नई दिल्ली के दिल यानी कनॉट प्लेस में इन दिनों सियासी हलचल और विरोध प्रदर्शनों का दौर तेजी से बढ़ गया है। एक तरफ जहां राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के प्रदर्शनों से राजधानी की यह मशहूर बाजार गर्म है, वहीं दूसरी तरफ त्योहारी सीजन में ग्राहकों की आवाजाही पर इसका बुरा असर पड़ रहा है। हालात ये हैं कि दुकानदारों और व्यापारियों के चेहरे पर चिंता साफ झलक रही है। द फ्रीलान्स की टीम ने मौके पर पहुंचकर ग्राउंड जीरो का जायजा लिया और जाना कि आखिर यहां इस समय क्या स्थिति बनी हुई है।
प्राप्त जानकारियों के अनुसार, आगामी 16 अक्टूबर को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में CJP की तरफ से एक बड़े तिरंगा मार्च का ऐलान किया गया है। आयोजक अभिजीत दिपके ने 'लहरा दो तिरंगा' का नारा देते हुए लोगों से बड़ी संख्या में जुटने की अपील की है। हालांकि इस मार्च को लेकर दिल्ली पुलिस पूरी तरह सख्त नजर आ रही है। पुलिस प्रशासन ने आयोजक अभिजीत दीपके के खिलाफ पहले ही कड़ी कार्रवाई की चेतावनी जारी कर दी है। पुलिस का कहना है कि बिना अनुमति या कानून व्यवस्था बिगाड़ने पर सख्त कदम उठाए जाएंगे।
त्योहारी सीजन में प्रदर्शनों से ठप होता कारोबार
दिवाली और धनतेरस जैसे बड़े त्योहारों से ठीक पहले कनॉट प्लेस में लगातार हो रहे प्रदर्शनों ने व्यापारियों की नींद उड़ा दी है। बीते दिनों NSUI की तरफ से भी यहां एक जोरदार प्रदर्शन किया गया था, जिसमें महिला कार्यकर्ताओं की पुलिस के साथ तीखी झड़प भी देखने को मिली थी। व्यापारियों का कहना है कि जब भी बाजार में इस तरह के धरने-प्रदर्शन होते हैं, तो बैरिकेडिंग और सुरक्षा कारणों से ग्राहक कनॉट प्लेस आने से बचते हैं। इसका सीधा असर दुकानदारों की रोजमर्रा की बिक्री पर पड़ रहा है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
व्यापार मंडल के प्रतिनिधियों का कहना है कि त्योहारी सीजन ही साल का वह समय होता है जब सबसे ज्यादा कमाई होती है। लेकिन लगातार हंगामे और सड़क जाम होने की वजह से खरीदार दूर के मॉल्स और दूसरी जगहों का रुख कर रहे हैं। व्यापारियों ने प्रशासन से अपील की है कि त्योहारों के इस अहम समय में कनॉट प्लेस क्षेत्र को प्रदर्शनों से मुक्त रखा जाए ताकि उनका कारोबार सामान्य रूप से चल सके। मार्मिक पुकार लगाते हुए दुकानदारों ने कहा कि उनका धंधा इस समय पूरी तरह पटरी से उतर चुका है।
बदले हालात और अंडरपास की सुधरी सूरत
इन तमाम प्रदर्शनों और राजनीतिक सरगर्मी के बीच दिल्ली प्रशासन और नई दिल्ली नगरपालिका परिषद ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर लिए हैं। हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद कनॉट प्लेस के हालात को देखते हुए पुलिस बल तैनात किया गया है। इसके अलावा, क्षेत्र के अंडरपास और रास्तों की साफ-सफाई और सुधरती सूरत पर भी ध्यान दिया जा रहा है ताकि किसी भी आपात स्थिति से आसानी से निपटा जा सके। पुलिस हर गतिविधि पर सीसीटीवी कैमरों के जरिए पैनी नजर रख रही है।
जमीनी हकीकत यह है कि एक तरफ जहां देशभक्ति के नाम पर रैलियां और मार्च निकाले जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय अर्थव्यवस्था और व्यापार पर इसका सीधा दबाव साफ महसूस किया जा रहा है। आम जनता और खरीदार भी सुरक्षा जांच और बैरिकेड्स की वजह से कनॉट प्लेस आने में कतरा रहे हैं। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह कानून व्यवस्था बनाए रखते हुए व्यापारियों के हितों और त्योहारी रौनक को भी बचाए रखे।
द फ्रीलान्स की अंतिम ग्राउंड पड़ताल
हमारी पड़ताल बताती है कि कनॉट प्लेस में अगले कुछ दिन काफी संवेदनशील रहने वाले हैं। 16 अक्टूबर को होने वाले तिरंगा मार्च और पुलिस की सख्ती के बीच टकराव की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। व्यापारियों की उम्मीदें अब पूरी तरह इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन जल्द ही इस मामले में कोई बीच का रास्ता निकालेगा। त्योहारों के इस पावन समय में बाजार की रौनक लौटना बेहद जरूरी है, वरना स्थानीय कारोबारियों को इस साल भारी भरकम घाटे का सामना करना पड़ेगा।


