लखनऊ के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों हलचल बहुत तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश की सियासत में पाला बदलने का खेल एक बार फिर शुरू हो गया है। भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने अब साइकिल की सवारी करने का मन बना लिया है। उन्होंने समाजवादी पार्टी की सदस्यता ले ली है। इस सियासी घटनाक्रम ने राज्य के राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह से गरमा दिया है।
बीते कुछ दिनों से धर्मेंद्र कश्यप के पाला बदलने की अटकलें लगाई जा रही थीं। अब इन चर्चाओं पर पूरी तरह से मुहर लग गई है। उन्होंने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से लखनऊ में मुलाकात की। इस दौरान उनके साथ उनकी बेटी भी मौजूद थीं। समाजवादी पार्टी कार्यालय में हलचल बढ़ गई है और कार्यकर्ताओं में इस नए सियासी समीकरण को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
सपा के पीडीए फॉर्मूले को कितनी मिलेगी मजबूती
समाजवादी पार्टी इन दिनों अपने पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक फॉर्मूले पर पूरी ताकत से काम कर रही है। धर्मेंद्र कश्यप के पार्टी में आने से सपा इस वर्ग में अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहती है। कश्यप समुदाय उत्तर प्रदेश के कई जिलों में अच्छा प्रभाव रखता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बड़े बदलाव से आगामी चुनावों में वोटों का समीकरण बदल सकता है।
मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर इस मीटिंग की तस्वीरें भी साझा की हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, आगामी अठारह तारीख को धर्मेंद्र कश्यप विधिवत रूप से समाजवादी पार्टी की लाल टोपी पहन सकते हैं। इस बड़े राजनीतिक कदम से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और रोहिलखंड क्षेत्र की सीटों पर सीधा असर पड़ने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।
बेटी के चुनाव लड़ने की चर्चाओं ने पकड़ा जोर
इस सियासी मुलाकात के बाद एक और बड़ी चर्चा बहुत तेजी से फैल रही है। कहा जा रहा है कि धर्मेंद्र कश्यप की बेटी आगामी चुनाव में समाजवादी पार्टी के टिकट पर मैदान में उतर सकती हैं। हालांकि पार्टी की तरफ से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा आम हो चुकी है कि टिकट बंटवारे में इस परिवार को प्राथमिकता मिल सकती है।
दूसरी तरफ, इस राजनीतिक उथल-पुथल पर बीजेपी खेमे से भी प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। स्थानीय स्तर पर नेताओं का कहना है कि पार्टी छोड़ने से संगठन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि चुनाव से ठीक पहले एक पूर्व सांसद का इस तरह पाला बदलना विपक्ष को एक बड़ा चुनावी मुद्दा जरूर दे रहा है।
रोहिलखंड की राजनीति पर पड़ेगा गहरा असर
धर्मेंद्र कश्यप का प्रभाव रोहिलखंड क्षेत्र में काफी माना जाता है। उन्होंने पहले भी कई चुनावों में अपनी राजनीतिक ताकत का अहसास कराया है। अब समाजवादी पार्टी के साथ जुड़ने के बाद वे पार्टी के लिए प्रचार करते नजर आएंगे। देखना दिलचस्प होगा कि जनता उनके इस फैसले को कितना स्वीकार करती है और आने वाले दिनों में बीजेपी इस सेंधमारी का क्या जवाब देती है।









