द फ्रीलान्स की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, भारत के उत्तर और मध्य हिस्सों में मौसम ने अचानक बेहद खतरनाक रूप ले लिया है। मौसम विभाग ने दिल्ली और उत्तर प्रदेश समेत कुल 15 राज्यों में भारी बारिश और भयंकर ओलावृष्टि की चेतावनी दी है। उत्तराखंड के पहाड़ों पर बर्फबारी शुरू हो चुकी है, जिसके बाद मैदानी इलाकों में ठंडी हवाओं का दौर शुरू हो गया है। इस अचानक आए बदलाव से लोगों को गर्मी से राहत तो मिली है, लेकिन आम जनजीवन और खेती किसानी पर बड़ा संकट मंडराने लगा है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले दो दिनों तक आंधी और ओलावृष्टि का यह दौर जारी रह सकता है।
हरियाणा के चार जिलों में मौसम विभाग ने विशेष तौर पर ओलावृष्टि का रेड अलर्ट जारी किया है। यहां पिछले कुछ घंटों में तापमान में उतार-चढ़ाव देखा गया है और तेज हवाओं के साथ बारिश होने की पूरी संभावना है। खेतों में धान और अन्य खरीफ की फसलें पककर तैयार खड़ी हैं या कटाई के बाद खुले आसमान के नीचे मंडियों में पड़ी हैं। अचानक हुई इस ओलावृष्टि और बारिश ने किसानों की रातों की नींद उड़ा दी है। उत्तर प्रदेश के मेरठ और आसपास के जिलों में भी प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया है ताकि ओलावृष्टि से बर्बाद हुई फसलों का सही आकलन किया जा सके।
उत्तराखंड में ओलावृष्टि और बर्फबारी का दोहरा संकट
पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में मौसम की मार सबसे ज्यादा देखने को मिल रही है। देहरादून, नैनीताल, चमोली और पिथौरागढ़ समेत कई जिलों में भारी बारिश और ओलावृष्टि का नया दौर शुरू हो गया है। ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी के कारण तापमान तेजी से नीचे लुढ़क गया है। चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को भारी ठंड का सामना करना पड़ रहा है। राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्थिति का संज्ञान लेते हुए ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों के लिए अतिरिक्त राहत पैकेज और मुआवजे की घोषणा कर दी है। प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे तुरंत गांवों में जाकर नुकसान की रिपोर्ट तैयार करें।
मैदानी इलाकों की मंडियों में खुले में पड़ी अनाज की बोरियों को बचाने के लिए प्रशासन ने व्यापारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। कई जगहों पर तिरपाल की व्यवस्था की जा रही है ताकि खुले में रखा धान भीगने से बच सके। इसके बावजूद, अचानक गिरे ओलों ने कई बीघा जमीन पर खड़ी फसलों को पूरी तरह चौपट कर दिया है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से दलहन और तिलहन की फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। किसान अब सरकार से मांग कर रहे हैं कि उन्हें जल्द से जल्द आर्थिक मदद दी जाए ताकि वे अगले सीजन की तैयारी कर सकें।
प्रशासन की जमीनी तैयारियां और अधिकारियों का निरीक्षण
मेरठ, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर जैसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में जिला प्रशासन की टीमें सीधे खेतों में उतर चुकी हैं। लेखपाल और कृषि विभाग के अधिकारी गांवों का दौरा कर रहे हैं ताकि ओलावृष्टि से हुए नुकसान का जमीनी जायजा लिया जा सके। किसानों से अपील की गई है कि वे अपनी खराब हुई फसलों की तस्वीरें और विवरण स्थानीय प्रशासन को दें ताकि बीमा कंपनियों से समय पर क्लेम मिल सके। सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रभावित किसान को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा और हरसंभव मदद पहुंचाई जाएगी।
दूसरी ओर, दिल्ली-एनसीआर में भी सुबह से छाए बादलों और ठंडी हवाओं ने मौसम को सुहाना बना दिया है लेकिन प्रदूषण के स्तर में थोड़ा सुधार होने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह पश्चिमी विक्षोभ का असर है जो अगले तीन से चार दिनों में उत्तर भारत के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लेगा। लोगों को सलाह दी गई है कि वे मौसम के इस मिजाज को देखते हुए सफर करें और बच्चों व बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें। द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है और ग्रामीण इलाकों से हर ताजा अपडेट आप तक पहुंचाती रहेगी।




