नई दिल्ली/पटना — किसान नेता राकेश टिकैत ने बिहार सरकार की सैटेलाइट सिटी योजना को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि किसानों की जमीन का अधिग्रहण पुराने नियमों और दरों पर नहीं होने दिया जाएगा। टिकैत ने साफ किया कि यदि सरकार को टाउनशिप के लिए जमीन चाहिए, तो उसे सर्किल रेट में बड़ा सुधार करना होगा। किसानों को उनकी जमीन का सही और पूरा हक मिलना चाहिए। इस मामले पर अब राजनीतिक सरगर्मी भी तेज हो गई है।
अपनी इस आक्रामक रणनीति के तहत किसान नेताओं ने साफ कर दिया है कि वे किसी भी कीमत पर कम मुआवजे पर समझौता नहीं करेंगे। टिकैत ने कहा कि आज से तेरह साल पहले सोने का जो भाव था, सरकार आज किसानों को जमीन के बदले वही रेट दे। पुरानी दरों पर जमीन देने से किसान पूरी तरह मना कर रहे हैं। प्रशासन और सरकार के सामने अब एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है क्योंकि किसान संगठन लगातार एकजुट हो रहे हैं और अपनी मांगों पर डटे हुए हैं।
पटना में सैटेलाइट सिटी प्रोजेक्ट पर गरमाई सियासत
बिहार की राजधानी पटना के पास बनने वाली सैटेलाइट सिटी के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। लेकिन किसान इस प्रक्रिया के विरोध में लामबंद होने लगे हैं। राकेश टिकैत ने इस प्रोजेक्ट पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार किसानों को उनकी उपजाऊ जमीन का उचित मूल्य नहीं देना चाहती। उन्होंने कहा कि 2013 का पुराना सर्किल रेट आज के दौर में पूरी तरह बेमानी है। महंगाई आसमान छू रही है और ऐसे में पुराने रेट पर जमीन देना किसानों के साथ सीधा धोखा है।
स्थानीय किसानों का कहना है कि सरकार बिना उनकी सहमति के औने-पौने दाम पर जमीन हथियाना चाहती है। किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर जबरन जमीन ली गई तो बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा। टिकैत के इस बयान के बाद राज्य के प्रशासनिक हलकों में भी हड़कंप मच गया है। अधिकारी अब इस बात की समीक्षा कर रहे हैं कि किसानों को कैसे शांत किया जाए और अधिग्रहण की प्रक्रिया को कैसे आगे बढ़ाया जाए ताकि कानून-व्यवस्था की स्थिति न बिगड़े।
बाबा टिकैत की जयंती पर युवाओं ने दिखाया दम
एक तरफ जहां जमीन के मुआवजे को लेकर राजनीतिक और किसान संघर्ष तेज हो गया है, वहीं दूसरी ओर भारतीय किसान यूनियन के संस्थापक महेंद्र सिंह टिकैत यानी बाबा टिकैत की जयंती पर उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस मौके पर युवाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और रक्तदान शिविर लगाए। देश के कई बड़े नेताओं ने भी बाबा टिकैत को याद किया और उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी सोशल मीडिया के जरिए बाबा टिकैत के संघर्षों को याद किया।
विश्लेषकों का मानना है कि टिकैत परिवार और भारतीय किसान यूनियन एक बार फिर से अपनी पुरानी जमीन और जनाधार को मजबूत करने में जुटा है। बिहार से लेकर उत्तर तक किसान मुद्दों को दोबारा राष्ट्रीय पटल पर लाया जा रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा देश की अन्य टाउनशिप और शहरीकरण की परियोजनाओं पर भी असर डाल सकता है। द फ्रीलान्स की टीम इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है और जमीनी रिपोर्ट जल्द ही अपडेट की जाएगी।
आंदोलन की अगली रूपरेखा और किसानों की चेतावनी
राकेश टिकैत ने अपने हालिया बयानों में साफ कर दिया है कि अगर सरकार ने किसानों की मांगें नहीं मानीं तो ट्रैक्टर मार्च और बड़े प्रदर्शनों का दौर फिर से शुरू हो सकता है। किसानों के ट्रैक्टरों और अन्य वाहनों को लेकर भी किसान संगठनों के भीतर गंभीर चर्चा चल रही है। सीजेपी और अन्य मंचों पर भी किसान हितों को लेकर आवाज उठाई जा रही है। प्रशासन के अधिकारी फिलहाल स्थिति पर नजर रखे हुए हैं और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पुलिस बल को भी सतर्क कर दिया गया है।
ग्रामीण इलाकों में किसानों के बीच बैठकों का दौर जारी है। हर कोई यही कह रहा है कि वे अपनी पुश्तैनी जमीन सस्ते दामों पर नहीं बेचेंगे। सरकार और प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि विकास कार्यों को आगे कैसे बढ़ाया जाए बिना किसानों को नाराज किए। द फ्रीलान्स की ग्राउंड इन्वेस्टिगेशन बताती है कि आने वाले हफ्तों में यह आंदोलन और अधिक आक्रामक रूप ले सकता है, जिससे सरकार को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है।




