नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश के लाखों छोटे और मंझोले कारोबारियों के लिए एक बहुत बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी परिषद ने कर नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए एक बड़ा फैसला लिया है। अब यदि किसी व्यापारी से पांच करोड़ रुपये से कम की कर गड़बड़ी या टैक्स चोरी का मामला सामने आता है, तो उसे सीधे जेल नहीं भेजा जाएगा। इस नए फैसले के तहत अब गिरफ्तारी का प्रावधान केवल उन्हीं मामलों में लागू होगा जहां कर चोरी की राशि पांच करोड़ रुपये से अधिक होगी। इस कदम का सीधा मतलब यह है कि छोटे दुकानदारों और मध्यम वर्ग के व्यापारियों को अब मामूली या छोटी-मोटी भूल पर सीधे पुलिस कार्रवाई या जेल जाने का डर नहीं सताएगा।
लंबे समय से व्यापारी संगठन सरकार और जीएसटी काउंसिल से यह मांग कर रहे थे कि कर से जुड़े मामलों में अधिकारियों की मनमानी रोकी जाए। अक्सर देखा जाता था कि छोटी सी हिसाब की गलती या तकनीकी चूक पर भी व्यापारियों पर भारी भरकम दंडात्मक कार्रवाई और गिरफ्तारी की तलवार लटक जाती थी। इन हालात के चलते बाजार में डर का माहौल बन रहा था और कारोबार करना मुश्किल हो रहा था। अब इस नए फैसले के आने के बाद व्यापारियों ने राहत की सांस ली है। सरकार का यह कदम देश में व्यापार करने को आसान बनाने की दिशा में एक अहम और बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है जिससे बाजार में विश्वास बढ़ेगा।
छोटे व्यापारियों को कैसे मिलेगी इस नए नियम से राहत?
जीएसटी लागू होने के बाद से ही देश भर के व्यापारी इसके जटिल नियमों और कड़े प्रावधानों को लेकर परेशान थे। कई बार रिटर्न भरने में छोटी-सी गलती होने या दस्तावेजों में मामूली अंतर मिलने पर भी अधिकारियों द्वारा सीधे सख्त कार्रवाई कर दी जाती थी। इससे बाजार में एक तरह का अविश्वास पैदा हो गया था और ईमानदार व्यापारी भी डरे-सहमे रहते थे। अब पांच करोड़ रुपये की सीमा तय होने से कर अधिकारियों के हाथ कुछ हद तक बंध गए हैं। वे अब छोटी रकम के मामलों में सीधे गिरफ्तारी का डंडा नहीं चला पाएंगे। इसके बजाय अब ऐसे मामलों में केवल जुर्माना लगाकर या नियमानुसार टैक्स की भरपाई कराकर मामला सुलझाया जा सकेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस नियम से जेलों और अदालतों पर भी मुकदमों का बोझ कम होगा। अभी तक हजारों की संख्या में छोटे-छोटे टैक्स विवाद अदालतों में लंबित पड़े हैं जिनमें अमूमन कागजी औपचारिकताएं ही पूरी होती रहती हैं। जब पांच करोड़ से कम के मामलों में गिरफ्तारी नहीं होगी, तो अधिकारी और व्यापारी दोनों अपना ध्यान सिर्फ कारोबार को बढ़ाने और सही समय पर कर चुकाने पर लगा सकेंगे। हालांकि इसका यह कतई मतलब नहीं है कि कोई भी व्यक्ति बिना डरे टैक्स चोरी कर सकेगा। नियमों के मुताबिक गड़बड़ी पकड़े जाने पर आर्थिक जुर्माना और ब्याज चुकाना ही पड़ेगा, लेकिन सीधे आपराधिक कार्रवाई और जेल जाने का खतरा टल गया है.
जीएसटी परिषद के इस फैसले के दूरगामी आर्थिक असर
किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को गति देने में छोटे और मध्यम कारोबारियों की भूमिका सबसे अहम होती है। जब देश का व्यापारी वर्ग सुरक्षित महसूस करता है और उसे अनावश्यक कानूनी पचड़ों का डर नहीं होता, तो व्यापार तेजी से आगे बढ़ता है। जीएसटी काउंसिल की इस बैठक में लिए गए फैसलों का मुख्य उद्देश्य यही है कि देश में टैक्स का ढांचा पारदर्शी बने और उत्पीड़न पूरी तरह रुके। अधिकारी भी अब केवल बड़े और सुनियोजित तरीके से किए जा रहे टैक्स घोटालों पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर पाएंगे जिससे सरकारी खजाने को चूना लगाने वाले असली अपराधियों पर नकेल कसी जा सकेगी।
हमारे ग्राउंड रिपोर्टर ने जब दिल्ली और आसपास के बड़े बाजारों में जाकर व्यापारियों से बात की, तो उनमें इस फैसले को लेकर भारी उत्साह देखने को मिला। दुकानदारों का कहना था कि पिछले कुछ सालों से विभाग की तरफ से जिस तरह का डर का माहौल बनाया गया था, उससे कारोबार करना सजा जैसा लगने लगा था। अब इस नए नियम के बाद उन्हें उम्मीद है कि वे बिना किसी मानसिक तनाव के अपना काम कर पाएंगे। 'द फ्रीलान्स' की इस जमीनी पड़ताल में यह बात साफ हो गई है कि सरकार का यह कदम देश के आर्थिक तंत्र को मजबूत करने और व्यापारिक समुदाय का भरोसा जीतने में बेहद मददगार साबित होगा।
आगे क्या होगी प्रशासन और कर विभाग की रणनीति?
इस बड़े बदलाव के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि कर विभाग अपने कामकाज के तरीकों में किस तरह के बदलाव करता है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे व्यापारियों के साथ मित्रवत व्यवहार रखें और उन्हें कर चुकाने के लिए जागरूक करें न कि डराएं। आने वाले दिनों में विभाग की तरफ से एक विस्तृत गाइडलाइन भी जारी की जाएगी जिसमें यह साफ-साफ बताया जाएगा कि पांच करोड़ से कम के मामलों में किस प्रक्रिया के तहत जुर्माना वसूला जाएगा। 'द फ्रीलान्स' इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार अपनी नजर बनाए रखेगा और आपको आगे भी हर छोटी-बड़ी अपडेट सबसे पहले पहुंचाता रहेगा।









