नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश की राजनीति में इन दिनों एक नया बवंडर खड़ा हो गया है। आमिर खान के भांजे और जाने-माने अभिनेता इमरान खान को भारत छोड़ने का फरमान मिला है। प्रशासन ने उन्हें साफ शब्दों में 28 अक्टूबर तक देश छोड़ने का आदेश दिया है। इस अचानक आई खबर से राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है। विपक्षी दलों ने इस पूरे मामले को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है।
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब अभिनेता इमरान खान हाल ही में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए एक विरोध प्रदर्शन में नजर आए थे। मतदाता सूची और चुनाव से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष का यह प्रदर्शन काफी चर्चा में रहा था। इस प्रोटेस्ट में एक फिल्मी हस्ती की मौजूदगी ने प्रशासनिक अधिकारियों और सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। इसके तुरंत बाद यह बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है।
मतदाता सूची के विरोध में शामिल होने पर बड़ी कार्रवाई
भारत में इन दिनों मतदाता सूची और चुनावी पारदर्शिता को लेकर राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है। विपक्ष के तमाम नेता और कार्यकर्ता लगातार सड़कों पर उतरकर अपनी बात रख रहे हैं। इसी कड़ी में हुए एक बड़े प्रदर्शन में अभिनेता इमरान खान भी शामिल हुए थे। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस प्रदर्शन की गूंज सुनाई दी है और ब्रिटेन तथा पाकिस्तान तक में इस पर चर्चा हो रही है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, नियमों के दायरे में रहकर ही यह नोटिस जारी किया गया है। लेकिन विपक्षी दलों का कहना है कि यह अभिव्यक्ति की आजादी पर सीधा हमला है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि सरकार किसी भी तरह की असहमति की आवाज को दबाना चाहती है। उनका यह भी कहना है कि लोकतंत्र में हर नागरिक को अपनी बात रखने का पूरा हक मिलना चाहिए।
विपक्षी दलों ने सरकार पर लगाए तानाशाही के गंभीर आरोप
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेताओं ने इस नोटिस की कड़ी निंदा की है। उनका कहना है कि देश में असहिष्णुता का माहौल लगातार बढ़ता जा रहा है। यदि कोई कलाकार या आम नागरिक अपनी किसी बात के समर्थन में सड़क पर उतरता है, तो उसे निशाना बनाया जाता है। विपक्षी नेताओं ने इसे अलोकतांत्रिक और बदले की भावना से की गई कार्रवाई करार दिया है।
दूसरी ओर, आम जनता के बीच भी इस मुद्दे पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ लोगों का मानना है कि विदेशी मूल या विशेष स्थिति वाले लोगों को स्थानीय राजनीतिक मुद्दों से दूर रहना चाहिए। वहीं, एक बड़ा वर्ग इसे कलाकारों के अधिकारों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन मान रहा है। सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर तीखी बहस छिड़ी हुई है।
तय तारीख से पहले देश छोड़ने का दबाव और प्रशासनिक रुख
प्रशासन की तरफ से जारी आदेश के मुताबिक इमरान खान को 28 अक्टूबर की समयसीमा दी गई है। इस तय तारीख के भीतर उन्हें भारत छोड़ना होगा। इस कड़े निर्देश के बाद उनके करीबियों और वकीलों की टीम कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है। आने वाले दिनों में इस मामले पर कुछ और बड़े कानूनी कदम उठाए जाने की पूरी संभावना है।
द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है। हम यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि इस प्रशासनिक फैसले के पीछे के असली विधिक आधार क्या हैं। क्या आने वाले समय में इस मुद्दे पर कोई नया मोड़ आएगा? यह सवाल फिलहाल हर देशवासी के मन में बना हुआ है और सियासी पारा लगातार चढ़ता जा रहा है।







