायरन की आवाजों के बीच जीने को मजबूर हैं। चारों तरफ मलबे का ढेर है और बुनियादी सुविधाएं पूरी तरह ठप पड़ चुकी हैं। अंतरराष्ट्रीय संगठन लगातार युद्ध रोकने की अपील कर रहे हैं लेकिन जमीन पर दोनों देशों की सेनाएं पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। आने वाले दिनों में यह संघर्ष और भी ज्यादा भीषण रूप ले सकता है, जिससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ना तय माना जा रहा है।
यूक्रेनी शहरों में बिजली और ऊर्जा संकट गहराया
रूस की तरफ से की गई सत्तर से ज्यादा मिसाइलों की बारिश ने यूक्रेन की कमर तोड़ दी है। बिजली घर और ऊर्जा से जुड़े तमाम बड़े ठिकानों को मलबे में बदल दिया गया है। ठंड के इस मौसम में बिजली न होने की वजह से आम नागरिकों की मुश्किलें कई गुना बढ़ गई हैं। सरकार जनरेटर और वैकल्पिक व्यवस्थाओं के जरिए काम चलाने की कोशिश कर रही है लेकिन हमले लगातार होने से हर कोशिश नाकाम साबित हो रही है।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि युद्ध के मैदान में हालात हर घंटे बदल रहे हैं। एक तरफ जहां यूक्रेन अपने ड्रोन हमलों से दुश्मनों को घेरने में लगा है, वहीं रूस अपनी भारी मिसाइल शक्ति से करारा जवाब दे रहा है। इस तबाही के बीच आम जनता पीस रही है जिनके आशियाने उजड़ चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के तमाम प्रयासों के बावजूद शांति की कोई भी उम्मीद फिलहाल दूर-दूर तक नजर नहीं आ रही है और युद्ध का यह काला साया पूरी दुनिया पर मंडरा रहा है।




