कानपुर में मौसम का मिजाज इन दिनों लगातार बदल रहा है। पिछले कुछ दिनों में हुई मूसलाधार बारिश ने शहर की पोल खोल दी है। हालत यह हो गई कि महज 12 घंटे की बारिश ने शहर के कई इलाकों को जलमग्न कर दिया। जाजमऊ वीआईपी सड़क करीब 18 फीट तक नीचे धंस गई। इस भयानक हादसे और जलभराव के कारण लोगों के घरों और दुकानों के अंदर तक पानी भर गया। आरटीओ रोड किसी तालाब की तरह नजर आने लगी, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया।
प्रशासन और नगर निगम की टीमें जलभराव वाले इलाकों से पानी निकालने में जुटी रहीं। लोगों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। मुख्य मार्गों पर लंबा जाम लग गया और वाहन चालकों को घंटों फंसे रहना पड़ा। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि जल निकासी के पुख्ता इंतजाम न होने के कारण हर बार हल्की सी बारिश में भी शहर का यही हाल हो जाता है। व्यापारियों को इस पानी भरने से भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
वेस्टर्न डिस्टरबेंस और बादलों की आवाजाही
बारिश के इस दौर के बाद अब मौसम में एक नया बदलाव आया है। मौसम विभाग के मुताबिक, एक नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय हो गया है। इसके असर से शहर में फिर से बादल छाने लगे हैं और हल्की बूंदाबांदी की संभावना जताई जा रही है। इस बदलाव से तापमान में एक से दो डिग्री तक की गिरावट आ सकती है। हालांकि, बादलों की लुकाछिपी के बीच दिनभर छाई रहने वाली उमस ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। अधिकतम तापमान अभी भी 32 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है, जिससे लोगों को चिपचिपी गर्मी का अहसास हो रहा है।
शाम के वक्त ठंडी हवाएं चलने पर कुछ राहत जरूर मिलती है, लेकिन दोपहर की धूप और उमस लोगों को खासा परेशान कर रही है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले दिनों में बादलों की आवाजाही बनी रहेगी। कुछ इलाकों में हल्की बारिश या बौछारें पड़ने से तापमान में मामूली कमी दर्ज की जा सकती है। शहरवासियों को इस बदलते मौसम में अपनी सेहत का विशेष ख्याल रखने की सलाह दी जा रही है, क्योंकि वायरल बुखार और सर्दी-जुकाम के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं।
साफ मौसम से किसानों ने बढ़ाई आलू की बोआई
एक तरफ जहां शहर के लोग जलभराव और उमस से परेशान हैं, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण इलाकों के किसानों के लिए मौसम में आया सुधार राहत लेकर आया है। मौसम साफ होने और धूप निकलने के बाद किसानों ने खेतों में अपनी गतिविधियों को तेज कर दिया है। खासकर अगेती आलू की बोआई का काम युद्धस्तर पर शुरू हो गया है। किसान सुबह सवेरे ही अपने खेतों में ट्रैक्टर लेकर पहुंच रहे हैं ताकि समय पर फसल की बुआई पूरी की जा सके।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में मौसम ऐसा ही साफ रहा, तो आलू की फसल को बहुत फायदा पहुंचेगा। पिछले दिनों हुई अत्यधिक बारिश से खेतों में नमी बहुत ज्यादा बढ़ गई थी, जिससे बुआई में रुकावट आ रही थी। अब धूप खिलने से मिट्टी की नमी सही स्तर पर आ गई है और जुताई का काम आसान हो गया है। किसान इस सुनहरे मौके का पूरा फायदा उठाकर अपनी फसलों को बेहतर तरीके से तैयार करने में जुटे हैं।
प्रशासन की सतर्कता और राहत कार्य
प्रदेश के अन्य हिस्सों की तरह कानपुर और आसपास के जिलों में भी बाढ़ और बारिश के खतरे को लेकर प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री खुद हवाई सर्वेक्षण कर बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा ले रहे हैं। बिजनौर में हाईवे के डूबने और बदायूं में सड़कें बहने जैसी घटनाओं से सबक लेते हुए स्थानीय प्रशासन ने भी निचले इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। कानपुर में भी जलभराव वाले संवेदनशील बिंदुओं की पहचान कर ली गई है ताकि दोबारा ऐसी स्थिति आने पर तुरंत राहत पहुंचाई जा सके।
द फ्रीलान्स की ग्राउंड पड़ताल बताती है कि आम जनता मौसम के इस उतार-चढ़ाव से दो-चार हो रही है। जहां एक ओर सड़कों के धंसने और जलभराव ने बुनियादी ढांचे की पोल खोली है, वहीं किसानों के चेहरे पर खिली धूप ने उम्मीद की नई किरण जगाई है। आने वाले दिनों में मौसम का रुख क्या मोड़ लेगा, यह वेस्टर्न डिस्टरबेंस की चाल पर निर्भर करेगा, लेकिन फिलहाल शहरवासियों को उमस भरी गर्मी से पूरी तरह निजात पाने के लिए थोड़ा और इंतजार करना होगा।




