सना और रियाद की ओर से मिल रही ताजा खबरों के अनुसार, यमन के युद्ध क्षेत्र में एक बार फिर भारी हिंसा भड़क उठी है। सऊदी अरब के नेतृत्व वाली गठबंधन सेना ने हूती विद्रोहियों के ठिकानों पर एक साथ कई बड़े हवाई और जमीनी हमले किए हैं। इस भीषण सैन्य कार्रवाई में हूती गुट को भारी जान-माल का नुकसान उठाना पड़ा है। शुरुआती आधिकारिक और खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक इस खूनी संघर्ष में करीब 950 हूती लड़ाके अपनी जान गंवा चुके हैं।
इस बड़े सैन्य अभियान की सबसे बड़ी बात यह है कि इसमें विद्रोहियों की सैन्य ताकत को बहुत करारा झटका लगा है। गठबंधन सेना के सटीक हमलों में हूती विद्रोहियों की लगभग 380 सैन्य गाड़ियों और तोपखानों को पूरी तरह मलबे में बदल दिया गया है। इन गाड़ियों में बख्तरबंद वाहन और हथियार ले जाने वाले ट्रक शामिल थे। यमन के कई इलाकों में अभी भी धुएं के गुबार उठ रहे हैं और दोनों तरफ से रुक-रुक कर गोलीबारी की आवाजें सुनाई दे रही हैं।
सऊदी गठबंधन और हूती विद्रोहियों के बीच क्यों बढ़ी तनातनी?
यमन की यह जमीन पिछले कई सालों से लगातार गृहयुद्ध की आग में जल रही है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार को दोबारा सत्ता दिलाने के लिए सऊदी अरब और उसके साथी देश लगातार सैन्य अभियान चला रहे हैं। दूसरी तरफ ईरान समर्थित हूती विद्रोही देश के बड़े हिस्से पर कब्जा जमाए बैठे हैं। शांति वार्ताओं के बार-बार फेल होने के बाद अब मैदान में हथियारों की गूंज और ज्यादा तेज हो गई है। हाल ही में हुए हमलों ने यह साबित कर दिया है कि दोनों पक्ष अपनी जमीनी पकड़ मजबूत करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।
स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों और रिहायशी इलाकों के लोगों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से धमाकों की आवाज ने जीना मुहाल कर दिया है। रात के समय होने वाले हवाई हमलों से पूरा इलाका दहल उठता है। आम नागरिक इस भयानक लड़ाई के बीच बुरी तरह फंस गए हैं। उनके सामने खाने-पीने और सुरक्षित जगहों पर जाने का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। मानवीय सहायता एजेंसियां भी युद्ध के मैदान में लगातार बढ़ते खतरे के कारण राहत सामग्री पहुंचाने में असमर्थ नजर आ रही हैं।
क्षेत्रीय शांति और वैश्विक व्यापार पर मंडराता नया खतरा
यमन के इस ताजा संघर्ष का असर केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। लाल सागर और उसके आसपास के समुद्री मार्गों से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों की सुरक्षा पर फिर से बड़ा सवालिया निशान लग गया है। हूती विद्रोही पहले भी व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाते रहे हैं। इस ताजा सैन्य कार्रवाई के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि विद्रोही संगठन जवाबी कार्रवाई के रूप में समुद्री रास्तों या पड़ोसी देशों के तेल ठिकानों पर हमले तेज कर सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में लड़ाकों के मारे जाने और गाड़ियां तबाह होने के बाद हूती विद्रोहियों की सैन्य क्षमता कमजोर जरूर हुई है। लेकिन इसके साथ ही शांति समझौते की किसी भी संभावना को भी बहुत बड़ा धक्का लगा है। संयुक्त राष्ट्र और दुनिया के तमाम बड़े देश इस इलाके में तनाव कम करने की अपील कर रहे हैं। हालांकि जमीन पर हालात इसके बिल्कुल उलट नजर आ रहे हैं और युद्ध के बादल छंटने का नाम नहीं ले रहे हैं।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल और आगे का हाल
द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार अपनी नजर बनाए हुए है। मध्य पूर्व के कूटनीतिक गलियारों से लेकर यमन के स्थानीय मोर्चों तक हर छोटी-बड़ी खबर को परखा जा रहा है। सैन्य जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में यह संघर्ष और भी ज्यादा खतरनाक रूप ले सकता है। सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और किसी भी अप्रत्याशित हालात से निपटने के लिए सेनाएं पूरी तरह सतर्क हैं। हमारी टीम इस मामले से जुड़े हर नए अपडेट को आप तक सबसे पहले पहुंचाती रहेगी।







