नई दिल्ली से 'द फ्रीलान्स' की विशेष ग्राउंड रिपोर्ट। देश भर के छोटे-बड़े व्यापारियों और आम लोगों के लिए राहत भरी बड़ी खबर सामने आई है। दो हजार रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर चार्ज लगाए जाने की चर्चाओं पर फिलहाल विराम लग गया है। इस नए नियम को लागू किए जाने की तारीख को आगे बढ़ा दिया गया है। सरकार के इस कदम से डिजिटल भुगतान करने वाले करोड़ों ग्राहकों और दुकानदारों को बड़ी राहत मिली है जो इस अतिरिक्त शुल्क को लेकर काफी चिंतित थे।
पिछले कुछ दिनों से बाजार में यह खबर तेजी से फैल रही थी कि पंद्रह अक्टूबर से दो हजार रुपये से ज्यादा के ऑनलाइन लेनदेन पर दुकानदारों से शुल्क वसूला जा सकता है। इस संभावित नियम के विरोध में देश के कई बड़े व्यापारिक संगठनों ने दो अक्टूबर को 'नो UPI डे' मनाने का ऐलान किया था। इस विरोध प्रदर्शन के तहत व्यापारियों ने उस दिन यूपीआई के जरिए भुगतान न लेने की बात कही थी। हालांकि, स्थिति को संभालते हुए वित्त मंत्रालय और व्यापारिक संघों के बीच उच्च स्तर पर बातचीत हुई जिसके बाद पूरा घटनाक्रम बदल गया।
वित्त मंत्री के साथ बैठक के बाद टला फैसला
दुकानदारों और व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने हाल ही में देश की वित्त मंत्री से मुलाकात की। इस अहम बैठक में डिजिटल भुगतान के प्रसार और व्यापारियों को आ रही दिक्कतों पर खुलकर चर्चा हुई। सरकार ने व्यापारियों की चिंताओं को गंभीरता से सुना और उन्हें भरोसा दिलाया कि डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए सबकी सहमति से ही कोई फैसला लिया जाएगा। इस सकारात्मक बातचीत के बाद व्यापारिक संगठनों ने अपना दो अक्टूबर का विरोध प्रदर्शन और 'नो UPI डे' का फैसला पूरी तरह से वापस ले लिया है।
बैठक के बाद यह साफ हो गया कि फिलहाल आम जनता और व्यापारियों पर किसी भी तरह का नया एमडीआर शुल्क नहीं थोपा जाएगा। हालांकि, यह नियम पूरी तरह से रद्द हुआ है या इसे किसी नई तारीख के लिए टाला गया है, इस पर अभी आधिकारिक और विस्तृत दिशा-निर्देश आने बाकी हैं। लेकिन इतना तय है कि पंद्रह अक्टूबर से लागू होने वाली आशंका अब खत्म हो चुकी है जिससे बाजार में असमंजस का माहौल काफी हद तक कम हुआ है।
डिजिटल भुगतान पर इसका क्या असर पड़ेगा
भारत में पिछले कुछ सालों में यूपीआई ने पेमेंट करने का तरीका पूरी तरह बदल दिया है। चाय की छोटी दुकान से लेकर बड़े मॉल तक हर जगह लोग दो सौ, पांच सौ और दो हजार रुपये से ज्यादा के भुगतान के लिए फोन पे, गूगल पे या पेटीएम का इस्तेमाल करते हैं। यदि यूपीआई पर एमडीआर चार्ज लागू होता, तो छोटे व्यापारियों के मुनाफे पर सीधा असर पड़ता। कई दुकानदार ग्राहकों से अतिरिक्त शुल्क मांग सकते थे जिससे लोग फिर से कैश की तरफ लौट सकते थे।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार डिजिटल भुगतान की आदत को देश में कम नहीं होने देना चाहती है। यूपीआई की सफलता का सबसे बड़ा कारण यह है कि यह ग्राहकों और दुकानदारों दोनों के लिए पूरी तरह से मुफ्त और आसान है। अगर इस पर शुल्क लगता, तो डिजिटल क्रांति की रफ्तार धीमी पड़ सकती थी। सरकार और बैंकिंग नियामक इस बात को अच्छी तरह समझते हैं कि अर्थव्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देना जरूरी है।
आगे की क्या है तैयारी और व्यापारियों का रुख
व्यापारिक संगठनों ने सरकार के साथ हुई इस बैठक को सफल बताया है। उनका कहना है कि सरकार ने उनकी बात सुनी है और उन्हें उम्मीद है कि भविष्य में भी व्यापारियों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा। फिलहाल बाजार में काम-काज सामान्य रूप से चल रहा है और ग्राहक बिना किसी डर या अतिरिक्त शुल्क के अपने फोन से भुगतान कर पा रहे हैं। 'द फ्रीलान्स' की टीम इस पूरे मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगी और जैसे ही इस पर कोई नया आधिकारिक आदेश आएगा, सबसे पहले अपने पाठकों तक पहुंचाएगी।






