नई दिल्ली से 'द फ्रीलान्स' की विशेष ग्राउंड रिपोर्ट। शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व आते ही देश भर के मंदिरों और घरों में तैयारियां शुरू हो जाती हैं। लेकिन साल 2026 में महा अष्टमी और महानवमी की तारीख को लेकर लोगों के मन में बड़ा कन्फ्यूजन पैदा हो गया है। भक्त असमंजस में हैं कि वे माता की पूजा 18 अक्टूबर को करें या फिर 19 अक्टूबर को सही मुहूर्त रहेगा। आज तक और दैनिक भास्कर जैसे बड़े मीडिया घरानों की रिपोर्ट्स में भी इस बात की पुष्टि की गई है कि पंचांग के फेरबदल के कारण तिथियों का यह अंतर सामने आया है।
देश के कई हिस्सों से हमारे संवाददाताओं को लगातार ऐसे सवाल मिल रहे हैं जिनमें लोग व्रत के सही दिन को लेकर अपनी उलझन साझा कर रहे हैं। ज्योतिषियों और पंचांग के जानकारों के अनुसार तिथियों के घटने और बढ़ने की वजह से यह स्थिति बनती है। कई परिवारों में कन्या पूजन को लेकर विशेष नियम होते हैं। सही तारीख की जानकारी न होने पर व्रत और अनुष्ठान के समय में गलती होने का डर रहता है। यही वजह है कि गूगल ट्रेंड्स पर भी इन दिनों यही सवाल सबसे ज्यादा सर्च किया जा रहा है कि आखिर अष्टमी कब है।
पंचांग की गणना और तिथियों का यह फेर
विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स और धार्मिक जानकारों के विश्लेषण से यह साफ होता है कि उदया तिथि के मान के आधार पर ही व्रत तय किए जाते हैं। न्यूज18 और अमर उजाला की रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ जगहों पर 18 अक्टूबर को अष्टमी का प्रभाव मिल रहा है तो वहीं कुछ पंचांग 19 अक्टूबर को मुख्य तिथि मान रहे हैं। इस तकनीकी अंतर की वजह से ही आम लोग असमंजस में पड़ गए हैं। पंडितों का कहना है कि मां दुर्गा की आराधना में तिथि का विशेष महत्व होता है इसलिए सही समय पर ही हवन और पूजन करना उत्तम माना जाता है।
ग्रामीण और शहरी इलाकों में लोग अपने स्थानीय मंदिरों के पुजारियों से संपर्क कर रहे हैं ताकि इस दुविधा को दूर किया जा सके। कई स्थानों पर यह भी देखने को मिल रहा है कि अष्टमी और नवमी एक ही दिन यानी 19 अक्टूबर के आसपास पड़ रही हैं, जिससे व्रत रखने वालों को अपनी दिनचर्या और पूजन का समय उसी हिसाब से सेट करना पड़ रहा है। बाजार में भी पूजा सामग्री और कन्या पूजन के उपहार खरीदने वाले लोग दुकानदारों से इसी बात पर चर्चा करते नजर आ रहे हैं कि इस बार व्रत किस दिन रखा जाएगा।
भक्तों और परिवारों के सामने असमंजस की स्थिति
हमारे फील्ड सर्वे में यह बात सामने आई कि कामकाजी लोग और महिलाएं इस बात को लेकर ज्यादा चिंतित हैं कि वे ऑफिस की छुट्टी और व्रत का प्रबंधन कैसे करें। यदि 18 और 19 अक्टूबर दोनों ही तारीखों पर अलग-अलग राय रहेगी तो लोगों को व्रत खोलने और कन्या जिमाने में असुविधा हो सकती है। हालांकि, ज्योतिषीय सलाह यही दी जा रही है कि लोग अपने शहर के पंचांग और पारंपरिक रीति-रिवाजों को प्राथमिकता दें, ताकि किसी भी तरह की धार्मिक भूल से बचा जा सके।
मीडिया में आ रही तमाम खबरों और दावों के बीच यह जरूरी है कि अफवाहों से बचा जाए और प्रमाणित पंचांग का ही सहारा लिया जाए। 'द फ्रीलान्स' की टीम ने कई मंदिरों के आचार्यों से बातचीत की जिन्होंने स्पष्ट किया कि उदया तिथि के नियम के अनुसार ही महा अष्टमी का व्रत रखना सबसे सही और शास्त्रसम्मत होता है। इसलिए भक्तों को चाहिए कि वे अपने नजदीकी विद्वान पंडित से सलाह लेकर ही माता की आराधना की तिथि पक्की करें।
व्रत और पूजन से पहले इन बातों का रखें ध्यान
आगामी दिनों में जैसे-जैसे नवरात्रि के दिन नजदीक आएंगे, इस तारीख के पेंच पर और भी चर्चाएं सामने आएंगी। हमारी पड़ताल में यह निष्कर्ष निकला है कि तिथियों के इस छोटे से अंतर को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। बस जरूरत इस बात की है कि आप अपने पारंपरिक पुरोहित या मान्य पंचांग पर भरोसा रखें। 'द फ्रीलान्स' लगातार इस मुद्दे पर नजर बनाए हुए है ताकि आपको हर सही और सटीक जानकारी समय पर मिलती रहे।









