नई दिल्ली/ग्राउंड ब्यूरो — देश भर के निजी स्कूलों में शिक्षा का अधिकार यानी आरटीई के तहत गरीब बच्चों के दाखिले की प्रक्रिया जोरों पर है। कानून के मुताबिक हर निजी स्कूल को अपनी शुरुआती कक्षा में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित रखनी होती हैं। इसके बावजूद कई बड़े निजी स्कूल इन बच्चों को दाखिला देने में आनाकानी कर रहे हैं। अब शिक्षा विभाग ने ऐसे स्कूलों पर कड़ा रुख अपनाना शुरू कर दिया है। नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर भारी जुर्माना लगाया जा रहा है।
जमीनी स्तर पर स्थिति यह है कि लॉटरी में नाम आने के बाद भी अभिभावक स्कूलों के चक्कर काट रहे हैं। कई स्कूलों में अभिभावकों को यह कहकर लौटा दिया जाता है कि सीटें भर चुकी हैं या कागजात पूरे नहीं हैं। शिक्षा अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि चयनित बच्चों को बिना किसी ठोस कारण के मना नहीं किया जा सकता। यदि कोई स्कूल ऐसा करता है, तो उसकी मान्यता तक रद्द की जा सकती है। हाल के दिनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहां शिकायतों की जांच के बाद तुरंत सख्त कार्रवाई की गई है।
निजी स्कूलों की मनमानी पर एक-एक लाख का जुर्माना
शिक्षा विभाग ने दाखिला न देने वाले दो प्रमुख निजी स्कूलों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना ठोका है। इन स्कूलों को सात दिन के भीतर जुर्माने की राशि जमा करने और बच्चों का दाखिला सुनिश्चित करने का आदेश दिया गया है। यदि स्कूल तय समय में आदेश का पालन नहीं करते हैं, तो उन पर रोजाना के हिसाब से अतिरिक्त जुर्माना लगाया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि गरीब बच्चों के हक से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मैदान पर काम कर रहे हमारे संवाददाताओं ने कई पीड़ित परिवारों से बात की। अभिभावकों का कहना है कि वे महीनों से ऑनलाइन फॉर्म भरने और सत्यापन के लिए दफ्तरों के चक्कर लगा रहे थे। जब चयन सूची में नाम आया, तो स्कूल प्रबंधन ने कई तरह के बहाने बनाने शुरू कर दिए। कई जगहों पर स्कूल प्रबंधन ने खेल के मैदान या अन्य सुविधाओं के नाम पर अलग से फीस की मांग भी की। अब प्रशासन के कड़े रुख से ऐसे परिवारों में न्याय की उम्मीद जगी है।
मध्य प्रदेश सरकार देगी 502 करोड़ रुपये की फीस भरपाई
निजी स्कूलों का अक्सर यह तर्क होता है कि सरकार उन्हें आरटीई के बच्चों की फीस की भरपाई समय पर नहीं करती है। इस समस्या को सुलझाने के लिए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने निजी स्कूलों के लिए 502 करोड़ रुपये की फीस प्रतिपूर्ति राशि जारी करने का फैसला किया है। यह पैसा सीधे स्कूलों के बैंक खातों में भेजा जा रहा है ताकि वे बच्चों को पढ़ाने में किसी तरह की लापरवाही न बरतें।
इस भारी-भरकम राशि के जारी होने से हजारों स्कूलों को बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी। जानकारों का मानना है कि जब सरकार समय पर पैसा देगी, तो स्कूलों के पास बच्चों को दाखिला न देने का कोई बहाना नहीं बचेगा। राज्य सरकार ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे सुनिश्चित करें कि एक भी पात्र बच्चा स्कूल जाने से वंचित न रहे। यदि कोई स्कूल राशि लेने के बाद भी बच्चों के साथ भेदभाव करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी।
उत्तर प्रदेश के कई जिलों में हजारों बच्चों को मिला सहारा
उत्तर प्रदेश से भी आरटीई को लेकर सकारात्मक खबरें सामने आई हैं। गोंडा जिले में इस सत्र में 6,339 बच्चों को आरटीई के तहत निजी स्कूलों में सहारा मिला है। इन बच्चों की पूरी पढ़ाई का खर्च अब सरकार वहन करेगी। बच्चों के माता-पिता बेहद खुश हैं क्योंकि वे कभी अपने बच्चों को बड़े निजी स्कूलों में पढ़ाने का सपना भी नहीं देख सकते थे। जिला प्रशासन ने सभी बच्चों के दाखिले समय सीमा के भीतर कराने के निर्देश दिए हैं।
इसके अलावा बुलंदशहर और अन्य जिलों में शिक्षकों के तबादले भी आरटीई के छात्र-शिक्षक अनुपात के आधार पर किए जा रहे हैं। कानून कहता है कि हर स्कूल में बच्चों की संख्या के अनुसार पर्याप्त शिक्षक होने चाहिए। सरकार का प्रयास है कि प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की कमी न रहे ताकि सरकारी स्कूलों में भी पढ़ाई का स्तर बेहतर बना रहे।
दाखिले के लिए अभिभावक इन जरूरी बातों का रखें ध्यान
द फ्रीलान्स की पड़ताल में यह बात सामने आई है कि कई बार सही जानकारी न होने के कारण भी अभिभावकों को परेशानी होती है। यदि आपके बच्चे का नाम आरटीई लॉटरी में आ गया है, तो जरूरी कागजात तुरंत तैयार रखें। इनमें बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र, माता-पिता का आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र और आधार कार्ड शामिल हैं। सभी दस्तावेजों की साफ फोटोकॉपी लेकर स्कूल में तय समय पर पहुंचना जरूरी है।
यदि कोई स्कूल दाखिला देने से मना करता है, तो तुरंत अपने जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी या ब्लॉक शिक्षा अधिकारी के पास लिखित शिकायत दर्ज कराएं। आप राज्य के आरटीई पोर्टल पर भी ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं। शिक्षा का अधिकार कानून देश के हर बच्चे को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा की गारंटी देता है। कानून के इस पहरे के चलते अब निजी स्कूलों के लिए अपनी मनमानी चलाना आसान नहीं होगा।












