नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की राजधानी दिल्ली में आज जंतर-मंतर पर होने वाले सीजेपी प्रोटेस्ट से पहले राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल काफी तेज हो गई है। लोकप्रिय डिजिटल कंटेंट क्रिएटर और यूट्यूबर ध्रुव राठी को पुलिस ने हिरासत में लेने के कुछ देर बाद रिहा कर दिया है। लेकिन उनकी रिहाई के साथ ही दिल्ली पुलिस ने साफ कर दिया है कि यदि वह या उनके साथी जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन में शामिल होते हैं, तो उनके खिलाफ तुरंत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस के इस कड़े रुख के बाद से ही राजधानी के राजनीतिक गलियारों में तनाव का माहौल बना हुआ है और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह से मुस्तैद नजर आ रही हैं।
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत आज सुबह तब हुई जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित सीजेपी प्रोटेस्ट से पहले पुलिस ने बड़े पैमाने पर एहतियाती कदम उठाए। ध्रुव राठी के अलावा अभिजीत दीपके, सौरभ दास, आशुतोष रांका और उनके कई अन्य साथियों को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया। प्रशासन का यह कदम कानून और व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर उठाया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि बिना अनुमति के या निषेध क्षेत्र में इस तरह के बड़े प्रदर्शनों की इजाजत नहीं दी जा सकती है। इसी वजह से प्रदर्शन स्थल और उसके आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल और अर्धसैनिक बलों की तैनाती कर दी गई है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से पहले पुलिस का बड़ा एक्शन
जंतर-मंतर पर जुटने वाले प्रदर्शनकारियों और नेताओं पर पुलिस लगातार अपनी पैनी नजर बनाए हुए है। ध्रुव राठी को गुरुग्राम पुलिस द्वारा छोड़े जाने के बाद से ही उनके समर्थकों और आम लोगों के बीच यह चर्चा का विषय बन गया है कि आगे क्या होगा। पुलिस ने मौखिक और लिखित रूप से चेतावनी जारी की है कि यदि कोई भी व्यक्ति प्रतिबंधों का उल्लंघन कर धरना-प्रदर्शन में हिस्सा लेता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा। ध्रुव राठी की रिहाई के बाद भी उनके घर और आसपास के इलाकों में पुलिस की गतिविधियों पर लोग नजर रख रहे हैं। प्रशासन किसी भी कीमत पर राजधानी की शांति व्यवस्था को भंग नहीं होने देना चाहता है।
इस पूरी कार्रवाई और नेताओं की लगातार हो रही हिरासत पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सवाल उठने लगे हैं। संयुक्त राष्ट्र ने भारत में हो रही इस पुलिस कार्रवाई और नागरिक स्वतंत्रताओं पर पाबंदियों को लेकर चिंता जताई है। मानवाधिकार संगठनों और विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के संवैधानिक अधिकार को भी कुचलने की कोशिश कर रही है। दूसरी तरफ, शासन और प्रशासन का तर्क है कि कानून का पालन कराना और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करना उनकी पहली प्राथमिकता है। पुलिस का यह भी दावा है कि हिरासत में लिए गए लोगों को एहतियात के तौर पर रोका गया था ताकि शहर में यातायात और आम जनजीवन प्रभावित न हो।
मानवाधिकार संगठनों और संयुक्त राष्ट्र की चिंताएं
जमीनी स्तर पर हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं और पुलिस छावनी में तब्दील हो चुके जंतर-मंतर के आसपास किसी भी अनधिकृत व्यक्ति को फटकने नहीं दिया जा रहा है। आम नागरिक और स्थानीय दुकानदार भी इस भारी सुरक्षा व्यवस्था के चलते काफी असहज महसूस कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी आवाज को दबाने के लिए पुलिस प्रशासन का दुरुपयोग किया जा रहा है, जबकि सरकार अपनी नीतियों का बचाव कर रही है। आने वाले घंटों में यह देखना बेहद अहम होगा कि क्या प्रदर्शनकारी अपनी योजना पर टिके रहते हैं या पुलिस की चेतावनी के बाद वे अपने कदम पीछे खींचते हैं।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड टीम इस पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और हर नए अपडेट को पाठकों तक पहुंचा रही है। पुलिस अधिकारियों और आयोजकों दोनों से बात करने की कोशिश की जा रही है ताकि यह साफ हो सके कि आगामी घंटों में स्थिति किस दिशा में जाएगी। सुरक्षा बलों ने साफ कर दिया है कि अगर नियम तोड़े गए तो कार्रवाई करने में कोई संकोच नहीं किया जाएगा। जनता की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या आज जंतर-मंतर पर कोई प्रदर्शन हो पाता है या पुलिस पूरी तरह से इस आयोजन को विफल करने में सफल रहती है।









