नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — भारतीय शेयर बाजार में आज के कारोबार की शुरुआत से पहले निवेशकों और ट्रेडर्स के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय और घरेलू संकेतों को देखें तो बाजार में एक तरफ जहां पॉजिटिव शुरुआत की उम्मीद जताई जा रही थी, वहीं गिफ्ट निफ्टी के आंकड़ों ने सुस्ती के संकेत भी दे दिए हैं। देश के वित्तीय बाजारों में इस समय हलचल काफी तेज है और हर कोई यह जानने की कोशिश कर रहा है कि आज बाजार संभलेगा या फिर किसी बड़ी गिरावट का सामना करेगा। हमारी ग्राउंड टीम ने बाजार के जानकारों से बात करके यह समझने की कोशिश की है कि आज निवेशकों को किन बातों का खास ध्यान रखना चाहिए।
सुबह के शुरुआती कारोबार के आंकड़ों के अनुसार गिफ्ट निफ्टी में हल्की सुस्ती और कभी-कभी सौ अंकों तक की नरमी देखने को मिली है। इसका सीधा असर घरेलू बाजार की ओपनिंग पर पड़ना तय माना जा रहा है। इसके अलावा, ग्लोबल मार्केट से मिल रहे संकेतों और ब्रेंट क्रूड की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने बाजार की चाल को और अधिक अनिश्चित बना दिया है। कच्चा तेल एक बार फिर सौ डॉलर के आसपास मंडरा रहा है, जिससे महंगाई और आयात बिल को लेकर चिंताएं फिर से सिर उठाने लगी हैं। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आज का दिन बहुत सावधानी से ट्रेड करने का है, क्योंकि किसी भी छोटी खबर पर बाजार तेजी से प्रतिक्रिया दे सकता है.
आरबीआई की नीति और कंपनियों के नतीजों पर टिकी निगाहें
आज बाजार की दिशा तय करने में भारतीय रिजर्व बैंक की आगामी मौद्रिक नीति का बहुत बड़ा हाथ रहने वाला है। केंद्रीय बैंक की बैठक के नतीजों से पहले निवेशकों ने थोड़ा सतर्क रुख अपना लिया है और बड़े दांव लगाने से बच रहे हैं। ब्याज दरों और नकदी के मोर्चे पर आरबीआई क्या रुख अपनाता है, इस पर देश भर के अर्थशास्त्रियों की नजर टिकी हुई है। यदि ब्याज दरों को लेकर कोई राहत भरा संकेत मिलता है, तो बाजार में तुरंत रिकवरी देखने को मिल सकती है। इसके विपरीत, यदि रुख सख्त रहता है तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है.
आरबीआई की नीति के अलावा दूसरी कंपनियों के तिमाही वित्तीय नतीजे भी आज बाजार की चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। दिग्गज कंपनियों के नतीजों के आंकड़े बाजार की सेहत का असली आईना दिखाएंगे। इसके साथ ही, अडाणी समूह के शेयरों में चल रही भारी बिकवाली और जीक्यूजी पार्टनर्स द्वारा लगातार की जा रही शेयरहोल्डिंग की कटौती पर भी बाजार के बड़े खिलाड़ियों की नजर है। आईटीसी जैसी बड़ी कंपनियों में हाल ही में हुए ब्लॉक डील के असर ने भी निवेशकों को सतर्क रहने पर मजबूर कर दिया है। इन सभी कॉरपोरेट हलचलों के बीच आम निवेशकों के लिए यह जरूरी है कि वे किसी भी अफवाह में आकर जल्दबाजी में फैसले न लें।
ग्लोबल संकेत और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें
घरेलू मोर्चे के अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थितियां भी आज के कारोबार को तय करने में बहुत बड़ा फैक्टर साबित हो रही हैं। अमेरिकी बाजारों के हालिया रुझान और विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों का सीधा असर भारतीय सूचकांकों पर पड़ रहा है। ब्रेंट क्रूड ऑयल के दाम सौ डॉलर प्रति बैरल के करीब बने रहने से देश के मैक्रो-इकोनॉमिक आंकड़ों पर दबाव बढ़ रहा है। ऊर्जा की बढ़ती कीमतें आयातकों की लागत बढ़ाती हैं, जिससे कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ता है और शेयर बाजार में सुस्ती छाने लगती है.
इन तमाम वैश्विक और घरेलू उथल-पुथल के बीच बाजार विशेषज्ञों की सलाह है कि आज के दिन केवल मजबूत बुनियादी फंडामेंटल वाले शेयरों पर ही ध्यान देना समझदारी होगी। जिन कंपनियों के तिमाही नतीजे बेहतर आने की उम्मीद है, उनमें चुनिंदा खरीदारी का मौका मिल सकता है, लेकिन इंट्राडे ट्रेडर्स को बहुत संभलकर चलना होगा। बाजार में किसी भी तरह के बड़े उतार-चढ़ाव से बचने के लिए स्टॉप लॉस का कड़ाई से पालन करना जरूरी है। द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि आज का बाजार पूरी तरह से डेटा-ड्रिवन और ग्लोबल संकेतों पर आधारित रहने वाला है, इसलिए हर एक निवेशक को अपनी वित्तीय स्थिति और जोखिम क्षमता के अनुसार ही कदम उठाना चाहिए।








