नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश भर में गर्मी का तेवर अब लगातार तीखा होता जा रहा है। दक्षिण भारत के चेन्नई और उसके आसपास के जिलों में तापमान तेजी से ऊपर चढ़ रहा है। मौसम जानकारों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि मई की शुरुआत के साथ ही इन इलाकों में स्थिति काफी झुलसाने वाली हो सकती है। हालांकि देश के कुछ अंदरूनी और दक्षिणी हिस्सों में हल्की बारिश ने राहत दी है, लेकिन उत्तरी इलाकों और आंध्र प्रदेश की सीमा से लगे क्षेत्रों में पारा लगातार उछाल पर है। आम जनता इस भीषण गर्मी से परेशान नजर आ रही है और दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा पसरने लगा है।
चुनावी सरगर्मी के बीच मौसम विभाग ने साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में तापमान में और भारी बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी। चेन्नई और उसके उपनगरों में पारा तेजी से 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच रहा है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि यह इस साल के भीषण ग्रीष्मकाल यानी समर सीजन की शुरुआत का साफ संकेत है। चुनाव प्रचार के लिए बाहर निकल रहे राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं और आम मतदाताओं को भी इस चिलचिलाती धूप का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन की ओर से लोगों को दोपहर के समय घरों में रहने और ज्यादा से ज्यादा पानी पीने की सलाह दी जा रही है ताकि लू से बचाव हो सके।
विदेशी धरती पर भी गर्मी और आगजनी का कहर
भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के दूसरे देशों में भी तापमान के तेवर डराने लगे हैं। ब्रिटेन में साल के सबसे गर्म दिन दर्ज किए जाने के बाद जगह-जगह आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं। स्थिति से निपटने के लिए ब्रिटिश दमकल कर्मियों को भारी संख्या में मैदान में उतरना पड़ा है। सूखे और रिकॉर्डतोड़ तापमान के कारण जंगलों और घास के मैदानों में आग लगने का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ गया है। स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से खुले में आग न जलाने और विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। जलवायु में आ रहे इस बड़े बदलाव ने पर्यावरणविदों की चिंता को भी काफी बढ़ा दिया है।
दूसरी ओर फ्रांस से भी गंभीर खबरें सामने आ रही हैं जहां रिकॉर्ड तोड़ हीटवेव यानी लू के चलते परमाणु रिएक्टरों को बंद करना पड़ा है। तापमान बढ़ने से कूलिंग सिस्टम के लिए पानी की समस्या खड़ी हो जाती है, जिसके चलते यह कदम उठाना पड़ा है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के आंकड़े भी गवाही दे रहे हैं कि वैश्विक तापमान लगातार बढ़ रहा है। दुनिया भर में मौसम का यह बदला हुआ चक्र इंसानी जीवन और बिजली उत्पादन जैसी जरूरी सेवाओं पर सीधा असर डाल रहा है। वैज्ञानिक इसे ग्लोबल वार्मिंग का सीधा परिणाम मान रहे हैं जो आने वाले समय में और खतरनाक हो सकता है।
बढ़ते पारे से निपटने की प्रशासनिक तैयारियां
स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियां इस बढ़ती गर्मी से निपटने के लिए लगातार रणनीति बना रही हैं। अस्पतालों में लू के मरीजों के लिए अलग से वार्ड तैयार किए जा रहे हैं ताकि समय पर उचित इलाज मिल सके। सार्वजनिक स्थानों पर पीने के पानी की व्यवस्था और ठिकानों पर छायादार तंबू लगाने के निर्देश दिए गए हैं। स्कूल और कॉलेजों में भी बच्चों को कड़ी धूप से बचाने के लिए समय सारणी में बदलाव किए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी टीम मुस्तैद है।
'द फ्रीलान्स' की जमीनी पड़ताल बताती है कि आम लोगों को इस बार गर्मी के सीजन में दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। एक तरफ जहां सूरज की तपिश लोगों का जीना मुहाल कर रही है, वहीं दूसरी तरफ बिजली की बढ़ती मांग से पावर कट की समस्या भी सिर उठाने लगी है। पर्यावरण जानकारों का कहना है कि अगर समय रहते पेड़ों की कटाई पर रोक नहीं लगाई गई और बड़े पैमाने पर पौधारोपण नहीं किया गया, तो आने वाले सालों में हालात इससे भी ज्यादा भयानक हो सकते हैं। फिलहाल हर कोई मानसून के आने का इंतजार कर रहा है ताकि इस चिलचिलाती गर्मी से राहत मिल सके।






