नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज अचानक पूरी तरह बदल गया है। पिछले चौबीस घंटों के दौरान उत्तर भारत के पहाड़ी और मैदानी इलाकों में तेज आंधी के साथ भारी ओलावृष्टि हुई है। इस अचानक आई प्राकृतिक आपदा ने खेतों में खड़ी पककर तैयार फसलों को पलभर में मिट्टी में मिला दिया है। मौसम की इस बेरुखी ने अन्नदाताओं के चेहरों पर गहरी चिंता की लकीरें खींच दी हैं और अब किसान सरकार से तुरंत मदद की गुहार लगा रहे हैं।
उत्तराखंड के पर्वतीय और तराई क्षेत्रों में इस बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई है। सरकारी और शुरुआती जमीनी रिपोर्टों के मुताबिक, राज्य में करीब 8,372 हेक्टेयर उपजाऊ कृषि भूमि इस आपदा की चपेट में आ चुकी है। खेतों में लहराती फसलें और बागवानी को सत्तर प्रतिशत तक का भारी नुकसान हुआ है। पिथौरागढ़ जैसे जिलों में केले की फसल पूरी तरह तबाह हो चुकी है, जिससे किसानों में स्थानीय मालभोग केले के विलुप्त होने का गंभीर डर सता रहा है।
उत्तराखंड में बागवानी और कृषि को भारी चोट
पहाड़ी इलाकों में केवल खेत ही नहीं बल्कि पशुओं के आश्रय स्थल भी इस आंधी और ओलावृष्टि का शिकार हुए हैं। ऊधम सिंह नगर जिले में तेज हवाओं और ओलों की मार से कई गोशालाओं को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे पशुओं की सुरक्षा का संकट भी खड़ा हो गया है। किसान संघों और स्थानीय लोगों का कहना है कि सालभर की मेहनत पर पानी फिर चुका है और बागवानों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट पैदा हो गया है। अधिकारी अब इलाकों का दौरा कर नुकसान का आकलन करने में जुटे हैं।
केवल पहाड़ी राज्य ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भी ओलावृष्टि ने भयंकर तबाही मचाई है। फिरोजाबाद और फर्रुखाबाद जैसे इलाकों में खेतों में बिछी बर्फ की सफेद चादर ने किसानों के सपनों को चकनाचूर कर दिया है। फिरोजाबाद में किसानों ने सड़कों पर आकर प्रशासन से तत्काल मुआवजे की मांग की है। किसानों का साफ कहना है कि यदि समय पर आर्थिक मदद नहीं मिली, तो उनके परिवारों के सामने पेट भरने का संकट खड़ा हो जाएगा।
उत्तर प्रदेश के जिलों में मुआवजे के लिए उठती आवाजें
स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में सर्वे के आदेश दे दिए हैं ताकि नुकसान का सही आंकड़ा सामने आ सके। उत्तर प्रदेश सरकार बाढ़ और ओलावृष्टि से टूटे और बेसहारा हुए लाभार्थियों तक राहत पहुंचाने का दावा कर रही है। प्रशासन का कहना है कि राजस्व विभाग की टीमें गांवों में जाकर एक-एक खेत का मुआयना कर रही हैं। हालांकि, जमीनी स्तर पर अभी भी कई किसानों तक सरकारी मदद नहीं पहुंची है, जिसे लेकर ग्रामीण इलाकों में रोष का माहौल बना हुआ है।
मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले कुछ दिनों तक मौसम का मिजाज ऐसा ही बना रह सकता है। बार-बार बदलता मौसम और बेमौसम ओलावृष्टि जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरे की ओर भी साफ इशारा कर रही है। पारंपरिक फसलों के साथ-साथ बागवानी करने वाले किसानों के लिए यह साल बेहद कठिन साबित हो रहा है। द फ्रीलान्स की टीम लगातार जमीनी हालात पर नजर बनाए हुए है और प्रशासन से यह मांग करती है कि पीड़ितों को बिना किसी देरी के उचित मुआवजा दिया जाए।
प्रशासनिक सर्वे और राहत कार्यों की जमीनी हकीकत
ओलावृष्टि के इस दौर ने देश की कृषि व्यवस्था और बीमा योजनाओं की कार्यप्रणाली पर भी कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों का कहना है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ हर छोटे किसान तक समय पर नहीं पहुंच पाता है। कागजी कार्रवाई और लंबी प्रशासनिक प्रक्रियाओं के चक्कर में किसानों को महीनों इंतजार करना पड़ता है। सरकार के लिए यह जरूरी हो गया है कि वह आपदा राहत बांटने के नियमों को सरल बनाए ताकि संकट के इस समय में अन्नदाता को तत्काल राहत का मरहम मिल सके।





