नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश के मौसम का मिजाज अचानक एक बार फिर बदल गया है। जिस समय मॉनसून की वापसी का दौर चल रहा था, तभी एक नए चक्रवात ने इस प्रक्रिया को बीच में ही रोक दिया। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग यानी आईएमडी के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इस चक्रवातीय असर की वजह से उत्तर भारत से लेकर पूर्वी राज्यों तक बादलों ने डेरा डाल दिया है। दिल्ली और आसपास के एनसीआर इलाकों में सुबह से ही आसमान में घने बादल छाए हुए हैं और कई जगहों पर रुक-रुक कर बारिश शुरू हो चुकी है। इस अचानक हुए बदलाव से लोगों को एक बार फिर उमस भरी गर्मी से राहत तो मिली है, लेकिन त्योहारों के इस सीजन में कामकाज और आवाजाही पर भी असर पड़ रहा है।
मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, यह चक्रवात केवल मैदानी इलाकों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पहाड़ी राज्यों में भी साफ दिखाई दे रहा है। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के ऊंचे इलाकों में तेज हवाओं के साथ आंधी-तूफान और हल्की बर्फबारी या बारिश दर्ज की गई है। मैदानी इलाकों में उत्तर प्रदेश और बिहार के कई जिलों में अगले चार से पांच दिनों तक लगातार बारिश का साया मंडरा रहा है। कुछ इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की आशंका भी जताई गई है, जिसे लेकर प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमों को पूरी तरह मुस्तैद रहने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
लौटते मॉनसून पर चक्रवात का असर और राज्यों का हाल
इस ताजा मौसमी उठापटक का सबसे ज्यादा असर उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और उत्तराखंड जैसे राज्यों पर पड़ रहा है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मॉनसून आमतौर पर सितंबर के आखिरी हफ्ते तक देश से विदा होने लगता है, लेकिन बंगाल की खाड़ी और आसपास के क्षेत्रों में बने चक्रवातीय सिस्टम ने बादलों को वापस लौटने से रोक दिया है। उत्तर प्रदेश के कई पश्चिमी और पूर्वी जिलों में झमाझम बारिश का दौर शुरू हो चुका है, जिससे खेतों में खड़ी धान की पकी हुई फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका भी बढ़ गई है। किसान इस बात को लेकर खासे चिंतित हैं कि अगर अगले कुछ दिनों तक लगातार पानी बरसता रहा, तो उनकी कटाई के तैयार फसल खराब हो सकती है।
बिहार और झारखंड के कई जिलों में भी काले घने बादल छाए हुए हैं और रुक-रुक कर तेज बौछारें पड़ रही हैं। राजधानी पटना, रांची और आसपास के इलाकों में तापमान में अचानक गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विभाग ने इन दोनों राज्यों के लिए विशेष चेतावनी जारी करते हुए लोगों को कमजोर मकानों और पेड़ों के नीचे न खड़े होने की सलाह दी है। इसके अलावा, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद जैसे एनसीआर के शहरों में भी नमी वाली हवाएं चल रही हैं, जिससे वायु गुणवत्ता में तो सुधार हुआ है, लेकिन सड़कों पर जलभराव और ट्रैफिक जाम की समस्याएं फिर से उभरने लगी हैं।
उत्तराखंड और हिमाचल में बढ़ी ठंड, प्रशासन अलर्ट पर
पहाड़ी राज्यों उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में इस चक्रवातीय बदलाव के कारण ठंड ने समय से पहले ही दस्तक दे दी है। ऊंचाई वाले पर्यटन स्थलों पर तापमान तेजी से नीचे गिरा है और स्थानीय प्रशासन ने पर्यटकों को अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है। चार धाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को भी मौसम को ध्यान में रखते हुए सुरक्षित स्थानों पर रुकने के निर्देश दिए गए हैं क्योंकि भूस्खलन यानी लैंडस्लाइड का खतरा एक बार फिर बढ़ गया है। पहाड़ों पर चल रही ठंडी हवाओं और गरज के साथ चमकते बादलों ने मैदानी इलाकों में भी सिहरन पैदा कर दी है, जिससे अक्टूबर की शुरुआत में ही हल्की सर्दी का अहसास होने लगा है।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड टीम ने जब दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में जाकर स्थिति का जायजा लिया, तो पाया कि लोग इस अचानक आई बरसात के लिए तैयार नहीं थे। दफ्तर जाने वाले लोगों और स्कूली बच्चों को भारी बारिश के बीच सड़कों पर काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। हालांकि मौसम विभाग का कहना है कि यह दौर अगले तीन से चार दिनों तक और जारी रह सकता है, जिसके बाद मॉनसून की औपचारिक विदाई का नया चरण शुरू होगा। तब तक सभी संबंधित राज्यों के जिला प्रशासनों को हाई अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
सुरक्षा और एहतियात के लिए प्रशासन की विशेष तैयारियां
मौसम के इस यूटर्न को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकारों की आपदा प्रबंधन इकाइयों ने कमर कस ली है। जिन राज्यों में भारी बारिश का रेड या ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है, वहां जिलाधिकारियों को लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। निचले इलाकों और नदियों के किनारे बसे गांवों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है ताकि बाढ़ जैसी स्थिति से बचा जा सके। बिजली विभागों को भी हिदायत दी गई है कि आंधी-तूफान के दौरान सुरक्षा मानकों का पूरा पालन किया जाए ताकि किसी भी प्रकार की अनहोनी को टाला जा सके।
आम जनता से भी अपील की गई है कि वे मौसम विभाग की चेतावनियों को नजरअंदाज न करें और बहुत जरूरी होने पर ही खराब मौसम के दौरान घरों से बाहर निकलें। सफर करने वाले लोग अपनी यात्रा शुरू करने से पहले रास्तों की स्थिति की जानकारी जरूर लें ताकि ट्रैफिक जाम या जलभराव वाले रास्तों पर फंसने से बचा जा सके। द फ्रीलान्स इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा और मौसम के हर नए अपडेट से अपने पाठकों को समय-समय पर अवगत कराता रहेगा।








